आसनसोल: लगातार हो रही भारी बारिश ने आसनसोल नगर निगम के कई इलाकों में जलनिकासी व्यवस्था की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इसी क्रम में नगर निगम के १५ नंबर वार्ड के कल्ला क्षेत्र स्थित आदिवासी पाड़ा में जलजमाव को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिली। बारिश के बाद इलाके में आने-जाने वाले मुख्य रास्ते पर पानी जमा हो जाने से लोगों को रोजमर्रा की आवाजाही में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। समस्या से नाराज स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन कर जल्द जलनिकासी की व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग उठाई।
भारी बारिश के बाद रास्ते पर जमा हुआ पानी
स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले कुछ समय से लगातार हो रही बारिश के कारण इलाके में जलनिकासी की समस्या गंभीर हो गई है। आदिवासी पाड़ा से होकर गुजरने वाले रास्ते पर पानी जमा होने के कारण पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। सड़क पर पानी भरने से स्थानीय निवासियों को घर से बाहर निकलने, काम पर जाने, बाजार तक पहुंचने और अन्य जरूरी कार्यों के लिए आने-जाने में परेशानी हो रही है।
बारिश के दौरान स्थिति और खराब होने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि लगातार बारिश जारी रही और नाले से पानी की निकासी सामान्य नहीं हुई, तो जलजमाव और अधिक बढ़ सकता है। इससे निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों के सामने अतिरिक्त परेशानी खड़ी होने की संभावना है।
कारखाने की वजह से नाले का बहाव प्रभावित होने का आरोप
जलजमाव को लेकर स्थानीय लोगों ने इलाके के एक कारखाने पर भी सवाल उठाए हैं। लोगों का आरोप है कि कारखाने की वजह से क्षेत्र के नाले में पानी का सामान्य बहाव प्रभावित हुआ है। उनका कहना है कि नाले में पानी का प्रवाह बाधित होने के कारण बारिश का पानी समय पर बाहर नहीं निकल पा रहा है और ओवरफ्लो होकर सड़क पर जमा हो रहा है।
हालांकि, नाले का बहाव वास्तव में किस कारण प्रभावित हुआ और जलजमाव के पीछे कारखाने की भूमिका कितनी है, इसका स्पष्ट निर्धारण संबंधित विभाग की तकनीकी जांच के बाद ही हो सकता है। फिलहाल स्थानीय लोगों ने इस मामले की जांच कराने और जलनिकासी की वास्तविक समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है।
विरोध प्रदर्शन में सामने आया लोगों का गुस्सा
जलजमाव की समस्या को लेकर आदिवासी पाड़ा के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का नेतृत्व भाजपा नेत्री राखी हसदा ने किया। प्रदर्शन के दौरान स्थानीय लोगों ने जलनिकासी व्यवस्था को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
राखी हसदा ने आरोप लगाया कि कारखाने की वजह से इलाके की हाईट्रेन भर गई है, जिसके कारण पानी ओवरफ्लो होकर गांव के रास्ते पर जमा हो गया। उनका कहना है कि इस स्थिति का सबसे ज्यादा असर आदिवासी समुदाय के लोगों पर पड़ रहा है। रास्ते पर पानी जमा रहने के कारण लोगों को रोजाना काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने मांग की कि प्रशासन मौके का निरीक्षण करे और यह पता लगाए कि आखिर पानी की निकासी में बाधा कहां उत्पन्न हो रही है। साथ ही, यदि किसी निर्माण या अन्य कारण से नाले का प्राकृतिक बहाव प्रभावित हुआ है, तो उसे भी तत्काल ठीक कराया जाए।
आने-जाने में बढ़ी परेशानी
स्थानीय लोगों के लिए जलजमाव केवल बारिश के समय की असुविधा नहीं है, बल्कि इसका असर उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ रहा है। रास्ते पर पानी जमा होने के कारण पैदल चलने वालों के साथ-साथ दोपहिया वाहन चालकों को भी परेशानी हो रही है। पानी की गहराई बढ़ने पर दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।
विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं के लिए जलजमाव वाले रास्ते से गुजरना मुश्किल हो जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान यदि समय रहते पानी की निकासी नहीं की गई, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
हर साल जलजमाव से राहत की मांग
स्थानीय लोगों के बीच यह मांग भी उठ रही है कि केवल बारिश के बाद पानी निकालने की अस्थायी व्यवस्था पर्याप्त नहीं होगी। इलाके में जलनिकासी की पूरी व्यवस्था की समीक्षा करने की जरूरत है। नाले की नियमित सफाई, पानी के बहाव में आने वाली बाधाओं को दूर करना और जरूरत के अनुसार जलनिकासी की क्षमता बढ़ाना जरूरी बताया जा रहा है।
लोगों का कहना है कि यदि समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में भारी बारिश के दौरान फिर वही स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसलिए केवल तत्काल पानी निकालने के बजाय ऐसी व्यवस्था की जानी चाहिए जिससे बारिश का पानी तेजी से नाले के माध्यम से बाहर निकल सके।
प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी नजर
विरोध प्रदर्शन के बाद अब स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन और नगर निगम की कार्रवाई पर टिकी है। लोगों की मांग है कि संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का जायजा लें और जलजमाव के कारणों की जांच करें। साथ ही, नाले और आसपास के जलनिकासी मार्ग की स्थिति की भी जांच की जाए।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कल्ला के आदिवासी पाड़ा में जलजमाव केवल लगातार हुई भारी बारिश का परिणाम है या फिर जलनिकासी व्यवस्था में किसी तरह की बाधा ने समस्या को और गंभीर बनाया है। इस सवाल का जवाब स्थल निरीक्षण और तकनीकी जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।
फिलहाल स्थानीय लोगों की मांग स्पष्ट है—बारिश के दौरान अस्थायी राहत नहीं, बल्कि ऐसी स्थायी जलनिकासी व्यवस्था तैयार की जाए जिससे भविष्य में आदिवासी पाड़ा के लोगों को बार-बार जलजमाव और आवाजाही की परेशानी का सामना न करना पड़े।




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