आसनसोल, बिकाश चंद्र, सिटी टुडे न्यूज़: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के आसनसोल दौरे के दौरान धार्मिक उत्साह और भव्य आयोजन का अनूठा नजारा देखने को मिला। आसनसोल दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के नाकड़ा सोता में मुख्यमंत्री का स्वागत बेहद खास अंदाज में किया गया। बनारस के गंगा घाट की तर्ज पर आयोजित भव्य आरती, महिलाओं की शंख ध्वनि और पुरोहितों के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया गया। धार्मिक वातावरण के बीच मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने काली पूजा पंडाल का उद्घाटन किया। हालांकि, इस कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू केवल धार्मिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि मुख्यमंत्री ने आसनसोल शिल्पांचल के औद्योगिक भविष्य को लेकर भी बड़ी बात कही। उन्होंने बंद पड़े कारखानों को दोबारा खोलने और स्थानीय बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने की दिशा में प्रयास करने का भरोसा दिया।
मुख्यमंत्री के इस दौरे से आसनसोल के औद्योगिक क्षेत्र में नई उम्मीदें जगी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि छठ पूजा के बाद प्रशासनिक बैठक आयोजित कर बंद कारखानों और औद्योगिक विकास से जुड़े मुद्दों पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बनारस के गंगा घाट जैसा नजारा, शंख ध्वनि से गूंजा नाकड़ा सोता
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के आगमन को लेकर नाकड़ा सोता में विशेष तैयारियां की गई थीं। उनके स्वागत के लिए बनारस के गंगा घाट की तर्ज पर भव्य आरती का आयोजन किया गया। पुरोहितों ने पारंपरिक धार्मिक विधि-विधान के साथ आरती की, जबकि महिलाओं ने शंख ध्वनि के माध्यम से मुख्यमंत्री का स्वागत किया।
आरती और शंखनाद के बीच पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में डूब गया। इस विशेष स्वागत समारोह ने कार्यक्रम को अलग पहचान दी। मुख्यमंत्री ने भी इस धार्मिक आयोजन में हिस्सा लिया और काली पूजा पंडाल का उद्घाटन किया।
यह कार्यक्रम आसनसोल दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में आयोजित किया गया, जहां राज्य की मंत्री एवं स्थानीय विधायक अग्निमित्रा पाल की मौजूदगी भी विशेष रूप से रही। काली पूजा के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में स्थानीय लोगों और पार्टी समर्थकों में काफी उत्साह देखने को मिला।
कई मंत्री और विधायक रहे मौजूद
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के साथ राज्य की मंत्री अग्निमित्रा पाल, मंत्री डॉ. अजय पोद्दार, पांडवेश्वर के विधायक जितेंद्र तिवारी और रानीगंज के विधायक पार्थो घोष सहित कई विशिष्ट व्यक्ति उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में धार्मिक आयोजन के साथ क्षेत्र के विकास और औद्योगिक समस्याओं पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में आसनसोल की पुरानी औद्योगिक पहचान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह इलाका लंबे समय से आसनसोल शिल्पांचल के नाम से जाना जाता है। यहां कभी बड़े पैमाने पर कल-कारखाने संचालित होते थे और हजारों लोगों की आजीविका इन उद्योगों पर निर्भर थी।
बंद कारखानों को फिर से खोलने पर मुख्यमंत्री का जोर
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने आसनसोल के औद्योगिक इतिहास और वर्तमान स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वामपंथी शासन और उसके बाद तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल में धीरे-धीरे इस क्षेत्र के कई कल-कारखाने बंद हो गए। इसके कारण औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित हुईं और बड़ी संख्या में लोगों के रोजगार पर असर पड़ा।
उन्होंने कहा कि आसनसोल की औद्योगिक पहचान को दोबारा मजबूत करने की जरूरत है। इसके लिए बंद पड़े कारखानों को फिर से चालू करने और नए निवेश की संभावनाओं को तलाशने का प्रयास किया जाएगा।
मुख्यमंत्री के अनुसार, इस दिशा में केवल घोषणाओं तक सीमित रहने के बजाय प्रशासनिक स्तर पर ठोस पहल की आवश्यकता है। उन्होंने संकेत दिया कि संबंधित विभागों और अधिकारियों के साथ बैठक कर औद्योगिक विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार किया जाएगा।
छठ पूजा के बाद होगी प्रशासनिक बैठक
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि छठ पूजा समाप्त होने के बाद इस विषय पर प्रशासनिक बैठक की जाएगी। इस बैठक में आसनसोल शिल्पांचल के बंद कारखानों, औद्योगिक जमीन, संभावित निवेश और रोजगार सृजन जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
आसनसोल, रानीगंज, कुल्टी, जामुड़िया और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में लंबे समय से रोजगार और कारखानों के पुनरुद्धार का मुद्दा महत्वपूर्ण रहा है। कई परिवारों की आजीविका उद्योगों पर निर्भर करती है। ऐसे में मुख्यमंत्री की घोषणा से स्थानीय युवाओं और श्रमिक परिवारों को नई उम्मीद मिली है।
हालांकि, किन कारखानों को प्राथमिकता दी जाएगी और उन्हें दोबारा खोलने के लिए क्या योजना तैयार होगी, इस संबंध में अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। प्रशासनिक बैठक के बाद ही इस दिशा में आगे की तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है।

वेदांता समूह के बंद कारखाने की जमीन पर निवेश की उम्मीद
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने वेदांता समूह के बंद पड़े कारखाने का भी विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस कारखाने की जमीन पर भी निवेश की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस संबंध में वेदांता समूह के प्रमुख अनिल अग्रवाल ने भी अपनी बात रखी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में इस जमीन का उपयोग औद्योगिक निवेश के लिए किया जा सकता है।
यदि इस दिशा में पहल सफल होती है, तो आसनसोल क्षेत्र में नई औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होने और क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि धीरे-धीरे आसनसोल शिल्पांचल की पुरानी पहचान को फिर से वास्तविक रूप में स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा। उनके इस बयान को औद्योगिक क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक और विकासात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
त्योहार खुशियों के साथ मनाएं, दूसरों की परेशानी का रखें ध्यान
औद्योगिक विकास की बातों के अलावा मुख्यमंत्री ने काली पूजा के अवसर पर लोगों को शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने सभी से त्योहार को हंसी-खुशी और आपसी सौहार्द के साथ मनाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि उत्सव के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए कि किसी दूसरे व्यक्ति को परेशानी न हो। त्योहार की खुशियां सभी के साथ साझा की जानी चाहिए और सामाजिक जिम्मेदारियों का भी पालन होना चाहिए।
कुल मिलाकर, आसनसोल के नाकड़ा सोता में मुख्यमंत्री का यह दौरा धार्मिक भव्यता और औद्योगिक विकास के मुद्दों के कारण चर्चा में रहा। अब स्थानीय लोगों की निगाहें छठ पूजा के बाद होने वाली प्रशासनिक बैठक पर टिकी हैं। देखना होगा कि बंद कारखानों को फिर से चालू करने और वेदांता समूह की जमीन पर निवेश की संभावनाओं को लेकर सरकार की ओर से क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।




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