आसनसोल: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले आसनसोल उत्तर विधानसभा क्षेत्र में सियासी माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। इसी बीच असदुद्दीन ओवैसी की प्रस्तावित जनसभा अचानक रद्द हो जाने से राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है।
यह सभा ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के उम्मीदवार दानिश अज़ीज़ के समर्थन में आयोजित की गई थी, जो आसनसोल उत्तर सीट से चुनावी मैदान में हैं।
🚁 हेलीकॉप्टर लैंडिंग पर विवाद
दानिश अज़ीज़ ने दावा किया कि असदुद्दीन ओवैसी हेलीकॉप्टर के जरिए आसनसोल पहुंचने वाले थे, लेकिन प्रशासन ने उन्हें लैंडिंग की अनुमति नहीं दी।
उनके अनुसार, इसी वजह से गिरजा मोड़ बस स्टैंड पर होने वाली यह बड़ी जनसभा रद्द करनी पड़ी।
👉 AIMIM नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं, बल्कि “राजनीतिक दबाव” का परिणाम है।
⚠️ पोस्टर फाड़ने का आरोप
मामला यहीं नहीं रुका। दानिश अज़ीज़ ने आरोप लगाया कि—
- उनके चुनावी पोस्टर शहर के कई इलाकों में फाड़ दिए गए
- कार्यकर्ताओं को प्रचार में बाधा दी जा रही है
उन्होंने सीधा आरोप लगाते हुए कहा—
“सत्ता पक्ष घबराया हुआ है, क्योंकि आसनसोल उत्तर में बदलाव की लहर साफ दिख रही है।”
🔥 “कल होगी जबरदस्त सभा” — AIMIM का दावा
सभा रद्द होने के बावजूद AIMIM ने हार नहीं मानी है।
पार्टी ने ऐलान किया है कि—
📍 बुधवार को रेल पार स्थित अस्थमा ग्राउंड में नई सभा आयोजित की जाएगी
दानिश अज़ीज़ ने दावा किया—
“यह सभा ऐतिहासिक होगी और इसमें भारी संख्या में लोग शामिल होंगे।”
🗳️ आसनसोल उत्तर में बढ़ता सियासी तापमान
विश्लेषकों का मानना है कि—
- ओवैसी की सभा रद्द होना चुनावी माहौल को और गरमा सकता है
- AIMIM इसे “सहानुभूति फैक्टर” में बदलने की कोशिश कर सकती है
- वहीं विरोधी दल इस मुद्दे को प्रशासनिक प्रक्रिया बता सकते हैं
📢 क्या बदल रहा है चुनावी समीकरण?
आसनसोल उत्तर सीट इस बार बेहद अहम मानी जा रही है, जहां विभिन्न दलों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है।
👉 ऐसे में ओवैसी की सभा रद्द होने का मुद्दा अब सिर्फ एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह चुनावी रणनीति और सियासी आरोप-प्रत्यारोप का बड़ा मुद्दा बन गया है।
🔍 नजरें अब कल की सभा पर
अब सभी की नजरें बुधवार को होने वाली सभा पर टिकी हैं—
क्या AIMIM वाकई “जबरदस्त” शक्ति प्रदर्शन कर पाएगी?
या फिर यह विवाद चुनावी समीकरण को और उलझा देगा?
👉 फिलहाल, आसनसोल की राजनीति में यह मुद्दा पूरी तरह से छाया हुआ है।















