Friday, 4 September 2026
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बंगाल

सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर! सातवें वेतन आयोग ने खोला ऑनलाइन पोर्टल, 31 अक्टूबर तक भेजें अपनी मांग

Moutushi · 4 September 2026, 9:56 AM

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। राज्य में गठित सातवें वेतन आयोग ने अब कर्मचारियों, कर्मचारी संगठनों, विभिन्न संस्थाओं और विभागों से मांग, राय तथा सुझाव प्राप्त करने की ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार की ओर से इसके लिए आधिकारिक वेबसाइट पर विशेष ऑनलाइन मॉड्यूल उपलब्ध कराया गया है। इसके जरिए संबंधित पक्ष आयोग के सामने अपने प्रस्ताव और मांगें रख सकेंगे।

सातवें वेतन आयोग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, संगठन, संस्था और विभाग अपने मेमोरेंडम तथा सुझाव ऑनलाइन माध्यम से जमा कर सकते हैं। इसके अलावा राज्य सरकार के कर्मचारी और सेवानिवृत्त कर्मचारी भी व्यक्तिगत रूप से अपनी बात आयोग के सामने रख सकेंगे। इसके लिए अंतिम तारीख 31 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है। यानी इच्छुक कर्मचारियों और संगठनों को तय समय सीमा के भीतर अपनी मांग ऑनलाइन दर्ज करनी होगी।

वेतन से लेकर पदोन्नति तक मुद्दों पर रख सकेंगे पक्ष

सातवें वेतन आयोग के सामने कर्मचारी संगठनों और संबंधित संस्थाओं को सेवा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। इनमें वेतन संरचना, विभिन्न भत्ते, पदोन्नति, सेवानिवृत्ति संबंधी लाभ और कर्मचारियों की सेवा शर्तों से जुड़े अन्य विषय शामिल हो सकते हैं।

सरकारी कर्मचारियों के लिए यह प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि आयोग के सामने सीधे अपने सुझाव और समस्याएं रखने का अवसर मिल रहा है। कर्मचारी संगठन सामूहिक रूप से अपनी मांगों का मेमोरेंडम जमा कर सकते हैं, जबकि व्यक्तिगत कर्मचारी और सेवानिवृत्त कर्मचारी भी अपनी राय आयोग तक पहुंचा सकते हैं।

31 अक्टूबर तक ही खुला रहेगा ऑनलाइन मॉड्यूल

आयोग के सामने मेमोरेंडम और सुझाव जमा करने की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर 2026 रखी गई है। इस अवधि के दौरान संबंधित संगठन, कर्मचारी, सेवानिवृत्त कर्मचारी और विभाग ऑनलाइन माध्यम से अपनी बात दर्ज करा सकेंगे।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आयोग ने सुझाव जमा करने की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट व्यवस्था की है। आयोग केवल निर्धारित वेबसाइट के ऑनलाइन मॉड्यूल के माध्यम से प्राप्त मेमोरेंडम और सुझावों पर विचार करेगा। इसलिए कर्मचारियों और संगठनों के लिए यह जरूरी है कि वे अपनी मांग को समय रहते ऑनलाइन जमा करें।

हार्ड कॉपी और ई-मेल से भेजे गए सुझाव स्वीकार नहीं होंगे

सातवें वेतन आयोग की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण निर्देश भी जारी किया गया है। आयोग के अनुसार, केवल वेबसाइट के माध्यम से जमा किए गए मेमोरेंडम और सुझावों पर विचार किया जाएगा। कागज पर जमा किए गए मेमोरेंडम, हार्ड कॉपी, पीडीएफ फाइल या ई-मेल के जरिए भेजे गए किसी भी बयान को आयोग स्वीकार या विचार नहीं करेगा।

इस निर्देश के बाद कर्मचारियों और कर्मचारी संगठनों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। यदि कोई संगठन अपनी मांग या प्रस्ताव आयोग के सामने रखना चाहता है तो उसे निर्धारित ऑनलाइन मॉड्यूल का इस्तेमाल करना होगा। अंतिम तारीख के बाद आवेदन या सुझाव स्वीकार किए जाएंगे या नहीं, इसे लेकर कर्मचारियों को आयोग द्वारा जारी समय सीमा का ही पालन करना होगा।

सरकार ने 2 सितंबर को जारी किया नोटिफिकेशन

राज्य सरकार के वित्त विभाग की ओर से 2 सितंबर को जारी नोटिफिकेशन के बाद यह व्यवस्था सामने आई है। इसमें सातवें वेतन आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े विभिन्न कार्यों के लिए अलग वेबसाइट और ऑनलाइन व्यवस्था तैयार किए जाने की जानकारी दी गई है।

इस वेबसाइट का इस्तेमाल केवल मेमोरेंडम और सुझाव प्राप्त करने के लिए ही नहीं, बल्कि आवश्यक जानकारी जुटाने और आयोग से संबंधित अन्य प्रक्रियाओं के लिए भी किया जाएगा। इसके अलावा संबंधित पक्षों के लिए बैठक या नियुक्ति निर्धारित करने जैसे कार्यों में भी इस व्यवस्था की भूमिका हो सकती है।

22 जुलाई को हुआ था सातवें वेतन आयोग का गठन

पश्चिम बंगाल में सातवें वेतन आयोग का गठन 22 जुलाई 2026 को राज्य सरकार के वित्त विभाग के प्रस्ताव के माध्यम से किया गया था। आयोग के गठन के बाद अब कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों से सुझाव लेने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है।

आयोग के सामने अलग-अलग कर्मचारी संगठन अपनी मांगों को विस्तार से रख सकेंगे। इसके साथ ही व्यक्तिगत कर्मचारी भी सेवा से जुड़े अपने विचार और समस्याएं आयोग तक पहुंचा सकते हैं। इससे आयोग को राज्य के कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों और अपेक्षाओं को समझने में मदद मिलने की उम्मीद है।

कर्मचारी संगठनों की नजर अब आयोग की प्रक्रिया पर

वित्त विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, सातवें वेतन आयोग के समक्ष सरकारी कर्मचारियों के साथ-साथ कर्मचारी संगठनों की राय भी महत्वपूर्ण है। इसी वजह से 31 अक्टूबर तक व्यक्तिगत रूप से भी अपने प्रस्ताव और विचार रखने का अवसर दिया गया है।

वहीं, बंगीय शिक्षक एवं शिक्षाकर्मी समिति के नेता स्वपन मंडल ने कहा कि सातवें वेतन आयोग की अधिसूचना जारी करते समय ही वेबसाइट के माध्यम से मांग और विचार रखने की व्यवस्था की बात कही गई थी। उनके अनुसार, वेबसाइट शुरू होने में कुछ समय लगा, लेकिन अब कर्मचारी संगठन, संस्थाएं और विभाग अपनी मांग आयोग के सामने रख सकते हैं तथा निर्धारित प्रक्रिया के तहत अधिकारियों के साथ चर्चा का अवसर भी प्राप्त कर सकते हैं।

कर्मचारियों के लिए अब क्या है सबसे जरूरी?

फिलहाल सरकारी कर्मचारियों, सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके संगठनों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात अंतिम तारीख का ध्यान रखना है। 31 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन मॉड्यूल के जरिए अपनी मांग और सुझाव जमा करने होंगे। वेतन, भत्ते, पदोन्नति, सेवा शर्तों या सेवानिवृत्ति लाभ से संबंधित जिन मुद्दों को आयोग के सामने रखना है, उन्हें स्पष्ट और व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करना महत्वपूर्ण होगा।

सातवें वेतन आयोग की यह ऑनलाइन पहल आने वाले समय में राज्य के सरकारी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि कर्मचारियों और संगठनों की ओर से किस तरह की मांगें सामने आती हैं और आयोग इन सुझावों के आधार पर आगे क्या प्रक्रिया अपनाता है।

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