Thursday, 17 September 2026
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बंगाल

हस्ताक्षर घोटाले में बड़ा धमाका! शिकायत करने वाले ही निकाले गए पार्टी से

Moutushi · 2 June 2026, 10:45 AM

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बवाल खड़ा हो गया है। विधानसभा के कथित हस्ताक्षर घोटाले ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर ही भूचाल ला दिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के बड़े खुलासे के बाद पार्टी ने अपने ही दो विधायकों—ऋतब्रत बंद्योपाध्याय और संदीपन साहा—को तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया।

पूरा मामला तब सामने आया जब विधानसभा में विपक्ष के नेता के समर्थन में जमा किए गए हस्ताक्षरों पर सवाल उठे। आरोप है कि करीब 70 विधायकों के हस्ताक्षर वाले दस्तावेज में लगभग 20 हस्ताक्षर संदिग्ध पाए गए। इसके बाद फर्जी हस्ताक्षर के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई और जांच राज्य सीआईडी को सौंप दी गई।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि इस पूरे मामले की शिकायत तृणमूल के ही दो विधायकों—ऋतब्रत बंद्योपाध्याय और संदीपन साहा—ने की थी। उनके इस बयान के तुरंत बाद तृणमूल ने दोनों विधायकों पर ‘दल-विरोधी गतिविधियों’ का आरोप लगाते हुए उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया।

दोनों विधायकों का कहना है कि उन्होंने सिर्फ सच का साथ दिया है। ऋतब्रत बंद्योपाध्याय ने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर भ्रष्टाचार और गलत फैसलों के खिलाफ आवाज उठाने की सजा उन्हें मिली है। वहीं संदीपन साहा ने दावा किया कि 6 मई की बैठक में विपक्ष के नेता को लेकर कोई प्रस्ताव पारित ही नहीं हुआ था, बल्कि उपस्थिति रजिस्टर के हस्ताक्षरों को बाद में प्रस्ताव का रूप दे दिया गया।

इस बीच सीआईडी ने मामले की जांच तेज कर दी है और कई विधायकों से पूछताछ की जा चुकी है। कुछ विधायकों ने तो यहां तक कहा कि उनके हस्ताक्षर दस्तावेज में मौजूद ही नहीं हैं या उनसे मेल नहीं खाते।

राजनीतिक हलकों में इस घटना को तृणमूल बनाम तृणमूल की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने दोनों विधायकों को ‘विश्वासघाती’ करार देते हुए कहा कि अगर उन्हें इतनी ही शिकायत थी तो चुनाव नहीं लड़ना चाहिए था।

वहीं मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने तृणमूल पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “हार के बाद भी उनकी चोरी की आदत नहीं गई है।” उन्होंने चेतावनी दी कि अगर फॉरेंसिक जांच में हस्ताक्षर जालसाजी साबित होती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इन विधायकों को टिकट देना उनकी गलती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग पार्टी को तोड़ने की साजिश कर रहे हैं।

फिलहाल, यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में सीआईडी की जांच और राजनीतिक बयानबाजी इस विवाद को और भी गर्मा सकती है।

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