Tuesday, 18 August 2026
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एक करोड़ के इनामी विवेक को मार गिराने वाले जवानों को शौर्य चक्र, लुगुबुरु ऑपरेशन की पूरी कहानी

Moutushi · 18 August 2026, 2:32 PM

स्वतंत्रता दिवस पर वीर जवानों के नाम बड़ा सम्मान

स्वतंत्रता दिवस 2026 के अवसर पर देश ने उन सुरक्षाबलों की बहादुरी को सलाम किया है, जिन्होंने नक्सल प्रभावित इलाकों में बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच अदम्य साहस का परिचय दिया। राष्ट्रपति की ओर से घोषित वीरता पुरस्कारों की सूची में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों को भी महत्वपूर्ण सम्मान मिला है। झारखंड के बोकारो जिले के लुगुबुरु जंगल में 21 अप्रैल 2025 को हुए बड़े नक्सल-विरोधी अभियान में असाधारण बहादुरी दिखाने वाले 209 कोबरा बटालियन के डिप्टी कमांडेंट अंजनी कुमार और कॉन्स्टेबल (जीडी) दीपक साह को देश के दूसरे सबसे बड़े शांतिकालीन वीरता सम्मान शौर्य चक्र से सम्मानित किया जाएगा।

यह वही अभियान था जिसमें सुरक्षा बलों ने एक करोड़ रुपये के इनामी भाकपा (माओवादी) केंद्रीय समिति सदस्य प्रयाग मांझी उर्फ विवेक समेत आठ नक्सलियों को मार गिराया था। अभियान के दौरान जवानों ने भारी गोलीबारी के बीच जिस साहस और सूझबूझ का परिचय दिया, उसे अब राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जा रहा है।

लुगुबुरु के जंगल में शुरू हुई थी भीषण मुठभेड़

21 अप्रैल 2025 को बोकारो जिले के लालपनिया थाना क्षेत्र के लुगु पहाड़ी इलाके में 209 कोबरा और झारखंड पुलिस की संयुक्त टीम तलाशी अभियान पर निकली थी। सुरक्षा बल इलाके में नक्सली गतिविधियों की जानकारी के बाद अभियान चला रहे थे। इसी दौरान जंगल में मौजूद नक्सलियों ने सुरक्षा बलों पर फायरिंग शुरू कर दी।

अचानक हुई गोलीबारी के बाद जवानों ने मोर्चा संभाला और जवाबी कार्रवाई शुरू की। करीब दो घंटे तक चली मुठभेड़ के बाद सुरक्षा बलों ने आठ नक्सलियों को मार गिराया। इस दौरान अभियान का नेतृत्व कर रहे अंजनी कुमार ने अग्रिम मोर्चे से अपनी टीम का मार्गदर्शन किया, जबकि दीपक साह ने भी अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

ऑपरेशन के दौरान किसी भी सुरक्षाकर्मी के घायल होने की खबर नहीं आई। मुठभेड़ के बाद इलाके में तलाशी अभियान चलाया गया और बड़ी संख्या में हथियार बरामद किए गए।

एक करोड़ का इनामी था प्रयाग मांझी उर्फ विवेक

इस अभियान की सबसे बड़ी सफलता भाकपा (माओवादी) की केंद्रीय समिति के सदस्य प्रयाग मांझी उर्फ विवेक का मारा जाना था। उस पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। वह विवेक दा, फुचना, नागो मांझी और करन दा जैसे कई नामों से भी जाना जाता था।

प्रयाग मांझी मूल रूप से धनबाद के दलबुधा गांव का रहने वाला बताया जाता था। वह झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में 100 से अधिक हिंसक घटनाओं में वांछित था। अकेले गिरिडीह जिले में उसके खिलाफ 50 से अधिक मामले दर्ज होने की बात सामने आई थी।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, वह पिछले कुछ समय से गिरिडीह के पारसनाथ पहाड़ियों और आसपास के इलाकों में सक्रिय था। उसे नक्सली संगठन के प्रभावशाली कमांडरों में गिना जाता था।

आठ नक्सलियों के मारे जाने से संगठन को बड़ा झटका

मुठभेड़ में विवेक के अलावा विशेष क्षेत्र समिति सदस्य अरविंद यादव उर्फ अविनाश भी मारा गया, जिस पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था। वहीं जोनल कमेटी सदस्य साहेबराम मांझी उर्फ राहुल मांझी पर 10 लाख रुपये का इनाम था।

इसके अलावा महेश मांझी उर्फ मोटा, टालू, रंजू मांझी, गंगाराम और महेश भी अभियान में मारे गए। सुरक्षा बलों ने मौके से एक एके श्रृंखला की राइफल, तीन इंसास राइफलें, एक एसएलआर, आठ देसी कट्टे और एक पिस्तौल बरामद की थी।

केंद्रीय समिति सदस्य का मारा जाना क्यों बड़ी सफलता?

भाकपा (माओवादी) की केंद्रीय समिति संगठन की सबसे महत्वपूर्ण और निर्णायक इकाइयों में मानी जाती है। इसलिए केंद्रीय समिति के किसी सदस्य का मारा जाना सुरक्षा बलों के लिए बड़ी सफलता और माओवादी संगठन के लिए बड़ा झटका माना जाता है।

झारखंड पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, विवेक को पारसनाथ इलाके का बेहद प्रभावशाली नक्सली कमांडर माना जाता था। उसे नवंबर 2021 में गिरफ्तार किए गए भाकपा (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य प्रशांत बोस उर्फ किशन दा का उत्तराधिकारी भी माना जाता था।

झारखंड के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लंबे समय से सुरक्षा बलों की ओर से अभियान चलाए जा रहे हैं। ऐसे अभियानों का उद्देश्य नक्सली नेटवर्क को कमजोर करने के साथ-साथ दूरदराज के इलाकों में सुरक्षा और प्रशासन की पहुंच मजबूत करना भी है।

24 अन्य जवानों को भी मिलेगा वीरता पदक

शौर्य चक्र के अलावा राष्ट्रपति की ओर से 24 अन्य जवानों को मेडल फॉर गैलेंट्री से सम्मानित करने की घोषणा की गई है। इनमें 20 सीआरपीएफ, 18 सीआरपीएफ और वैली क्विक एक्शन टीम से जुड़े जवान शामिल हैं।

20 सीआरपीएफ से जुड़े सम्मानित जवानों में सब-इंस्पेक्टर द्रोणाचार्य नाथ, हेड कॉन्स्टेबल गंडराब सिंह, हेड कॉन्स्टेबल गायकवाड़ विठ्ठल सहेबराव, हेड कॉन्स्टेबल कैलाश चंद कुमावत, हेड कॉन्स्टेबल प्रह्लाद बसाक, हेड कॉन्स्टेबल तिलक राज, हेड कॉन्स्टेबल यादवेंद्र कुमार, हेड कॉन्स्टेबल सोमबीर, हेड कॉन्स्टेबल मोहम्मद मानाज, कॉन्स्टेबल सुन बासुमतारी और कॉन्स्टेबल संजीव कुमार शामिल हैं।

18 सीआरपीएफ से जुड़े सम्मानित जवानों में सेकेंड-इन-कमांड चौधरी महेश कुमार, असिस्टेंट कमांडेंट राजविंदर सिंह, इंस्पेक्टर दान सिंह, हेड कॉन्स्टेबल अप्पू बिस्वास, हेड कॉन्स्टेबल बिजेंद्र सिंह सिकरवार, हेड कॉन्स्टेबल अनूप सिंह और कॉन्स्टेबल वेदप्रकाश शामिल हैं।

लुगुबुरु का यह अभियान केवल एक सफल मुठभेड़ की कहानी नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में डटे सुरक्षाबलों के साहस और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल के रूप में भी देखा जा रहा है। एक करोड़ के इनामी नक्सली कमांडर समेत आठ नक्सलियों को ढेर करने वाले अभियान में अग्रिम मोर्चे पर नेतृत्व करने वाले अंजनी कुमार और दीपक साह को अब शौर्य चक्र से सम्मानित किया जाएगा। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मिला यह सम्मान उन सभी जवानों के साहस को सलाम है, जो देश की सुरक्षा के लिए चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य पर अडिग रहते हैं।

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