कोलकाता:
पश्चिम बंगाल में सरकारी कर्मचारियों के बकाया महंगाई भत्ता (डीए) को लेकर लंबे समय से चल रही अनिश्चितता के बीच मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगले सोमवार होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक में डीए सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
📅 अगली कैबिनेट में होगा बड़ा फैसला?
पहली मंत्रिमंडल बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि उस बैठक में समय की कमी के कारण डीए पर चर्चा नहीं हो पाई।
उन्होंने कहा—
👉 “सरकार का यह पहला कार्यदिवस था, इसलिए पहले से तैयार प्रस्तावों पर ही निर्णय लिया गया। अगली बैठक में डीए, एरियर और वेतन आयोग जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी।”
💰 चुनावी वादा और कर्मचारियों की उम्मीद
चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने वादा किया था कि सरकार बनने के 45 दिनों के भीतर केंद्रीय दर के अनुसार डीए और सातवां वेतन आयोग लागू किया जाएगा।
अब कर्मचारियों की नजर इस बात पर टिकी है कि यह वादा कब तक पूरा होगा।
⚖️ लंबे समय से जारी है विवाद
राज्य में डीए को लेकर विवाद नया नहीं है।
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल में भी इस मुद्दे पर कई बार आंदोलन हुए थे।
- 2018 में 15% डीए की घोषणा के बावजूद विवाद जारी रहा
- शिक्षकों और कर्मचारियों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया
- कोलकाता हाई कोर्ट ने भी कुछ टिप्पणियों को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताया था
📢 आंदोलन और राजनीतिक समर्थन
दिलचस्प बात यह है कि उस समय विपक्ष में रहते हुए शुभेंदु अधिकारी ने आंदोलन कर रहे कर्मचारियों का समर्थन किया था।
उन्होंने यहां तक कहा था कि कर्मचारियों को अपने अधिकारों के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए।
🏛️ पहली कैबिनेट में क्या हुआ?
सोमवार को हुई पहली कैबिनेट बैठक में सरकार ने कई बड़े फैसले लिए—
- सरकारी नौकरियों में आवेदन की उम्र सीमा 5 साल बढ़ाई
- बीएसएफ को सीमा सुरक्षा के लिए जमीन देने का फैसला
- आयुष्मान भारत योजना से राज्य को जोड़ना
इन फैसलों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठने लगा कि डीए पर फैसला कब होगा।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित
डीए से जुड़ा मामला अभी भी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
हालांकि कई स्तरों पर सुनवाई हो चुकी है, लेकिन अंतिम निर्णय का इंतजार अभी भी जारी है।
👀 अब सबकी नजर अगली बैठक पर
सरकारी कर्मचारियों, शिक्षकों और पेंशनभोगियों के लिए डीए सिर्फ आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकार का सवाल बन चुका है।
👉 ऐसे में अगली कैबिनेट बैठक बेहद अहम मानी जा रही है, जहां यह तय होगा कि कर्मचारियों को उनका बकाया कब और कैसे मिलेगा।
🚨 बड़ा सवाल
क्या सरकार 45 दिनों का वादा निभाएगी?
क्या कर्मचारियों को मिलेगा उनका पूरा हक?
👉 इन सभी सवालों के जवाब अब अगली मंत्रिमंडल बैठक में मिलने की उम्मीद है।















