कोलकाता: पश्चिम बंगाल में लंबे समय से चुनाव का इंतजार कर रही कई नगरपालिकाओं में अब राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। आगामी नगरपालिका चुनाव को ध्यान में रखते हुए राज्य चुनाव आयोग ने बुधवार को महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। बैठक की अध्यक्षता राज्य चुनाव आयुक्त कृष्णा गुप्ता ने की। इसमें छह जिलों के जिलाधिकारी शामिल हुए। बैठक में नगरपालिका चुनाव की तैयारियों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, हावड़ा, दक्षिण २४ परगना और पूर्व मेदिनीपुर के जिलाधिकारियों ने हिस्सा लिया। मतदाता सूची से लेकर नगरपालिका क्षेत्रों की सीमा, सीटों के आरक्षण, ईवीएम, मतदान केंद्र और चुनावी तैयारियों की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की गई। इस बैठक को आने वाले नगरपालिका चुनाव की तैयारियों को गति देने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मतदाता सूची को लेकर बड़ा फैसला
नगरपालिका चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई। राज्य में मतदाताओं के नाम हटने की आशंका के बीच यह तय किया गया कि नगरपालिका चुनाव के लिए मतदाता सूची १ जुलाई को प्रकाशित मतदाता सूची के आधार पर तैयार की जाएगी।
इस फैसले का सीधा असर नगरपालिका चुनाव की प्रक्रिया पर पड़ सकता है। चुनाव आयोग के सामने अब संबंधित नगरपालिका क्षेत्रों में मतदाताओं के नाम, मतदान केंद्र और अन्य चुनावी विवरण को व्यवस्थित करने की चुनौती होगी। अधिकारियों को मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रिया में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होगी, ताकि चुनाव के दौरान किसी तरह का विवाद उत्पन्न न हो।
मतदाता सूची चुनाव की पूरी प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण आधार होती है। इसलिए आयोग की बैठक में इस विषय पर विशेष ध्यान दिया जाना स्वाभाविक माना जा रहा है।
सितंबर में आरक्षण की तस्वीर हो सकती है साफ
नगरपालिका चुनाव में सीटों के आरक्षण को लेकर भी तैयारी आगे बढ़ रही है। आयोग के सूत्रों के अनुसार, सितंबर के मध्य तक सीट आरक्षण की मसौदा सूची जारी किए जाने की संभावना है। मसौदा सूची सामने आने के बाद विभिन्न पक्षों से आपत्तियां और सुझाव मांगे जा सकते हैं।
इन आपत्तियों की समीक्षा के बाद अक्टूबर के अंत तक अंतिम आरक्षण सूची प्रकाशित किए जाने की संभावना जताई गई है। आरक्षण सूची जारी होने के बाद राजनीतिक दलों के लिए भी संभावित उम्मीदवारों और चुनावी रणनीति को लेकर तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट हो सकती है।
आरक्षण का असर विभिन्न वार्डों में उम्मीदवारों के चयन पर पड़ता है। ऐसे में राजनीतिक दलों की नजर अब आयोग की अगली घोषणाओं पर टिकी रहेगी।
१५ नगरपालिकाओं में नहीं है निर्वाचित बोर्ड
वर्तमान में राज्य के १२ जिलों की १५ नगरपालिकाओं में निर्वाचित नगरपालिका बोर्ड नहीं है। इन निकायों का प्रशासन फिलहाल प्रशासक के माध्यम से चलाया जा रहा है। लंबे समय तक निर्वाचित बोर्ड का नहीं होना स्थानीय राजनीति के साथ-साथ नागरिक सेवाओं को लेकर भी चर्चा का विषय रहा है।
इन नगरपालिकाओं में हावड़ा नगरपालिका पर विशेष नजर है। यहां पिछले करीब १३ वर्षों से चुनाव नहीं हुआ है। लंबे अंतराल के बाद हावड़ा में चुनाव कराने की संभावना को लेकर राजनीतिक हलकों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
मंत्रिमंडल के गठन के बाद हावड़ा नगरपालिका चुनाव के मुद्दे पर मुख्यमंत्री के साथ नगरपालिका एवं शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पाल की बैठक भी हुई थी। इसके बाद इस दिशा में प्रशासनिक स्तर पर गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद जगी है।
किन-किन नगरपालिकाओं में चुनाव का इंतजार?
लंबे समय से चुनाव नहीं होने वाली नगरपालिकाओं में हावड़ा के अलावा कई महत्वपूर्ण निकाय शामिल हैं। इनमें दुर्गापुर, मुर्शिदाबाद की डोमकल, उत्तर दिनाजपुर की रायगंज, दक्षिण दिनाजपुर की बुनियादपुर, दक्षिण २४ परगना की पूजाली, दार्जिलिंग जिले की कर्सियांग और मिरिक शामिल हैं।
इसके अलावा कलिम्पोंग की कलिम्पोंग नगरपालिका, पूर्व मेदिनीपुर की पांशकुड़ा और हल्दिया, नदिया की कूपर्स कैंप, बीरभूम की नलहाटी, हावड़ा की बाली तथा जलपाईगुड़ी की धूपगुड़ी नगरपालिका भी उन निकायों में शामिल हैं जहां निर्वाचित बोर्ड को लेकर लंबे समय से इंतजार है।
इन नगरपालिकाओं में चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने पर स्थानीय राजनीतिक समीकरणों में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। विभिन्न दलों के लिए नगर निकाय चुनाव जमीनी संगठन और जनसमर्थन की परीक्षा का महत्वपूर्ण अवसर हो सकते हैं।
ईवीएम और मतदान केंद्रों की भी होगी तैयारी
राज्य चुनाव आयोग ने बैठक में केवल मतदाता सूची और आरक्षण पर ही चर्चा नहीं की, बल्कि मतदान केंद्रों और ईवीएम की व्यवस्था पर भी ध्यान दिया। चुनाव शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से कराने के लिए मतदान केंद्रों की उपलब्धता, आवश्यक सुविधाओं और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं की समीक्षा महत्वपूर्ण होगी।
नगरपालिका चुनाव में बड़ी संख्या में स्थानीय मतदाता मतदान करते हैं। इसलिए मतदान केंद्रों की सही पहचान, पर्याप्त ईवीएम की उपलब्धता और चुनाव कर्मियों की तैनाती जैसी तैयारियां पहले से पूरी करना आयोग के लिए अहम चुनौती होगी।
अब आगे क्या?
बुधवार की बैठक के बाद नगरपालिका चुनाव की तैयारियों को लेकर तस्वीर धीरे-धीरे स्पष्ट होने लगी है। हालांकि चुनाव की अंतिम तारीख को लेकर अभी कोई घोषणा नहीं हुई है, लेकिन मतदाता सूची, आरक्षण, मतदान केंद्र और ईवीएम जैसी तैयारियों पर समीक्षा शुरू होना इस प्रक्रिया के आगे बढ़ने का संकेत माना जा रहा है।
यदि सितंबर में आरक्षण की मसौदा सूची और अक्टूबर के अंत तक अंतिम सूची जारी होती है, तो इसके बाद चुनावी तैयारियों को और गति मिल सकती है। लंबे समय से प्रशासक व्यवस्था के तहत चल रही नगरपालिकाओं के लोगों की नजर अब इस बात पर है कि निर्वाचित बोर्ड कब वापस आएगा।
राज्य चुनाव आयोग की ताजा बैठक ने नगरपालिका चुनाव को लेकर राजनीतिक चर्चाओं को फिर तेज कर दिया है। आने वाले सप्ताहों में मतदाता सूची और आरक्षण संबंधी फैसले सामने आने के साथ यह साफ हो सकता है कि पश्चिम बंगाल की इन १५ नगरपालिकाओं में चुनाव की प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है।





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