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बंगाल

तृणमूल में टूट की अटकलों के बीच शत्रुघ्न सिन्हा ने दी सफाई, कहा- ममता बनर्जी और पार्टी के साथ हूं

Moutushi · 13 June 2026, 10:38 AM

कोलकाता/आसनसोल: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस के अंदरूनी हालात को लेकर सियासी हलचल तेज है। पार्टी के भीतर कथित असंतोष और टूट की खबरों के बीच आसनसोल से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने सामने आकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने साफ कहा है कि वह तृणमूल कांग्रेस और पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के साथ मजबूती से खड़े हैं।

‘बिहारी बाबू’ के नाम से मशहूर शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि पार्टी के कठिन समय में उनके खिलाफ अफवाहें फैलाना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग उन्हें जबरन विद्रोही खेमे से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि इसका कोई आधार नहीं है।

शत्रुघ्न सिन्हा को तृणमूल कांग्रेस ने 2022 के आसनसोल लोकसभा उपचुनाव में उम्मीदवार बनाया था। यह उपचुनाव बाबुल सुप्रियो के इस्तीफे के बाद हुआ था, जो भारतीय जनता पार्टी छोड़कर तृणमूल में शामिल हो गए थे। उस समय ममता बनर्जी ने शत्रुघ्न पर भरोसा जताया और उन्होंने भी इस भरोसे को कायम रखते हुए तीन लाख से अधिक वोटों के अंतर से ऐतिहासिक जीत दर्ज की।

इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने स्थानीय नेता अग्निमित्रा पाल को मैदान में उतारा था और शत्रुघ्न सिन्हा को ‘बाहरी उम्मीदवार’ बताकर मुद्दा बनाने की कोशिश की गई थी। लेकिन जनता ने इस प्रचार को खारिज करते हुए शत्रुघ्न को भारी समर्थन दिया।

इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में भी तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें फिर से उम्मीदवार बनाया। उन्होंने दूसरी बार भी जीत हासिल की, हालांकि इस बार जीत का अंतर कम होकर लगभग एक लाख वोटों के आसपास रहा।

2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के अपेक्षाकृत खराब प्रदर्शन के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की आवाजें उठने लगीं। कई विधायकों और नेताओं ने नेतृत्व पर सवाल खड़े किए। इसी बीच जब शत्रुघ्न सिन्हा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके 12 साल पूरे होने पर बधाई दी, तो राजनीतिक गलियारों में उनके रुख को लेकर अटकलें तेज हो गईं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने नरेंद्र मोदी को देश और समाज का मार्गदर्शक बताया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस पोस्ट के बाद उनके तृणमूल से दूरी बनाने की चर्चाएं शुरू हो गईं।

हालांकि, इन सभी खबरों को सिरे से खारिज करते हुए शत्रुघ्न सिन्हा ने स्पष्ट कहा कि उन्होंने किसी भी कथित विद्रोही पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि न तो किसी विद्रोही गुट ने उनसे संपर्क किया है और न ही वह किसी ऐसे प्रयास का हिस्सा हैं।

उन्होंने याद दिलाया कि 2019 में जब वह राजनीतिक रूप से कठिन दौर से गुजर रहे थे, तब ममता बनर्जी उनके साथ खड़ी थीं। उन्हीं के कहने पर उन्होंने आसनसोल से चुनाव लड़ा और आज वह दो बार वहां से सांसद चुने जा चुके हैं। ऐसे में ममता बनर्जी के मुश्किल समय में उनका साथ छोड़ना संभव ही नहीं है।

शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि वह तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न ‘जोड़ा फूल’ के साथ जीतकर संसद पहुंचे हैं, इसलिए पार्टी के प्रति उनकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह आगे भी पश्चिम बंगाल और खासतौर पर आसनसोल की जनता की सेवा करते रहेंगे।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शत्रुघ्न सिन्हा का यह बयान तृणमूल के भीतर चल रही उठापटक के बीच पार्टी को कुछ हद तक स्थिरता दे सकता है। हालांकि, बंगाल की राजनीति में आगे क्या मोड़ आएगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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