कोलकाता, बिकाश चंद्र, सिटी टुडे न्यूज़: पश्चिम बंगाल में मंगलवार को दो अलग-अलग पुलिस मुठभेड़ों में दो आरोपियों की मौत हो गई। उत्तर 24 परगना के गाइघाटा में 17 वर्षीय किशोरी से दुष्कर्म और हत्या के मामले में गिरफ्तार प्रह्लाद दास की मौत हुई, जबकि मुर्शिदाबाद के धुलियान में व्यवसायी और भाजपा कार्यकर्ता सुजीत मंडल की हत्या के मामले में गिरफ्तार सामाउन शेख मारा गया। पुलिस का दावा है कि दोनों आरोपियों ने घटनाओं का पुनर्निर्माण कराने के दौरान पुलिसकर्मियों के हथियार छीनकर भागने की कोशिश की और तीन-तीन राउंड गोलियां चलाईं। जवाबी कार्रवाई में दोनों घायल हुए और बाद में अस्पताल में उनकी मौत हो गई। इन घटनाओं ने राज्य में अपराध, पुलिस कार्रवाई और कानून-व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
गाइघाटा में कैसे हुई मुठभेड़?
पुलिस के अनुसार, मंगलवार तड़के गाइघाटा में घटना का पुनर्निर्माण कराने के बाद आरोपी प्रह्लाद दास को वापस थाने ले जाया जा रहा था। इसी दौरान बैद्यबाड़ी इलाके के पास उसने कथित तौर पर पेशाब करने के लिए वाहन रोकने को कहा। पुलिस का दावा है कि मौके का फायदा उठाकर उसने एक पुलिसकर्मी की बंदूक छीन ली और तीन राउंड फायरिंग की। इनमें से एक गोली पुलिस वाहन में लगी।
पुलिस के मुताबिक, गोलीबारी के दौरान एक पुलिसकर्मी घायल हो गया, जबकि दूसरे पुलिसकर्मी ने अपनी जान बचाने के लिए सड़क किनारे स्थित जलाशय में छलांग लगा दी। इसके बाद पुलिस ने आत्मरक्षा में चार राउंड गोलियां चलाईं। एक गोली प्रह्लाद को लगी। उसे चांदपाड़ा ग्रामीण अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। घायल पुलिसकर्मी का भी प्राथमिक उपचार किया गया।
प्रह्लाद के परिवार के सदस्यों ने बताया कि पुलिस रात करीब दो बजे उसे लेकर घर आई थी। हालांकि, घटनाक्रम के सभी पहलुओं की स्वतंत्र पुष्टि और विस्तृत जांच के निष्कर्ष अभी सामने नहीं आए हैं।
सांस्कृतिक कार्यक्रम से लापता हुई थी किशोरी
इस मामले की शुरुआत शनिवार रात हुई थी, जब गाइघाटा थाना क्षेत्र की 17 वर्षीय किशोरी अपने घर के पास आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने गई थी। परिवार के अनुसार, कार्यक्रम में उसके परिजन और दोस्त भी मौजूद थे। रात करीब 11:30 बजे उसके मोबाइल पर फोन आया, जिसके बाद वह कार्यक्रम छोड़कर चली गई। इसके बाद वह घर नहीं लौटी।
परिजनों ने रातभर उसकी तलाश की। रविवार सुबह उसका क्षत-विक्षत और निर्वस्त्र शव बरामद हुआ। परिवार ने दुष्कर्म के बाद हत्या किए जाने का आरोप लगाया। पुलिस ने रविवार को ही प्रह्लाद दास को गिरफ्तार कर लिया था। अब आरोपी की मौत के बाद मामले की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
धुलियान में सुजीत मंडल हत्याकांड का आरोपी मारा गया
दूसरी घटना मुर्शिदाबाद जिले के धुलियान की है। पुलिस के मुताबिक, मंगलवार दोपहर सुजीत मंडल हत्याकांड में गिरफ्तार सामाउन शेख को घटनास्थल का पुनर्निर्माण कराने के लिए पुरातन डाकबंगला इलाके में ले जाया गया था। इसी स्थान पर सुजीत की हत्या हुई थी।
पुलिस का दावा है कि पुनर्निर्माण के दौरान सामाउन ने एक पुलिसकर्मी का हथियार छीन लिया और भागने की कोशिश करते हुए तीन राउंड गोलियां चलाईं। जवाबी गोलीबारी में वह घायल हो गया। उसे जंगीपुर महकमा अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
जंगीपुर पुलिस जिले के एक अधिकारी के अनुसार, सुजीत मंडल हत्याकांड की जांच राज्य अपराध जांच विभाग कर रहा था। इसी सिलसिले में आरोपी को घटनास्थल पर ले जाया गया था।
सुजीत मंडल की हत्या के बाद पुलिस पर भी उठे थे सवाल
सामशेरगंज के पुरातन डाकबंगला इलाके के निवासी सुजीत मंडल 28 अगस्त को रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हुए थे। बाद में उनका खंडित शव बरामद हुआ। मामले में सामिउल शेख, ताजकिरा बीबी और जॉनी शेख को गिरफ्तार किया गया था।
सुजीत की पत्नी सुमना मंडल ने आरोप लगाया था कि उन्होंने स्थानीय पुलिस चौकी से कई बार मदद मांगी, लेकिन उन्हें सहायता नहीं मिली। इसके बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे। अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए धुलियान टीओपी के प्रभारी एएसआई सुमंत कुमार दास और सामशेरगंज थाने के सेकंड ऑफिसर एसआई सैफुल आलम को निलंबित किया गया। थाना प्रभारी सुब्रत घोष को लाइन क्लोज कर विभागीय जांच के निर्देश दिए गए। फरक्का के एसडीपीओ शेख शम्सुद्दीन का तबादला किया गया, जबकि जंगीपुर के एसपी सुरिंदर सिंह को कारण बताओ नोटिस दिया गया।
सामाउन की मौत के बाद ताजकिरा बीबी और जॉनी शेख पुलिस हिरासत में हैं। पुलिस के अनुसार, सामाउन और ताजकिरा पिछले करीब आठ महीनों से पति-पत्नी की पहचान के साथ धुलियान में किराये के मकान में रह रहे थे।
मुख्यमंत्री और भाजपा नेताओं ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री और राज्य के पुलिस मंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि नई सरकार के शासन में अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं पर अत्याचार और नशे से जुड़े मामलों में पुलिस को कार्रवाई की छूट दी गई है और पुलिसकर्मी मौके की परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेंगे। उन्होंने पुलिसकर्मियों के साथ खड़े रहने की बात भी कही।
पंचायत मंत्री दिलीप घोष ने गाइघाटा की कार्रवाई का समर्थन करते हुए अपराध के खिलाफ शून्य सहनशीलता की नीति पर जोर दिया। भाजपा विधायक रत्ना देवनाथ ने भी मुठभेड़ का समर्थन किया और कहा कि महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराध करने वालों के मन में कानून का डर होना चाहिए। शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने भी पहले बारुईपुर की घटना के बाद अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की वकालत की थी।
बारुईपुर की घटना से भी हो रही तुलना
इन दोनों घटनाओं की तुलना दक्षिण 24 परगना के बारुईपुर में करीब साढ़े तीन महीने पहले हुई पुलिस मुठभेड़ से की जा रही है। उस मामले में 11 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के आरोपी प्रभार मंडल की मौत हुई थी। पुलिस के अनुसार, उस घटना में आरोपी ने हथियार छीनने के बाद एक राउंड गोली चलाई थी।
पुलिस कार्रवाई के साथ निष्पक्ष जांच भी जरूरी
एक ही दिन दो आरोपियों की पुलिस गोलीबारी में मौत होने से राज्य में कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्रवाई पर बहस तेज हो गई है। पुलिस के दावों, गोलीबारी की परिस्थितियों और दोनों घटनाओं में इस्तेमाल हुए हथियारों की जांच महत्वपूर्ण होगी। साथ ही, हिरासत में या पुलिस कार्रवाई के दौरान हुई मौतों के मामलों में लागू कानूनी प्रक्रिया और स्वतंत्र जांच से जुड़े सवाल भी अहम हैं।
फिलहाल, दोनों घटनाओं को लेकर पुलिस का पक्ष सामने आया है, लेकिन सभी तथ्यों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों से ही हो सकेगी। गंभीर अपराधों के पीड़ितों को न्याय दिलाना और पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही सुनिश्चित करना—दोनों ही लोकतांत्रिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण हैं।




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