कोलकाता, बिकाश चंद्र, सिटी टुडे न्यूज़: पश्चिम बंगाल में निजी बसों से रोजाना सफर करने वाले यात्रियों की जेब पर आने वाले दिनों में अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। राज्य में बस किराया बढ़ाने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। लंबे समय से किराये में संशोधन नहीं होने और डीजल समेत अन्य परिचालन खर्चों में लगातार बढ़ोतरी का हवाला देते हुए बस मालिक संगठनों ने राज्य सरकार के सामने नया प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव के तहत कोलकाता में बस का न्यूनतम किराया 18 रुपये और राज्य के विभिन्न जिलों में 20 रुपये करने की मांग की गई है।
हालांकि, अभी यह केवल बस मालिक संगठनों का प्रस्ताव है। राज्य सरकार ने किराया बढ़ाने को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। ऐसे में फिलहाल यात्रियों को प्रस्तावित दरों को नई लागू किराया सूची नहीं समझना चाहिए। लेकिन इस मांग ने आम यात्रियों के बीच चर्चा जरूर शुरू कर दी है कि यदि सरकार प्रस्ताव स्वीकार करती है, तो रोजाना बस से कार्यालय, स्कूल, कॉलेज और बाजार जाने वालों के मासिक खर्च पर कितना असर पड़ेगा।
कोलकाता में 18 और जिलों में 20 रुपये न्यूनतम किराये की मांग
बस मालिक संगठनों ने परिवहन मंत्री के सामने जो नई किराया व्यवस्था रखी है, उसमें कोलकाता और जिलों के लिए अलग-अलग न्यूनतम दरों का प्रस्ताव दिया गया है। संगठन चाहते हैं कि कोलकाता में बस में चढ़ते ही यात्रियों से कम से कम 18 रुपये और राज्य के विभिन्न जिलों में न्यूनतम 20 रुपये किराया लिया जाए।
बस मालिकों का तर्क है कि वर्तमान किराया व्यवस्था में बसों का संचालन करना आर्थिक रूप से कठिन होता जा रहा है। उनका कहना है कि बस चलाने के लिए केवल डीजल का खर्च ही नहीं उठाना पड़ता, बल्कि कर्मचारियों का वेतन, वाहन की मरम्मत, टायर, स्पेयर पार्ट्स, बीमा और अन्य खर्च भी लगातार बढ़ रहे हैं।
उनके अनुसार, यदि किराये में समय के अनुरूप बदलाव नहीं किया गया, तो निजी बस परिवहन व्यवस्था पर आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है।
वर्ष 2018 के बाद किराया नहीं बढ़ने का दावा
बस मालिक संगठनों का कहना है कि वर्ष 2018 के बाद से राज्य में सरकारी स्तर पर बस किराये में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। दूसरी ओर, इस अवधि में परिचालन लागत में काफी बदलाव आया है। डीजल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, वाहनों के रखरखाव और कलपुर्जों की कीमतों में वृद्धि ने बस मालिकों की परेशानी बढ़ा दी है।
बस संचालकों के मुताबिक, मौजूदा आमदनी और बढ़ते खर्च के बीच संतुलन बनाए रखना मुश्किल हो रहा है। कई बस मालिकों को आर्थिक नुकसान के कारण अपनी बसें सड़कों से हटाने तक की नौबत आ रही है। उनका दावा है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में निजी बसों की संख्या और सेवा की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
हालांकि, बस मालिकों के इस दावे और वास्तविक परिचालन लागत का आकलन सरकारी स्तर पर होना बाकी है। किराया बढ़ाने का फैसला यात्रियों की आर्थिक स्थिति और सार्वजनिक परिवहन की जरूरतों को ध्यान में रखकर ही लिया जाना होगा।
दुर्गापूजा से पहले भी मंत्री को लिखा गया था पत्र
बस किराया बढ़ाने का मुद्दा नया नहीं है। दुर्गापूजा से पहले भी बस मालिक संगठनों ने इस संबंध में परिवहन मंत्री को पत्र लिखकर किराये में संशोधन की मांग की थी। इसके बाद 17 सितंबर को हुई बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी।
बस मालिक संगठनों का कहना है कि उस बैठक में परिवहन मंत्री की ओर से दुर्गापूजा के बाद किराया बढ़ाने के विषय पर सकारात्मक निर्णय लेने का आश्वासन दिया गया था। अब उसी आश्वासन का हवाला देते हुए संगठनों ने फिर से सरकार के सामने अपना प्रस्ताव रखा है।
उनकी मांग है कि इस मामले को लंबे समय तक लंबित न रखा जाए और जल्द कोई व्यावहारिक निर्णय लिया जाए। बस मालिकों का मानना है कि किराया संशोधन होने से निजी परिवहन क्षेत्र को आर्थिक राहत मिल सकती है और बस सेवाओं को नियमित रूप से चलाने में मदद मिलेगी।
आम यात्रियों पर पड़ेगा सीधा असर
यदि सरकार न्यूनतम किराये में बढ़ोतरी के प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो इसका सीधा असर आम यात्रियों पर पड़ सकता है। खासकर वे लोग जो रोजाना बस से कार्यालय, दुकान, स्कूल, कॉलेज या अन्य कामों के लिए यात्रा करते हैं, उनके मासिक परिवहन खर्च में वृद्धि हो सकती है।
कोलकाता के साथ-साथ आसनसोल, दुर्गापुर, बर्दवान, सिलीगुड़ी और राज्य के दूसरे जिलों में भी बड़ी संख्या में लोग निजी बसों पर निर्भर हैं। ऐसे यात्रियों के लिए बस किराया रोजमर्रा के बजट का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। न्यूनतम किराया बढ़ने से छोटी दूरी की यात्रा करने वालों पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
दूसरी ओर, बस मालिकों का तर्क है कि यदि बसों का संचालन ही घाटे में होगा, तो सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में सरकार के सामने यात्रियों को किफायती सफर उपलब्ध कराने और बस संचालकों की आर्थिक समस्याओं के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी।
अब सरकार के फैसले पर टिकी सबकी नजर
फिलहाल कोलकाता में 18 रुपये और जिलों में 20 रुपये न्यूनतम किराये की मांग पर राज्य सरकार की अंतिम मुहर नहीं लगी है। प्रस्ताव पर विचार और संबंधित पक्षों के साथ चर्चा के बाद ही कोई आधिकारिक फैसला सामने आ सकता है।
अब आम यात्रियों और बस मालिकों, दोनों की नजर परिवहन विभाग के अगले कदम पर टिकी हुई है। यदि प्रस्ताव स्वीकार किया जाता है, तो राज्य की बस किराया व्यवस्था में बदलाव देखने को मिल सकता है। वहीं, सरकार यदि किराया बढ़ाने से पहले अन्य विकल्पों पर विचार करती है, तो बस मालिकों की मांग पर अलग रास्ता भी निकल सकता है।
फिलहाल यात्रियों के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि प्रस्तावित 18 और 20 रुपये की दरें अभी लागू नहीं हुई हैं। सरकार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही नई किराया व्यवस्था को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।




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