Friday, 4 September 2026
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बंगाल

कैमक स्ट्रीट के तृणमूल कार्यालय में तड़के हमला! अभिषेक ने सीसीटीवी दिखाकर मांगी गिरफ्तारी

Moutushi · 4 September 2026, 10:14 AM

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख राजनीतिक कार्यालय को लेकर एक बार फिर सियासी माहौल गरमा गया है। कैमक स्ट्रीट स्थित तृणमूल कांग्रेस के कार्यालय में गुरुवार तड़के कथित तौर पर हमला और तोड़फोड़ किए जाने का मामला सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि सुबह करीब साढ़े चार बजे कुछ लोग कार्यालय में घुसे और वहां जमकर तोड़फोड़ की। कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों और पार्टी से जुड़े लोगों के साथ मारपीट करने तथा उनके मोबाइल फोन छीनने का भी आरोप लगाया गया है।

घटना के बाद तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करते हुए आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। हालांकि, सामने आए सीसीटीवी फुटेज की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। मामले को लेकर तृणमूल और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है और कोलकाता की राजनीति में इस घटना ने नया विवाद खड़ा कर दिया है।

तृणमूल ने लगाया भाजपा पर गंभीर आरोप

कालीघाट तृणमूल की ओर से आरोप लगाया गया कि हथियारों से लैस भाजपा से जुड़े लोग कैमक स्ट्रीट स्थित पार्टी कार्यालय में घुसे और फर्नीचर समेत कई सामानों को नुकसान पहुंचाया। पार्टी की ओर से यह भी दावा किया गया कि हमलावरों ने वहां मौजूद कार्यकर्ताओं के मोबाइल फोन छीन लिए।

तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि घटना के दौरान कार्यालय के भीतर अफरातफरी की स्थिति पैदा हो गई थी। पार्टी ने यह भी दावा किया कि कार्यालय से एयर प्यूरिफायर, प्रिंटर, टेलीविजन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान ले जाए गए। हालांकि, इन आरोपों की पूरी तस्वीर पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।

अभिषेक बनर्जी ने पुलिस पर उठाए सवाल

घटना को लेकर अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया के माध्यम से पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि पार्टी के कार्यकर्ताओं और वकीलों की ओर से फोन तथा ई-मेल के माध्यम से पुलिस को घटना की जानकारी दी गई, लेकिन करीब दो घंटे तक कोई प्रभावी प्रतिक्रिया नहीं मिली।

अभिषेक ने मांग की कि घटना में शामिल प्रत्येक व्यक्ति को तत्काल गिरफ्तार किया जाए और यह पता लगाया जाए कि हमले की योजना किसने बनाई, इसे किसने संगठित किया और किसके निर्देश पर इसे अंजाम दिया गया।

उन्होंने पुलिस की जवाबदेही तय करने की भी मांग की। अभिषेक का सवाल था कि यदि तड़के किसी राजनीतिक दल के कार्यालय में हथियारों के साथ लोग प्रवेश कर सकते हैं, कर्मचारियों पर हमला कर सकते हैं, मोबाइल फोन छीन सकते हैं और तोड़फोड़ कर सकते हैं, तो ऐसी स्थिति में राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।

छह लोगों की गिरफ्तारी की बात सामने आई

घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी जानकारी सामने आई है। अब तक इस मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, घटना के संबंध में पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान रिपोर्ट प्रकाशित होने तक सामने नहीं आया था।

जांच एजेंसियों के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती होगी कि कथित हमले में कौन-कौन लोग शामिल थे, घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या था और क्या यह हमला पहले से सुनियोजित था।

भाजपा विधायक ने आरोपों से किया इनकार

दूसरी ओर, बरानगर से भाजपा विधायक सजल घोष ने इस घटना में भाजपा की संलिप्तता से साफ इनकार किया है। उन्होंने कहा कि वह जिम्मेदारी के साथ कह सकते हैं कि घटना में भाजपा का कोई व्यक्ति शामिल नहीं है।

सजल घोष ने उलटे तृणमूल कांग्रेस से सवाल किया कि सुबह साढ़े चार बजे उसके कार्यकर्ता कार्यालय में क्या कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक प्रचार में बने रहने के लिए इस तरह की घटनाओं को खुद अंजाम दिए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने पूरी घटना को कथित साजिश करार देते हुए तृणमूल के दावों पर सवाल खड़े किए।

इस तरह एक ही घटना को लेकर दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के दावे बिल्कुल अलग हैं। अब पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वास्तव में कार्यालय में क्या हुआ था।

तृणमूल ने बताया ‘पूर्व नियोजित हमला’

बाद में तृणमूल कांग्रेस ने कैमक स्ट्रीट कार्यालय की घटना को कथित तौर पर पूर्व नियोजित हमला बताया। पार्टी ने दावा किया कि अभिषेक बनर्जी उस समय कोलकाता में मौजूद नहीं थे और बुधवार रात ही दिल्ली के लिए रवाना हो गए थे।

तृणमूल का आरोप है कि अभिषेक के शहर में नहीं होने की जानकारी के बाद ही कार्यालय को निशाना बनाया गया। पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि यदि हमलावरों को कार्यालय के भीतर मौजूद स्थानों और व्यवस्था की इतनी जानकारी थी, तो क्या उन्हें पहले से वहां की जानकारी थी।

तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक फेसबुक पेज से भी इस घटना को लेकर पोस्ट किया गया। पोस्ट में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी पर राजनीतिक निशाना साधते हुए हिंसा की राजनीति का आरोप लगाया गया। हालांकि, इन राजनीतिक आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही संभव होगी।

कुछ दिन पहले भी चर्चा में था यही कार्यालय

दिलचस्प बात यह है कि कैमक स्ट्रीट स्थित यह कार्यालय पिछले कुछ दिनों से लगातार राजनीतिक और प्रशासनिक विवादों के केंद्र में रहा है। पिछले गुरुवार को कोलकाता नगर निगम के अधिकारी पुलिस के साथ यहां एक बिलबोर्ड हटाने पहुंचे थे। अधिकारियों का कहना था कि तृणमूल कांग्रेस से जुड़ा यह बिलबोर्ड अवैध तरीके से लगाया गया था और उसकी स्थिति खतरनाक थी।

इस दौरान अभिषेक बनर्जी और उनके समर्थकों पर नगर निगम कर्मचारियों के काम में बाधा डालने का आरोप भी लगा था। इसके बाद मामला और राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो गया।

दमकल विभाग ने भी की थी इमारत की जांच

इसके बाद सोमवार को दमकल और पुलिस की टीम कैमक स्ट्रीट स्थित उस इमारत में पहुंची, जहां अभिषेक बनर्जी का कार्यालय है। अधिकारियों ने इमारत के निर्माण से संबंधित स्वीकृत योजना और मौके पर मौजूद निर्माण व्यवस्था की जांच की। इमारत के बाहर बने एक शेड को लेकर भी अधिकारियों ने आपत्ति जताई थी।

जांच के दौरान अधिकारी बेसमेंट में भी पहुंचे, जहां पार्किंग की व्यवस्था है। वहां आग बुझाने की प्रणाली, अग्नि सुरक्षा उपकरण और आपातकालीन व्यवस्था की जांच की गई। दमकल अधिकारियों के अनुसार, निरीक्षण के दौरान कुछ कमियां सामने आई थीं और संबंधित जानकारी नोटिस के माध्यम से दी जानी थी।

यह भी बताया गया कि जिस मंजिल पर अभिषेक बनर्जी का कार्यालय है, वहां अग्नि अलार्म को लेकर स्थिति की जांच की गई। अधिकारियों ने यह भी देखा कि आग लगने की स्थिति में नीचे से पानी की व्यवस्था कितनी ऊंचाई तक प्रभावी ढंग से पहुंच सकती है।

अब जांच पर टिकी नजर

कैमक स्ट्रीट की ताजा घटना ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर कानून-व्यवस्था और राजनीतिक हिंसा को लेकर बहस तेज कर दी है। एक तरफ तृणमूल कांग्रेस इसे सुनियोजित राजनीतिक हमला बता रही है, तो दूसरी ओर भाजपा घटना में अपनी भूमिका से इनकार करते हुए इसे तृणमूल की कथित राजनीतिक रणनीति बता रही है।

अब सबसे अहम सवाल यही है कि सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है। छह गिरफ्तारियों के बाद पुलिस के सामने घटना की पूरी कड़ी जोड़ने और हमले के पीछे की वास्तविक वजह सामने लाने की बड़ी जिम्मेदारी है। आने वाले दिनों में जांच की प्रगति और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया इस मामले को और भी बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना सकती है।

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