👉रिटायर्ड जस्टिस ज्योतिर्मय भट्टाचार्य होंगे राज्य मानवाधिकार आयोग के चेयरमैन
👉सीएम ममता की मौजूदगी में हुई बैठक में लिया गया फैसला, शामिल नहीं हुए शुभेंदु
कोलकाता : रिटायर्ड जस्टिस रवींद्रनाथ सामंत को बंगाल का नया लोकायुक्त चुना गया है। आज, सोमवार को राज्य सचिवालय नवान्न में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मौजूदगी में लोकायुक्त कमेटी की मीटिंग हुई। उस मीटिंग में नए लोकायुक्त के तौर पर रिटायर्ड जस्टिस रवींद्रनाथ सामंत के नाम पर मुहर लगी। दूसरी ओर, रिटायर्ड जस्टिस ज्योतिर्मय भट्टाचार्य राज्य मानवाधिकार आयोग के चेयरमैन का पद संभालेंगे। इस अहम मीटिंग में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी को भी बुलाया गया था। लेकिन उन्होंने पहले ही साफ कर दिया था कि वे इस मीटिंग में मौजूद नहीं रहेंगे। इस वजह से, यह अहम मीटिंग विपक्ष के नेता के बिना ही हुई।
उल्लेखनीय है कि जस्टिस रवींद्रनाथ सामंत 1987 में ज्यूडिशियरी में शामिल हुए थे। लंबे समय तक उन्होंने ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट, मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट, सिविल जज (सीनियर डिवीजन), डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज और कोलकाता के सिटी सिविल कोर्ट के चीफ जज समेत कई पदों पर काम किया। जस्टिस रवींद्रनाथ सामंत हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार के तौर पर भी काम कर चुके हैं। इतना ही नहीं, जस्टिस रवींद्रनाथ सामंत को 2021 में कलकत्ता हाई कोर्ट का जज भी अपॉइंट किया गया था। वे 24 जून, 2023 को रिटायर हुए।
बता दें कि हर साल लोकायुक्त कमेटी की मीटिंग राज्य की मेन एडमिनिस्ट्रेटिव बिल्डिंग, नवान्न में एक तय समय पर होती है। उस मीटिंग में विपक्ष के नेता का मौजूद रहना आम बात है। और उसी रिवाज के मुताबिक, हर साल राज्य सरकार विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के साथ-साथ कमेटी के दूसरे मेंबर्स को भी इनविटेशन लेटर भेजती है। इस बार भी कुछ अलग नहीं हुआ। विपक्ष के नेता को मुख्यमंत्री की लीडरशिप में हुई लोकायुक्त कमेटी की मीटिंग में इनवाइट किया गया था। इस बारे में विपक्ष के नेता ने कहा, “भ्रष्ट लोगों के साथ मीटिंग में बैठने का सवाल ही नहीं उठता। और तो और, खगेन मुर्मू (BJP MP) को खून से लथपथ देखने के बाद किसी भी मीटिंग में जाना मुमकिन नहीं है। जिनके हाथ BJP नेताओं और कार्यकर्ताओं के खून से सने हों, उनके साथ मुस्कुराते हुए फोटो खिंचवाना मुमकिन नहीं है।”
हालांकि, पिछले चार सालों में शुभेंदु अधिकारी ऐसी किसी भी मीटिंग में शामिल नहीं हुए हैं। यहां तक कि विपक्ष के नेता भी सूचना आयुक्त की नियुक्ति या लोकायुक्त के गठन पर विधानसभा में हुई मीटिंग में शामिल नहीं हुए थे।











