“कुछ ही दिनों में खत्म हो जाएगी टीएमसी” – सुखेंदु शेखर रॉय का बड़ा दावा

पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों बड़ा भूचाल देखने को मिल रहा है। विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। इसी बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है।

⚠️ “कुछ ही दिनों में खत्म हो सकती है पार्टी”

एक साक्षात्कार में सुखेंदु शेखर रॉय ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस अपनी विश्वसनीयता खो चुकी है और आने वाले समय में पार्टी समाप्त भी हो सकती है।

👉 उन्होंने पार्टी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए
👉 नेतृत्व और संगठन दोनों को जिम्मेदार ठहराया
👉 कहा—जनता का भरोसा तेजी से कम हुआ है

🏛️ चुनावी हार के बाद बढ़ा असंतोष

ममता बनर्जी की चुनावी हार के बाद पार्टी के भीतर विरोध की आवाजें तेज हो गई हैं।

👉 कई नेता खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं
👉 संगठन में पारदर्शिता की कमी का आरोप
👉 शीर्ष नेतृत्व की भूमिका पर सवाल

🏥 आरजी कर अस्पताल मामला बना बड़ा मुद्दा

रॉय ने आर जी कर अस्पताल में डॉक्टर के साथ हुई घटना को लेकर भी सरकार की कड़ी आलोचना की।

👉 मामले को सही तरीके से न संभालने का आरोप
👉 पुलिस पर आरोपियों को बचाने का दावा
👉 राज्यभर में महिलाओं के विरोध प्रदर्शन का जिक्र

📊 आई-पैक पर उठे सवाल

चुनावी रणनीतिकार संस्था आई-पैक को लेकर भी पार्टी के भीतर नाराजगी बढ़ती जा रही है।

👉 नेताओं का आरोप—आई-पैक को जरूरत से ज्यादा महत्व मिला
👉 संगठन कमजोर होने की बात कही गई
👉 ममता बनर्जी तक पहुंच मुश्किल होने का दावा

🗣️ अन्य नेताओं ने भी उठाए सवाल

👉 काकोली घोष ने अपने इस्तीफे में कई गंभीर आरोप लगाए
👉 सार्वजनिक वितरण प्रणाली, शिक्षक भर्ती और वित्तीय गड़बड़ी का जिक्र
👉 पार्थ चटर्जी ने भी चुनावी हार के लिए नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया

🚨 पार्टी नेतृत्व की सख्ती

पार्टी नेतृत्व ने बागी तेवर अपनाने वाले नेताओं पर कार्रवाई शुरू कर दी है।

👉 पांच सदस्यीय समिति का गठन
👉 नेताओं के बयानों पर नजर
👉 रिजु दत्ता को 6 साल के लिए निलंबित किया गया

📌 निष्कर्ष

तृणमूल कांग्रेस इस समय अपने सबसे बड़े आंतरिक संकट से गुजर रही है।

👉 क्या पार्टी इस संकट से उबर पाएगी?
👉 क्या नेतृत्व में बदलाव देखने को मिलेगा?

फिलहाल, एक के बाद एक नेताओं के बयान से साफ है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में आने वाले दिनों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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