आसनसोल: पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धमान जिले के सलानपुर ब्लॉक में कथित अवैध बालू कारोबार को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। बराबनी विधानसभा क्षेत्र के नामोकेशिया, अपर केशिया, जीतपुर और कालीसांको सहित कुछ इलाकों से रात के अंधेरे में बालू उठाने और उसे कथित तौर पर फर्जी या दूसरे क्षेत्रों के चालानों के सहारे विभिन्न फैक्ट्रियों तक पहुंचाने के आरोप सामने आए हैं। इस मामले में बिहार और पुरुलिया के चालानों के कथित इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और किसी व्यक्ति की संलिप्तता को जांच के बिना प्रमाणित नहीं माना जा सकता।
इस मुद्दे को लेकर एआईएमआईएम के पश्चिम बर्धमान जिलाध्यक्ष दानिश अजीज ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बालू कारोबार में कथित अनियमितताएं लंबे समय से जारी हैं और अब भी इस पर पूरी तरह रोक नहीं लग पाई है। उन्होंने दीप नाम के एक युवक की कथित भूमिका का उल्लेख करते हुए कुछ भाजपा नेताओं के संरक्षण में कारोबार चलने का आरोप लगाया। दूसरी ओर, भाजपा विधायक और पार्टी के राज्य स्तरीय नेता कृष्णेंदु मुखर्जी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि भाजपा को बदनाम करने के लिए बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं।
नामोकेशिया से कालीसांको तक कथित बालू उठाव का दावा
आरोपों के मुताबिक, सलानपुर ब्लॉक के कुछ क्षेत्रों से रात के समय बालू उठाकर वाहनों के माध्यम से पश्चिम बर्धमान जिले की विभिन्न औद्योगिक इकाइयों और फैक्ट्रियों तक पहुंचाया जा रहा है। इस कथित गतिविधि में परिवहन संबंधी दस्तावेजों के इस्तेमाल को लेकर संदेह जताया गया है। दावा है कि बिहार और पुरुलिया से संबंधित चालानों के आधार पर बालू की ढुलाई दिखाई जाती है, जबकि वास्तविक उठाव किसी अन्य स्थान से होने की आशंका जताई जा रही है।
यदि ऐसा हुआ है, तो यह केवल अवैध खनन का मामला नहीं होगा, बल्कि परिवहन दस्तावेजों के सत्यापन और बालू के स्रोत की जांच से भी जुड़ा गंभीर प्रश्न होगा। हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि किन वाहनों के चालानों में कथित गड़बड़ी हुई, कितनी मात्रा में बालू की ढुलाई की गई और संबंधित फैक्ट्रियों तक पहुंचने वाले बालू के स्रोत की आधिकारिक जांच हुई है या नहीं।
जब्त बालू की नीलामी के बाद फिर उठे सवाल
सलानपुर ब्लॉक में बालू के भंडारों को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई पहले भी चर्चा में रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 के दौरान जिला और पुलिस प्रशासन ने विभिन्न स्थानों पर बालू के भंडार जब्त किए थे। इसके बाद जिला स्तरीय बालू समिति की 7 जुलाई 2026 की बैठक की कार्यवाही में जब्त और लावारिस बालू के भंडारों की ई-नीलामी कराने का निर्णय दर्ज होने की बात सामने आई है। इस प्रक्रिया में कई कंपनियों के भाग लेने और कुछ कंपनियों को बालू उठाने का काम मिलने की जानकारी भी दी गई है।
अब इसी पृष्ठभूमि में कथित अवैध बालू उठाव को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि निर्धारित नीलामी प्रक्रिया के तहत बालू उठाने के अलावा कुछ स्थानों से कथित तौर पर अतिरिक्त बालू भी निकाला जा रहा है। हालांकि, नीलामी में आवंटित बालू की वास्तविक मात्रा और कथित अवैध उठाव के बीच कोई संबंध है या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
इस मामले में नीलामी के दस्तावेजों, आवंटित मात्रा, उठाव की अनुमति और परिवहन रिकॉर्ड का मिलान महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दानिश अजीज ने राजनीतिक संरक्षण पर उठाए सवाल
एआईएमआईएम के पश्चिम बर्धमान जिलाध्यक्ष दानिश अजीज ने दावा किया कि दीप नाम का युवक तृणमूल कांग्रेस की पिछली सरकार के कार्यकाल में भी सलानपुर ब्लॉक के नदी घाटों से कथित रूप से बालू उठाने और उसकी ढुलाई से जुड़ा हुआ था। उनका आरोप है कि सत्ता परिवर्तन के बाद भी यह गतिविधि कथित तौर पर बंद नहीं हुई है।
दानिश अजीज ने कुछ भाजपा नेताओं के कथित समर्थन का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि यदि अवैध बालू कारोबार जारी है, तो संबंधित क्षेत्रों में निगरानी और कार्रवाई कितनी प्रभावी है। उनके बयान के बाद यह मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।
हालांकि, किसी राजनीतिक दल के नेता या किसी व्यक्ति को कथित कारोबार से जोड़ने वाले आरोपों की पुष्टि स्वतंत्र जांच के बिना नहीं की जा सकती। दीप नाम के युवक और जिन नेताओं पर कथित संरक्षण देने का आरोप लगाया गया है, उनका विस्तृत पक्ष भी सामने आना बाकी है। इसलिए इन दावों को फिलहाल आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
कृष्णेंदु मुखर्जी ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
भाजपा विधायक एवं पार्टी के राज्य स्तरीय नेता कृष्णेंदु मुखर्जी ने भाजपा नेताओं के संरक्षण में कथित अवैध बालू कारोबार चलने के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी पर लगाए गए आरोप गलत और बेबुनियाद हैं तथा इसका उद्देश्य भाजपा की छवि खराब करना है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति नदी से अवैध रूप से बालू उठाने या उसकी तस्करी में शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उनके मुताबिक, अवैध गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए।
इस तरह, एक ओर एआईएमआईएम जिलाध्यक्ष ने कथित अवैध कारोबार और राजनीतिक संरक्षण का मुद्दा उठाया है, तो दूसरी ओर भाजपा विधायक ने आरोपों को अस्वीकार करते हुए कानून के अनुसार कार्रवाई की बात कही है।
अब प्रशासनिक जांच से सामने आएगी वास्तविक स्थिति
सलानपुर में उठे इस विवाद के बीच प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। मामले की वास्तविकता जानने के लिए बालू उठाव की अनुमति, नीलामी से जुड़े दस्तावेज, परिवहन चालान, वाहनों की आवाजाही और संबंधित स्थानों पर उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर संबंधित विभाग मौके पर निरीक्षण कर यह भी पता लगा सकते हैं कि परिवहन किए जा रहे बालू का स्रोत दस्तावेजों में दर्ज जानकारी से मेल खाता है या नहीं।
स्थानीय स्तर पर यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि बालू के अवैध उठाव से सरकारी राजस्व, नदी और पर्यावरण तथा नियमानुसार कारोबार करने वालों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, सलानपुर में इन प्रभावों या कथित कारोबार से जुड़े वित्तीय नुकसान की वास्तविक मात्रा के बारे में अभी कोई पुष्ट आंकड़ा सामने नहीं आया है।
फिलहाल, सलानपुर ब्लॉक में कथित अवैध बालू उठाव और चालानों में गड़बड़ी का मामला आरोप-प्रत्यारोप के बीच है। एक तरफ जांच की मांग और राजनीतिक संरक्षण के आरोप हैं, तो दूसरी तरफ भाजपा की ओर से उनका खंडन किया गया है। अब निगाहें संबंधित प्रशासन पर टिकी हैं। दस्तावेजों की जांच और आधिकारिक कार्रवाई से ही स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या वास्तव में नियमों का उल्लंघन हुआ है।




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