कोलकाता: करीब तीन दशक पुराने 21 जुलाई 1993 गोलीकांड की जांच रिपोर्ट आखिरकार विधानसभा में पेश कर दी गई, जिसके बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रिपोर्ट पेश करते हुए बिना नाम लिए पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला।
⚡ ‘शहीदों के खून का हुआ इस्तेमाल’
👉 मुख्यमंत्री ने कहा—
📢 “21 जुलाई की भावनाओं और शहीदों के खून का इस्तेमाल कुछ लोगों ने अपने राजनीतिक और निजी फायदे के लिए किया, लेकिन शहीद परिवारों की अनदेखी की गई।”
👉 इस बयान के बाद विधानसभा में माहौल गर्म हो गया
📄 10 साल बाद सार्वजनिक हुई रिपोर्ट
👉 जानकारी के अनुसार—
- वर्ष 2011 में ममता बनर्जी सरकार ने
- पूर्व न्यायाधीश सुशांत बंद्योपाध्याय की अध्यक्षता में आयोग गठित किया
👉 आयोग ने
- दिसंबर 2014 में रिपोर्ट सौंपी
- लेकिन इसे सार्वजनिक नहीं किया गया
👉 अब नई सरकार ने
रिपोर्ट को विधानसभा में पेश किया
👥 44 लोगों को किया गया तलब
👉 रिपोर्ट में कुल 44 व्यक्तियों को तलब करने का उल्लेख
👉 इनमें शामिल—
- पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य
- विमान बसु
- सोमेन मित्रा
- प्रदीप भट्टाचार्य
- मदन मित्रा
- सौगत राय
👉 साथ ही—
- मनीष गुप्ता
- एन. कृष्णमूर्ति
- तुषारकांति तालुकदार जैसे अधिकारी
👉 खास बात—
आंदोलन का नेतृत्व करने वाली ममता बनर्जी को तलब नहीं किया गया
❗ जांच पर उठे गंभीर सवाल
👉 मुख्यमंत्री ने दावा किया—
- घटना की सही तरीके से जांच नहीं हुई
- आवश्यक एक्जीक्यूटिव जांच निष्पक्ष नहीं थी
👉 रिपोर्ट में कहा गया—
- कई महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब किए गए
- उच्च अधिकारियों को बचाने की कोशिश हुई
🔫 गोली चलाने के आदेश पर रहस्य
👉 आयोग के अनुसार—
- तत्कालीन पुलिस आयुक्त तुषारकांति तालुकदार
- यह बताने में असमर्थ रहे कि
गोली चलाने का आदेश किसने दिया था
👉 यह मुद्दा आज भी बड़ा सवाल बना हुआ है
📍 बिना उकसावे के चली गोली?
👉 रिपोर्ट में उल्लेख—
- मेयो रोड
- रेड रोड
- डोरिना क्रॉसिंग
- एस्प्लेनेड
👉 इन क्षेत्रों में मौजूद लोगों पर
बिना किसी उकसावे के गोली चलाई गई
👉 इसे
पूरी तरह अनुचित और अनावश्यक बताया गया
🗣️ पंकज बंद्योपाध्याय का बयान भी चर्चा में
👉 मुख्यमंत्री ने पूर्व नेता प्रतिपक्ष पंकज बंद्योपाध्याय का बयान पढ़ा
👉 उन्होंने कहा था—
- गोलीकांड के लिए मनीष गुप्ता जिम्मेदार थे
- फिर भी उन्हें बाद में मंत्री बनाया गया
👉 उन्होंने सवाल उठाया—
आयोग ने उनकी भूमिका को जिम्मेदार क्यों नहीं माना?
🌟 राजनीति में नई बहस
👉 इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद—
- राज्य की राजनीति में नया विवाद शुरू हो गया है
- सत्ता और विपक्ष आमने-सामने आ सकते हैं
👉 21 जुलाई 1993 की घटना आज भी पश्चिम बंगाल की राजनीति का एक संवेदनशील अध्याय है, और इस रिपोर्ट ने एक बार फिर उस पुराने जख्म को ताजा कर दिया है।

