Friday, 4 September 2026
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आसनसोल-दुर्गापुर

बारिश थमी तो घटा डैम से पानी का बहाव! मैथन-पंचेत से अब भी 98 हजार क्यूसेक डिस्चार्ज, निचले इलाकों में हाई अलर्ट

Moutushi · 3 September 2026, 8:33 PM

मैथन: पश्चिम बंगाल और पड़ोसी झारखंड के जलग्रहण क्षेत्रों में पिछले दिनों हुई मूसलाधार बारिश का असर अब भी दामोदर घाटी क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। बारिश थमने के बावजूद दामोदर घाटी निगम यानी डीवीसी के मैथन और पंचेत डैम से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। हालांकि गुरुवार दोपहर तक स्थिति में कुछ सुधार आने के बाद दोनों जलाशयों से पानी छोड़ने की मात्रा में भारी कमी की गई है। इसके बावजूद बराकर और दामोदर नदी के आसपास के निचले और तटीय इलाकों में प्रशासन ने हाई अलर्ट बरकरार रखा है।

गुरुवार सुबह दोनों जलाशयों में पानी की आवक तेजी से बढ़ने के कारण डीवीसी को डिस्चार्ज की मात्रा बढ़ानी पड़ी थी। जलाशयों के बढ़ते जलस्तर को नियंत्रित करने और लगातार आ रहे पानी का दबाव कम करने के लिए अतिरिक्त पानी नदी में छोड़ा गया। हालांकि दोपहर तक जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश की रफ्तार कम होने और स्थिति कुछ हद तक नियंत्रण में आने के बाद पानी छोड़ने की मात्रा को नियंत्रित किया गया।

दोपहर दो बजे का ताजा आंकड़ा

गुरुवार दोपहर 2 बजे जारी ताजा आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार मैथन डैम से 48 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था, जबकि पंचेत डैम से 50 हजार क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज जारी था। यानी दोनों जलाशयों से मिलाकर लगभग 98 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था।

सुबह की तुलना में डिस्चार्ज में कमी जरूर आई है, लेकिन इतनी बड़ी मात्रा में पानी नदी में छोड़े जाने के कारण निचले इलाकों में खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। नदी के जलस्तर और बहाव में अचानक वृद्धि होने की स्थिति में निचले क्षेत्रों में परेशानी बढ़ सकती है।

मैथन और पंचेत में बढ़ा जलस्तर

गुरुवार सुबह मैथन डैम का जलस्तर 488.29 फीट दर्ज किया गया, जबकि पंचेत डैम का जलस्तर 416.08 फीट तक पहुंच गया। पिछले दिनों हुई भारी बारिश के कारण दोनों जलाशयों में लगातार पानी पहुंच रहा था। विशेष रूप से जलग्रहण क्षेत्रों में तेज बारिश होने पर जलाशयों में पानी की आवक अचानक बढ़ जाती है, जिससे सुरक्षा की दृष्टि से डिस्चार्ज बढ़ाना जरूरी हो जाता है।

सुबह पानी की आवक में तेजी आने के बाद डीवीसी प्रबंधन ने स्थिति पर तत्काल निगरानी बढ़ाई। जलाशयों में पानी का दबाव नियंत्रित रखने के लिए डिस्चार्ज बढ़ाया गया। दोपहर तक बारिश रुकने और पानी की आवक में अपेक्षाकृत कमी आने के बाद डिस्चार्ज को कुछ कम किया गया।

बराकर और दामोदर नदी पर बढ़ी नजर

मैथन और पंचेत डैम से लगातार पानी छोड़े जाने का सीधा असर बराकर और दामोदर नदी के जलस्तर पर पड़ता है। बड़ी मात्रा में पानी नदी में पहुंचने के कारण नदी के किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों में जलस्तर बढ़ने की आशंका बनी रहती है।

इसी वजह से प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। ग्रामीणों और तटवर्ती क्षेत्रों के निवासियों से कहा गया है कि वे किसी भी परिस्थिति में नदी के बेहद करीब न जाएं। खासकर बच्चे, बुजुर्ग और पशुओं को नदी के किनारे ले जाने से बचने की अपील की गई है।

निचले इलाकों में हाई अलर्ट

डैम से पानी छोड़े जाने के बाद प्रशासन ने निचले इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी है। जिन क्षेत्रों में पहले से जलभराव या बाढ़ की स्थिति बनने की आशंका रहती है, वहां प्रशासनिक स्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। स्थानीय स्तर पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने और नदी के जलस्तर में किसी भी अचानक बदलाव की स्थिति में प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।

प्रशासन की चिंता केवल वर्तमान जलस्तर को लेकर नहीं है, बल्कि आने वाले घंटों में जलग्रहण क्षेत्रों में दोबारा बारिश होने की संभावना को लेकर भी है। यदि ऊपरी इलाकों में फिर से तेज बारिश होती है तो डैम में पानी की आवक दोबारा बढ़ सकती है और डिस्चार्ज में भी बदलाव करना पड़ सकता है।

डीवीसी और प्रशासन की 24 घंटे निगरानी

मैथन और पंचेत जलाशयों की स्थिति पर डीवीसी प्रबंधन लगातार नजर बनाए हुए है। जलाशयों में पानी की आवक, जलस्तर और डिस्चार्ज की मात्रा की लगातार निगरानी की जा रही है। इसके साथ ही स्थानीय प्रशासन भी नदी के किनारे और निचले इलाकों की स्थिति पर नजर रख रहा है।

अधिकारियों की प्राथमिकता फिलहाल जलाशयों में पानी का दबाव नियंत्रित रखना और नदी के निचले हिस्सों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासनिक मशीनरी को सतर्क रखा गया है।

बारिश थमी, लेकिन खतरा पूरी तरह खत्म नहीं

पिछले दिनों की मूसलाधार बारिश के बाद अब बारिश थमने से निश्चित रूप से राहत मिली है और मैथन-पंचेत से पानी छोड़ने की मात्रा में भी कमी आई है। लेकिन दोनों डैम से अभी भी कुल 98 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। ऐसे में बराकर और दामोदर नदी के आसपास रहने वाले लोगों के लिए सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।

प्रशासन और डीवीसी की नजर अब जलाशयों के जलस्तर के साथ-साथ पानी की आवक पर भी टिकी हुई है। यदि आवक लगातार कम होती रही तो आने वाले समय में डिस्चार्ज को और नियंत्रित किया जा सकता है। वहीं, जलग्रहण क्षेत्रों में दोबारा भारी बारिश होने पर स्थिति फिर बदल सकती है। फिलहाल निचले इलाकों में हाई अलर्ट और लोगों को नदी से दूर रहने की सलाह जारी है।

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