2 साल 8 महीने में कमाल! पांडवेश्वर के सृजन कुंडू ने बनाया राष्ट्रीय रिकॉर्ड

पांडवेश्वर (पश्चिम बर्धमान): जिस उम्र में बच्चे ठीक से बोलना भी शुरू नहीं करते, उस उम्र में पांडवेश्वर के हरिपुर गांव के नन्हे सृजन कुंडू ने अपनी अद्भुत प्रतिभा से इतिहास रच दिया है। महज 2 साल 8 महीने की उम्र में सृजन ने इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स–2026 में अपना नाम दर्ज कर पूरे पश्चिम बर्धमान और राज्य को गौरवान्वित कर दिया है।

🌟 नन्ही उम्र में असाधारण प्रतिभा

सृजन की स्मरण शक्ति इतनी तेज है कि—
👉 वह बंगाली और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में सप्ताह के सातों दिन और साल के बारह महीनों के नाम धाराप्रवाह सुना सकता है
👉 37 देशों के राष्ट्रीय ध्वजों की पहचान कर सकता है
👉 14 स्वतंत्रता सेनानियों, 18 देवताओं के वाहनों और 8 राष्ट्रीय प्रतीकों के नाम याद हैं
👉 शरीर के 20 अंग, 15 जानवर, 15 सब्जियां, 6 कीट और 6 सरीसृपों के नाम भी उसे कंठस्थ हैं
👉 इतना ही नहीं, 12 मंत्र और संपूर्ण हनुमान चालीसा भी वह बिना रुके सुना देता है

👨‍👩‍👦 माता-पिता का योगदान

सृजन की इस उपलब्धि के पीछे उसके माता-पिता का बड़ा योगदान है।
👉 पिता सुखेन कुंडू, जो पेशे से सिविक वॉलंटियर हैं
👉 माता रिम्पा कुंडू, जो गृहिणी हैं

दोनों ने बचपन से ही खेल-खेल में सृजन को अलग-अलग विषय सिखाना शुरू किया।
👉 सृजन की खासियत यह है कि वह एक बार सुनकर ही चीजें याद कर लेता है

माता रिम्पा कुंडू बताती हैं—
👉 “उसे जो भी सिखाया जाता, वह तुरंत याद कर लेता था। खासकर हनुमान चालीसा, जिसे वह बिना रुके पूरा सुना देता है।”

📹 ऐसे मिला राष्ट्रीय सम्मान

👉 बेटे की प्रतिभा देखकर पिता सुखेन कुंडू ने ऑनलाइन माध्यम से इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से संपर्क किया
👉 सृजन के कई वीडियो भेजे गए
👉 निर्णायक मंडल उसकी अद्भुत स्मरण शक्ति और प्रस्तुति से बेहद प्रभावित हुआ

सभी चरणों के मूल्यांकन के बाद—
👉 सृजन कुंडू का नाम आधिकारिक रूप से इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स–2026 में दर्ज कर लिया गया

🎉 पूरे गांव में खुशी का माहौल

👉 इस उपलब्धि के बाद हरिपुर गांव में खुशी की लहर है
👉 परिवार, रिश्तेदार और स्थानीय लोग सृजन पर गर्व महसूस कर रहे हैं

🚀 भविष्य को लेकर उम्मीदें

👉 माता-पिता की इच्छा है कि सृजन भविष्य में और भी ऊंचाइयों को छुए
👉 साथ ही एक अच्छा और संवेदनशील इंसान भी बने

✨ निष्कर्ष

सृजन कुंडू की यह सफलता साबित करती है कि—
👉 सही मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और मेहनत से छोटी उम्र में भी बड़ी उपलब्धि हासिल की जा सकती है

👉 पांडवेश्वर का यह नन्हा सितारा आज न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे पश्चिम बर्धमान और राज्य के लिए गर्व का कारण बन गया है।

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