208 का लक्ष्य! फलता सीट जीतने के लिए बीजेपी की बड़ी रणनीति बैठक

कोलकाता:
पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय एक सीट ने पूरे सियासी समीकरण को बदल दिया है। भारतीय जनता पार्टी अब 208 विधायकों का आंकड़ा छूने के मिशन में जुट गई है और इसकी कुंजी बन गई है दक्षिण 24 परगना की फलता विधानसभा सीट

🎯 208 का लक्ष्य, फलता पर फोकस

👉 293 सीटों के नतीजों में बीजेपी ने 207 सीटों पर बड़ी जीत हासिल की
👉 अब पार्टी की नजर एक और सीट जोड़कर आंकड़ा 208 करने पर है

👉 इसके लिए फलता सीट को
“निर्णायक सीट” माना जा रहा है

⚡ मुख्यमंत्री की हाई लेवल बैठक

मंगलवार को शुभेंदु अधिकारी ने

👉 विधाननगर स्थित पार्टी कार्यालय में
👉 करीब 2 घंटे तक मैराथन बैठक की

इस बैठक में—

👉 चुनावी रणनीति
👉 बूथ मैनेजमेंट
👉 दोबारा मतदान की तैयारी

पर विस्तार से चर्चा हुई।

👥 कौन-कौन रहा मौजूद?

बैठक में कई बड़े नेता शामिल हुए—

👉 ज्योतिर्मय महतो
👉 सौमित्र खां
👉 शशि अग्निहोत्री
👉 अमिताभ चक्रवर्ती
👉 उमेश राय
👉 अम्लान भादुड़ी

📅 फिर होगा मतदान

👉 फलता के 285 मतदान केंद्रों पर
👉 21 मई को दोबारा वोटिंग होगी

👉 24 मई को मतगणना के बाद
👉 तय होगा कि बीजेपी 208 तक पहुंचती है या नहीं

⚠️ क्यों रद्द हुआ था चुनाव?

फलता सीट पर चुनाव के दौरान—

👉 कई बूथों पर ईवीएम में गड़बड़ी के आरोप लगे
👉 170 और 189 नंबर बूथ पर टेप लगाने की शिकायत आई

👉 विपक्ष ने 32 बूथों पर पुनर्मतदान की मांग की

इसके बाद—

👉 ज्ञानेश कुमार के निर्देश पर जांच हुई
👉 विशेष पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता ने रिपोर्ट सौंपी

👉 और अंततः चुनाव आयोग ने
पूरे क्षेत्र में पुनर्मतदान का फैसला लिया

🗓️ सीएम का सुपर बिजी दिन

मंगलवार को शुभेंदु अधिकारी का दिन बेहद व्यस्त रहा—

👉 उन्होंने हिमंत विश्व शर्मा के शपथ ग्रहण समारोह में गुवाहाटी में हिस्सा लिया
👉 फिर कोलकाता लौटकर तपस राय के शपथ कार्यक्रम में पहुंचे

👉 इसके बाद भी कई सरकारी काम निपटाकर
👉 शाम को पार्टी बैठक में शामिल हुए

🔍 राजनीतिक मायने

विश्लेषकों के मुताबिक—

👉 यह सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं
👉 बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है

👉 अगर बीजेपी जीतती है—
👉 तो यह उसकी मजबूत पकड़ का संकेत होगा

👉 वहीं हार की स्थिति में
👉 विपक्ष को बड़ा मुद्दा मिल सकता है

📢 निष्कर्ष

फलता विधानसभा सीट अब—

👉 पश्चिम बंगाल की राजनीति का केंद्र बन चुकी है
👉 और 208 का आंकड़ा बीजेपी के लिए
सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि सियासी संदेश भी है

अब सभी की नजर 21 मई की वोटिंग और 24 मई के नतीजों पर टिकी है।

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