कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में महिलाओं की रिकॉर्ड भागीदारी ने राजनीतिक दलों की नींद उड़ा दी है। तृणमूल कांग्रेस के अंदर अब सबसे बड़ा सवाल यही गूंज रहा है—क्या यह भारी महिला वोट ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना के समर्थन में पड़ा है, या फिर ‘रात कब्ज़ा’ जैसे विरोध आंदोलनों का असर दिख रहा है?
📊 महिलाओं की ऐतिहासिक भागीदारी
👉 तृणमूल के आंतरिक आकलन के अनुसार:
- महिलाओं का मतदान प्रतिशत करीब 93%
- पुरुषों का मतदान प्रतिशत लगभग 91%
👉 यानी महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से करीब 2% ज्यादा रही
👉 यह आंकड़ा साफ संकेत देता है कि
👉 इस चुनाव में महिला वोटर निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।
⚡ ‘लक्ष्मी भंडार’ बनाम ‘रात कब्ज़ा’
👉 तृणमूल के भीतर दो तरह की सोच सामने आ रही है:
पहला पक्ष:
👉 महिलाओं का भारी मतदान
👉 मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की
👉 ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना के समर्थन का संकेत है
दूसरा पक्ष:
👉 आरजी कर अस्पताल कांड के बाद
👉 ‘रात कब्ज़ा’ जैसे आंदोलनों से
👉 सरकार विरोधी भावना भी उभरी थी
👉 ऐसे में सवाल उठ रहा है—
👉 क्या महिलाओं ने बदलाव के लिए वोट किया?
🚨 RG कर कांड का असर?
👉 2024 लोकसभा चुनाव के बाद
👉 आरजी कर अस्पताल में महिला डॉक्टर के साथ
👉 दुष्कर्म और हत्या की घटना ने
👉 पूरे राज्य को झकझोर दिया था
👉 इसके बाद
👉 महिलाओं का गुस्सा सड़कों पर दिखा
👉 हालांकि:
👉 यह आंदोलन लंबे समय तक नहीं चला
👉 और धीरे-धीरे शांत हो गया
👉 अब सवाल यह है कि
👉 क्या उसका असर वोटिंग में दिखा?
🗳️ ‘डबल एम’ समीकरण पर नजर
👉 बंगाल की राजनीति में
👉 ‘डबल एम’ यानी
👉 महिला + मुस्लिम वोट बैंक
👉 हमेशा से
👉 ममता बनर्जी की ताकत माना जाता रहा है
👉 जैसे बिहार में
👉 लालू प्रसाद यादव के समय
👉 ‘एमएमवाई’ समीकरण चर्चा में था
👉 उसी तरह बंगाल में
👉 महिला वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
🔎 जिलों में क्या है रुझान?
👉 तृणमूल के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार:
- मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर दिनाजपुर
👉 जैसे अल्पसंख्यक बहुल जिलों में
👉 महिलाओं का झुकाव तृणमूल की ओर दिख रहा है
👉 लेकिन:
👉 कुछ इलाकों में
👉 भाजपा की
👉 हिंदू वोट ध्रुवीकरण रणनीति
👉 महिला वोट पर असर डाल सकती है।
⚖️ तृणमूल नेताओं की राय
👉 राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य का कहना है:
👉 “महिलाओं ने सिर्फ योजनाओं के लिए नहीं,
👉 बल्कि अपने अधिकारों और विरोध के लिए भी वोट दिया है।”
👉 उन्होंने यह भी कहा:
👉 “महिला वोटिंग को सिर्फ ‘लक्ष्मी भंडार’ से जोड़कर नहीं देखा जा सकता।”
🔥 क्या ‘दीदी’ अब भी हैं महिलाओं की पहली पसंद?
👉 तृणमूल नेताओं का दावा:
👉 15 साल की सत्ता के बावजूद
👉 ममता बनर्जी आज भी महिलाओं के बीच ‘मसीहा’ जैसी छवि रखती हैं
👉 उनका मानना है:
👉 यह भारी महिला वोट
👉 भाजपा के ‘कमल’ के बजाय
👉 ‘कालीघाट की दीदी’ के पक्ष में गया है
👉 हालांकि,
👉 विपक्ष इसे लेकर अलग ही कहानी बता रहा है।
⚡ राजनीतिक तापमान चरम पर
👉 महिला वोटिंग के इस ट्रेंड ने
👉 चुनाव को और रोमांचक बना दिया है
👉 अब सभी की नजर
👉 अगले चरणों और अंतिम नतीजों पर है
👉 क्योंकि
👉 इस बार चुनाव का असली खेल
👉 महिला वोटर ही तय कर सकती हैं।














