Tuesday, 25 August 2026
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दलुरबांध रेलवे फाटक बंद करने पर पांडवेश्वर में जनसैलाब, सड़क पर उतरे हजारों लोग

Moutushi · 25 August 2026, 10:03 PM

पांडवेश्वर: पांडवेश्वर के दलुरबांध रेलवे लेवल क्रॉसिंग को स्थायी रूप से बंद करने के रेलवे के फैसले के खिलाफ मंगलवार को स्थानीय लोगों का गुस्सा खुलकर सड़क पर दिखाई दिया। रेलवे के निर्णय के विरोध में एक हजार से अधिक ग्रामीण और स्थानीय लोग सड़क पर उतर आए। लोगों ने सड़क जाम कर जोरदार प्रदर्शन किया और रेलवे प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। बड़ी संख्या में लोगों के एक साथ सड़क पर उतरने से इलाके में काफी देर तक यातायात प्रभावित रहा और स्थिति तनावपूर्ण बनी रही।

स्थानीय लोगों का कहना है कि दलुरबांध रेलवे फाटक वर्षों से आसपास के गांवों और पांडवेश्वर क्षेत्र के लोगों के लिए आवागमन का महत्वपूर्ण मार्ग रहा है। ऐसे में इसे अचानक स्थायी रूप से बंद किए जाने से आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर सीधा असर पड़ेगा। ग्रामीणों ने रेलवे से फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

25 अगस्त से फाटक बंद करने का रेलवे का फैसला

रेलवे की ओर से जारी सूचना के अनुसार, 25 अगस्त 2026 से दलुरबांध रेलवे फाटक को स्थायी रूप से बंद किया जाना है। रेलवे ने लोगों से आवागमन के लिए नवनिर्मित रोड ओवर ब्रिज का इस्तेमाल करने की अपील की है।

हालांकि, स्थानीय लोग रेलवे के इस विकल्प से संतुष्ट नहीं हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आरओबी का निर्माण विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन पुराने रेलवे फाटक को पूरी तरह बंद करने से स्थानीय आबादी के सामने व्यावहारिक समस्याएं खड़ी होंगी।

ग्रामीणों के मुताबिक, फाटक बंद होने के बाद उन्हें वैकल्पिक रास्ते के रूप में नवनिर्मित आरओबी से होकर जाना पड़ेगा। इससे कई लोगों को रोजाना लगभग तीन से चार किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ सकती है।

‘फाटक हमारे लिए सिर्फ रास्ता नहीं, जीवनरेखा है’

प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों ने कहा कि दलुरबांध रेलवे फाटक उनके लिए केवल रेलवे लाइन पार करने का रास्ता नहीं है, बल्कि आसपास के लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ा महत्वपूर्ण मार्ग है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, फाटक बंद होने के बाद स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों, मरीजों, दुकानदारों और रोजाना काम के लिए आने-जाने वाले लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी हो सकती है। अतिरिक्त दूरी तय करने से समय और यात्रा का खर्च भी बढ़ेगा।

ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि आपात स्थिति में यदि किसी मरीज को तत्काल अस्पताल ले जाना पड़े, तो अतिरिक्त दूरी परेशानी को और बढ़ा सकती है। इसी वजह से लोगों की मांग है कि फाटक को स्थायी रूप से बंद करने से पहले स्थानीय परिस्थितियों और जनता की सुविधा का गंभीरता से आकलन किया जाए।

सड़क जाम कर रेलवे के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन

मंगलवार को प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने सड़क पर उतरकर रेलवे प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। लोगों ने साफ कहा कि वे विकास कार्य या आरओबी के निर्माण के विरोध में नहीं हैं। उनका विरोध केवल पुराने रेलवे फाटक को स्थायी रूप से बंद करने के फैसले को लेकर है।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि नया आरओबी बनाया गया है, तो उसका उपयोग किया जा सकता है, लेकिन पुराने रास्ते को पूरी तरह बंद करने से पहले यह देखना जरूरी है कि इससे स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही पर कितना असर पड़ेगा।

लोगों का आरोप है कि रेलवे ने फाटक बंद करने से पहले स्थानीय निवासियों की समस्याओं और क्षेत्र की वास्तविक जरूरतों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया। ग्रामीणों ने मांग की कि रेलवे अधिकारी स्थानीय लोगों के साथ बैठक करें और उनकी आपत्तियों को सुनने के बाद ही अंतिम निर्णय लें।

प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचे विधायक जितेंद्र तिवारी

आंदोलन की जानकारी मिलने के बाद पांडवेश्वर के विधायक जितेंद्र कुमार तिवारी भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे लोगों से बातचीत की और उनकी समस्याओं को सुना। विधायक के पहुंचने के बाद आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिला।

प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए जितेंद्र कुमार तिवारी ने कहा कि “दुर्गापूजा तक किसी भी हाल में यह फाटक बंद नहीं होने दूंगा।” उन्होंने इसे लोगों की भावनाओं और सुविधा से जुड़ा मुद्दा बताया।

विधायक ने लोगों को आश्वासन दिया कि दुर्गापूजा के बाद रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों और स्थानीय लोगों के साथ बैठक कर इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की वास्तविक परिस्थितियों और आम लोगों की सुविधा को ध्यान में रखकर ही आगे का रास्ता निकाला जाना चाहिए।

आंदोलन और व्यापक करने की चेतावनी

प्रदर्शनकारियों ने रेलवे प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि दलुरबांध रेलवे फाटक को बंद करने का निर्णय वापस नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

ग्रामीणों ने कहा कि वे अपनी मांग को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं। प्रदर्शनकारियों ने यहां तक कहा कि यदि उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आवश्यकता पड़ने पर रेलवे ट्रैक जाम करने जैसे कठोर कदम उठाने पर भी विचार किया जा सकता है।

हालांकि, फिलहाल लोगों की मुख्य मांग रेलवे प्रशासन के साथ बातचीत कर समाधान निकालने की है। ग्रामीणों का कहना है कि वे किसी विकास परियोजना के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर ऐसी व्यवस्था स्वीकार नहीं की जा सकती जिससे स्थानीय लोगों को रोजाना अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़े।

दुर्गापूजा से पहले समाधान की उम्मीद

दलुरबांध रेलवे फाटक का मुद्दा ऐसे समय में सामने आया है, जब दुर्गापूजा नजदीक है और क्षेत्र में लोगों की आवाजाही बढ़ने की संभावना है। ऐसे में स्थानीय लोग चाहते हैं कि त्योहार से पहले रेलवे और प्रशासन उनकी समस्या का समाधान निकाले।

मंगलवार के प्रदर्शन के बाद अब सबकी नजर रेलवे प्रशासन के अगले कदम पर है। क्या रेलवे फाटक बंद करने के फैसले पर पुनर्विचार करेगा या स्थानीय लोगों के लिए कोई अतिरिक्त वैकल्पिक व्यवस्था तैयार की जाएगी, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

फिलहाल पांडवेश्वर के दलुरबांध में रेलवे फाटक को लेकर लोगों का आक्रोश खुलकर सामने आ चुका है। एक ओर रेलवे नवनिर्मित आरओबी को आवागमन का विकल्प बता रहा है, तो दूसरी ओर स्थानीय ग्रामीण पुराने फाटक को बंद करने के फैसले का विरोध कर रहे हैं। विधायक जितेंद्र कुमार तिवारी के आश्वासन के बाद अब लोगों को उम्मीद है कि रेलवे और स्थानीय प्रशासन के साथ बातचीत के जरिए कोई ऐसा रास्ता निकलेगा, जिससे विकास कार्य भी जारी रहे और क्षेत्र के लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही भी प्रभावित न हो।

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