पुरी: भगवान जगन्नाथ रथयात्रा के दौरान ओडिशा के पुरी में गुरुवार को एक दर्दनाक घटना ने श्रद्धालुओं की आस्था के इस महापर्व को झकझोर कर रख दिया। भारी भीड़, तेज बारिश और अफरा-तफरी के बीच दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 100 से अधिक लोग बीमार और घायल हो गए। हालात को देखते हुए प्रशासन ने रथयात्रा को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया।
🚨 कैसे बिगड़े हालात?
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ग्रैंड रोड (बड़ा दंड) पर उस समय भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जब भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा को रथ पर विराजमान किया जा रहा था। इसी दौरान अचानक तेज बारिश शुरू हो गई और भीड़ में धक्का-मुक्की बढ़ गई, जिससे हालात बेकाबू हो गए।
बताया जा रहा है कि रथ खींचने के दौरान एक रस्सी की बैरिकेडिंग गिर गई, जिससे कई श्रद्धालुओं का संतुलन बिगड़ गया और करीब 50 लोग गिर पड़े। इस दौरान कई लोग घायल हो गए।
⚰️ मौत की वजह क्या?
ओडिशा के स्वास्थ्य मंत्री मुकेश महालिंग ने साफ कहा कि भगदड़ (पदपिष्ट) की कोई घटना नहीं हुई।
- एक 60 वर्षीय श्रद्धालु की मौत दम घुटने से हुई
- दूसरे श्रद्धालु की मौत हृदयाघात से होने की आशंका जताई गई
हालांकि, मौके पर मौजूद लोगों का दावा है कि स्थिति भगदड़ जैसी थी।
🚑 100 से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती
घटना के बाद करीब 100 श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ गई, जिन्हें तुरंत अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
- इनमें से 5 की हालत गंभीर बताई जा रही है
- कई लोगों को मामूली चोटें आईं
ओडिशा अग्निशमन विभाग के महानिदेशक उमाशंकर दास ने बताया कि बारिश और भीड़ के कारण लोगों की तबीयत बिगड़ी।
👮♂️ प्रशासन का दावा
प्रशासन का कहना है कि स्थिति को संभालने के लिए तुरंत मेडिकल कॉरिडोर बनाया गया और घायल श्रद्धालुओं को एंबुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया।
श्री जगन्नाथ मंदिर के मुख्य प्रशासक अरविंद पाधी ने बताया कि शुक्रवार सुबह 9:30 बजे से रथयात्रा दोबारा शुरू की जाएगी।
📊 लाखों श्रद्धालु पहुंचे
ओडिशा सरकार के मुताबिक इस वर्ष रथयात्रा में करीब 9 लाख श्रद्धालु शामिल हुए। सरकार ने दावा किया कि पूरा आयोजन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित रहा और किसी भी तरह की प्रशासनिक विफलता नहीं हुई।
⚠️ फिर उठे सुरक्षा पर सवाल
हालांकि, इस घटना के बाद एक बार फिर भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
- पिछले साल पुरी में भी रथयात्रा के दौरान 3 लोगों की मौत हुई थी
- वहीं प्रयागराज महाकुंभ में भी भगदड़ में कई लोगों की जान गई थी
👉 बार-बार हो रही ऐसी घटनाएं यह सवाल खड़ा करती हैं कि क्या बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ नियंत्रण के लिए किए गए दावे जमीनी हकीकत से मेल खाते हैं?
🙏 आस्था के बीच चिंता
भक्ति और आस्था के इस महापर्व में हुई इस घटना ने जहां श्रद्धालुओं को दुखी किया है, वहीं प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चेतावनी भी है।
👉 अब सबकी नजर इस बात पर है कि भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

