कोलकाता: पश्चिम बंगाल में 6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा उपचुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। मतदान में अब करीब 15 दिन बाकी हैं और दोनों सीटों पर नामांकन, उम्मीदवारों की गिरफ्तारी, समर्थन और चुनाव प्रचार को लेकर लगातार घटनाक्रम सामने आ रहे हैं। नंदीग्राम में बीजेपी उम्मीदवार हासीरानी रथ ने जीत के अंतर को करीब डेढ़ लाख वोट तक पहुंचाने का लक्ष्य सामने रखा है। वहीं रेजिनगर में आम जनता विकास पार्टी के संस्थापक हुमायूं कबीर ने अपने बेटे और उम्मीदवार गोलाम नबी आजाद के लिए चुनाव प्रचार से दूरी बनाने का ऐलान किया है। दोनों सीटों पर मतगणना 9 अक्टूबर को होगी।
नंदीग्राम में बीजेपी ने हासीरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है। वह दिवंगत चंद्रनाथ रथ की मां हैं, जो शुभेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी थे। बीजेपी उम्मीदवार ने रविवार को बोयाल-1 क्षेत्र के विभिन्न बूथों पर घर-घर जाकर जनसंपर्क किया। प्रचार की शुरुआत मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद की गई। इस दौरान उन्होंने अपने समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात की।
हासीरानी रथ ने अपने चुनावी लक्ष्य को लेकर कहा कि वह जीत के अंतर को बढ़ाने के उद्देश्य से प्रचार कर रही हैं। उन्होंने करीब डेढ़ लाख वोटों से जीत हासिल करने की इच्छा जताई। उनके बयान के अनुसार, नंदीग्राम को वह शुभेंदु अधिकारी का क्षेत्र मानती हैं और खुद को उनके प्रतिनिधि के तौर पर जनता के बीच काम करने वाली उम्मीदवार के रूप में पेश कर रही हैं।
नंदीग्राम की चुनावी तस्वीर हाल के दिनों में तेजी से बदली है। तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार संचिता प्रधान दे द्वारा नामांकन वापस लेने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की। इसके बाद मिलन प्रधान की गिरफ्तारी ने चुनावी माहौल को और गर्म कर दिया। उन्हें 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े पुराने मामलों में गिरफ्तार किया गया था और अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा है। कांग्रेस ने गिरफ्तारी पर सवाल उठाए हैं, जबकि पुलिस से जुड़े अधिकारियों के अनुसार लंबित वारंट के आधार पर कार्रवाई की गई।
मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के बाद भी कांग्रेस ने चुनाव मैदान से पीछे हटने से इनकार किया है। दूसरी ओर नंदीग्राम में बीजेपी, कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार, तृणमूल के प्रतिद्वंद्वी गुट और वाम दलों के उम्मीदवार चुनावी मुकाबले में हैं। वाम मोर्चे की ओर से भी लगातार प्रचार किए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में नंदीग्राम में चुनावी मुकाबला बहुकोणीय बना हुआ है।
इसी बीच नंदीग्राम पंचायत-1 समिति के पूर्व उपाध्यक्ष अबू ताहेर ने भी पार्टी संगठन को लेकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी का संचालन कोलकाता से होने के कारण जमीन पर कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क कमजोर हुआ है। उन्होंने नंदीग्राम के कार्यकर्ताओं से जुड़े मामलों को लेकर नेतृत्व पर सवाल उठाए, हालांकि साथ ही ममता बनर्जी के साथ रहने की बात भी कही। उनके बयानों से साफ है कि चुनाव के बीच संगठनात्मक मुद्दे भी चर्चा का विषय बने हुए हैं।
अब नजर रेजिनगर पर है, जहां राजनीतिक घटनाक्रम ने अलग तस्वीर पेश की है। यहां आम जनता विकास पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर ने घोषणा की कि वह अपने बेटे गोलाम नबी आजाद के लिए चुनाव प्रचार में नहीं निकलेंगे। उन्होंने पुलिस कार्रवाई को इसकी वजह बताया। हुमायूं के अनुसार, प्रचार के बाद उनके साथियों की गिरफ्तारी हो रही है और वह अपने कार्यकर्ताओं को जोखिम में नहीं डालना चाहते।
हुमायूं ने दावा किया कि शनिवार से रविवार के बीच उनके संगठन से जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने पुलिस पर राजनीतिक दबाव में काम करने का आरोप लगाया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। रेजिनगर में उपचुनाव के दौरान एक स्वतंत्र उम्मीदवार सैफुल इस्लाम मंडल की गिरफ्तारी की भी पुलिस ने पुष्टि की है। पुलिस के अनुसार उसके खिलाफ 2021 के चुनावी हिंसा से जुड़े मामले में कार्रवाई की गई।
हुमायूं ने अब सोशल मीडिया के जरिए प्रचार जारी रखने की बात कही है और चुनावी फैसला रेजिनगर की जनता पर छोड़ने की बात कही। 2026 के विधानसभा चुनाव में हुमायूं ने रेजिनगर और नौदा दोनों सीटों से जीत हासिल की थी। बाद में उन्होंने नौदा सीट अपने पास रखी और रेजिनगर छोड़ दिया, जिसके कारण यहां उपचुनाव कराया जा रहा है। इस बार उन्होंने अपने बेटे गोलाम नबी आजाद को उम्मीदवार बनाया है।
दूसरी ओर रेजिनगर में तृणमूल उम्मीदवार रबिउल आलम भी प्रचार में सक्रिय हैं। उनके चुनाव चिह्न को लेकर भी राजनीतिक चर्चा हुई। रबिउल ने हुमायूं के उस आरोप को खारिज किया कि पुलिस के कहने पर उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला किया। उन्होंने अपने बयान में कहा कि वह अपनी इच्छा से चुनाव लड़ रहे हैं और पुलिस के दबाव में उम्मीदवार बनने की बात को स्वीकार नहीं किया।
इस तरह 6 अक्टूबर का उपचुनाव नजदीक आते-आते नंदीग्राम और रेजिनगर दोनों में अलग-अलग राजनीतिक मुद्दों से घिरता जा रहा है। नंदीग्राम में बीजेपी उम्मीदवार का डेढ़ लाख वोटों का लक्ष्य, कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ्तारी और समर्थन बदलने का घटनाक्रम चर्चा में है, तो रेजिनगर में हुमायूं कबीर का प्रचार से हटना, उनके आरोप और उम्मीदवारों से जुड़े कानूनी घटनाक्रम सुर्खियों में हैं। अब आने वाले दिनों में दोनों सीटों पर प्रचार किस दिशा में जाता है और मतदाताओं के बीच विभिन्न दलों व उम्मीदवारों को लेकर क्या प्रतिक्रिया बनती है, इस पर सबकी नजर रहेगी। मतदान 6 अक्टूबर और मतगणना 9 अक्टूबर को होगी।




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