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आसनसोल-दुर्गापुर

आसनसोल शिल्पांचल में सिंदूर खेला के साथ मां दुर्गा को विदाई, भावुक हुईं महिलाएं

Moutushi · 22 October 2026, 12:42 PM

आसनसोल, बिकाश चंद्र, सिटी टुडे न्यूज़ : दुर्गा पूजा २०२६ के समापन के अवसर पर आसनसोल शिल्पांचल में सिंदूर खेला की परंपरा श्रद्धा, उत्साह और भावुकता के साथ निभाई गई। विभिन्न दुर्गा पूजा पंडालों में सुबह से ही महिलाओं की भागीदारी देखने को मिली। महिलाओं ने मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित कर उनकी विदाई की और एक-दूसरे के माथे तथा चेहरे पर सिंदूर लगाकर शुभकामनाएं दीं। इस दौरान कहीं परंपरा की खुशी दिखाई दी, तो कहीं मां दुर्गा की विदाई का गम महिलाओं की आंखों में छलक उठा। पूरे आयोजन में भक्ति, पारिवारिक भावनाओं और बंगाल की सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली।

दुर्गा पूजा के अंतिम चरण में सिंदूर खेला का विशेष महत्व होता है। पूजा के दिनों में मां दुर्गा के आगमन का उत्सव मनाने वाले श्रद्धालु विदाई के समय भावुक हो जाते हैं। इसी भावना के बीच आसनसोल शिल्पांचल की महिलाओं ने मां को सिंदूर अर्पित किया और अगले वर्ष फिर से उनके आगमन की प्रार्थना की।

सिंदूर खेला के साथ मां दुर्गा को अंतिम प्रणाम

दुर्गा पूजा के अंतिम दिन विभिन्न पूजा पंडालों में महिलाओं ने परंपरागत तरीके से मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित किया। इसके बाद उन्होंने एक-दूसरे को सिंदूर लगाया और सुख, शांति तथा खुशहाली की कामना की। इस दौरान महिलाओं के चेहरों पर उत्सव की खुशी के साथ मां की विदाई का भावुक एहसास भी दिखाई दिया।

सिंदूर खेला केवल एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि कई परिवारों और समुदायों के लिए भावनाओं से जुड़ा अवसर भी है। महिलाएं इस परंपरा के माध्यम से मां दुर्गा के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करती हैं। एक-दूसरे को सिंदूर लगाना आपसी स्नेह, शुभकामना और सामूहिक उत्सव का प्रतीक माना जाता है।

आसनसोल शिल्पांचल के पूजा पंडालों में भी इसी परंपरा का पालन किया गया। महिलाओं ने मां दुर्गा के चरणों में श्रद्धा व्यक्त करते हुए उन्हें विदाई दी। इसके साथ ही उन्होंने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर शुभकामनाएं दीं। मां की प्रतिमा के सामने प्रार्थना करते समय कई महिलाएं भावुक नजर आईं।

बंगाल की संस्कृति से गहराई से जुड़ी है परंपरा

पश्चिम बंगाल में सिंदूर खेला की परंपरा लंबे समय से दुर्गा पूजा के साथ जुड़ी हुई है। विशेष रूप से विजयादशमी के अवसर पर मां दुर्गा को विदाई देने से पहले महिलाएं उन्हें सिंदूर अर्पित करती हैं। इसके बाद वे एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर शुभकामनाएं देती हैं।

परंपरागत रूप से सिंदूर को सुहाग, मंगलकामना और शुभता से जोड़कर देखा जाता है। विवाहित महिलाएं इस अवसर पर अपने दांपत्य जीवन की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं और दूसरी महिलाओं के लिए भी मंगलकामना व्यक्त करती हैं। हालांकि, इस परंपरा में भागीदारी और इसे मनाने के तरीके परिवारों तथा पूजा समितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।

दुर्गा पूजा के दौरान मां दुर्गा को बेटी के रूप में घर आने वाली देवी के रूप में भी देखा जाता है। उनके आगमन पर स्वागत और विदाई के समय भावुकता इसी सांस्कृतिक भावना से जुड़ी है। सिंदूर खेला इस भावना को व्यक्त करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है।

खुशी के बीच विदाई का गम भी आया नजर

दुर्गा पूजा के दिनों में पंडालों में दर्शन, पूजा-अर्चना और उत्सव का माहौल रहता है। लेकिन जैसे ही मां की विदाई का समय आता है, श्रद्धालुओं के मन में अगले वर्ष तक इंतजार करने की भावना जाग उठती है। आसनसोल शिल्पांचल में भी सिंदूर खेला के दौरान यही भावनात्मक दृश्य देखने को मिला।

महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर शुभकामनाएं दे रही थीं, लेकिन मां दुर्गा की विदाई का एहसास उन्हें भावुक भी कर रहा था। मां के सामने सिर झुकाकर प्रार्थना करना और अगले वर्ष फिर आने की कामना करना इस अवसर का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।

सिंदूर खेला के दौरान महिलाओं की सामूहिक भागीदारी दुर्गा पूजा के सामाजिक पक्ष को भी सामने लाती है। अलग-अलग परिवारों और समुदायों की महिलाएं एक साथ इस परंपरा में शामिल होती हैं। इससे आपसी मेलजोल और सांस्कृतिक जुड़ाव को भी मजबूती मिलती है।

अगले वर्ष मां के आगमन का रहेगा इंतजार

दस दिनों तक चले दुर्गा पूजा उत्सव के समापन के साथ अब श्रद्धालुओं को अगले वर्ष मां दुर्गा के आगमन का इंतजार रहेगा। पूजा के दौरान बने उत्सवी माहौल और मां के दर्शन की यादें लोगों के मन में बनी रहेंगी। सिंदूर खेला के साथ महिलाओं ने इसी भावुक क्षण में मां को विदाई दी।

आसनसोल शिल्पांचल में सिंदूर खेला ने एक बार फिर दिखाया कि दुर्गा पूजा धार्मिक आस्था के साथ-साथ बंगाल की संस्कृति, परंपरा और सामूहिक भावनाओं का भी उत्सव है। मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित करने और एक-दूसरे को शुभकामनाएं देने के बाद महिलाओं ने उनसे सुख-शांति और मंगल की कामना की।

विदाई के इस अवसर पर श्रद्धालुओं की भावना एक ही थी—मां दुर्गा अगले वर्ष फिर आएं, सभी के जीवन में खुशियां लेकर आएं और भक्तों पर अपना आशीर्वाद बनाए रखें। इसी प्रार्थना के साथ आसनसोल शिल्पांचल में सिंदूर खेला के बीच दुर्गा पूजा का उत्सव भावुक यादों के साथ विदा हुआ।

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