Tuesday, 6 October 2026
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आसनसोल-दुर्गापुर

नियामतपुर की आग के बाद कुल्टी में स्थायी फायर स्टेशन की मांग तेज, कांग्रेस ने उठाई आवाज

Moutushi · 6 October 2026, 5:10 PM

कुल्टी: पश्चिम बर्धमान जिले के कुल्टी विधानसभा क्षेत्र में स्थायी फायर स्टेशन स्थापित करने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। नियामतपुर में शनिवार देर रात एक बहुमंजिला आवासीय परिसर की पार्किंग में लगी भीषण आग के बाद अब स्थानीय स्तर पर अग्निशमन व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। घटना के दौरान स्थानीय पुलिस की तत्परता से आवास में मौजूद कई लोगों को समय रहते बाहर निकाला गया और एक बड़ा हादसा टल गया। हालांकि, दमकल की गाड़ी पहुंचने में हुई देरी को लेकर स्थानीय लोगों और कांग्रेस नेताओं ने चिंता जताई है।

आधी रात पार्किंग में भड़की आग से मचा हड़कंप

नियामतपुर में शनिवार देर रात करीब डेढ़ बजे एक बहुमंजिला आवासीय परिसर की पार्किंग में अचानक आग लग गई। उस समय अधिकांश लोग अपने घरों में सो रहे थे। आग से उठता धुआं और लपटें देखकर इलाके में अफरा-तफरी मच गई। नियामतपुर पुलिस की गश्ती टीम की नजर जब आग पर पड़ी, तो पुलिसकर्मी तत्काल मौके पर पहुंचे और आवास में मौजूद लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस की तत्परता के कारण कई लोगों को समय रहते बाहर निकाला जा सका। आग पर काबू पाने के लिए दमकल विभाग को सूचना दी गई। इस घटना में पार्किंग में खड़ी छह मोटरसाइकिल और एक चारपहिया वाहन जलकर क्षतिग्रस्त हो गए। राहत की बात यह रही कि किसी व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं मिली। आग लगने के वास्तविक कारण की जांच की जा रही है।

दमकल पहुंचने में देरी का दावा, व्यवस्था पर सवाल

घटना के बाद कुल्टी में स्थायी फायर स्टेशन की मांग ने जोर पकड़ लिया है। पश्चिम बर्धमान जिला ओबीसी कांग्रेस के अध्यक्ष एडवोकेट राजेश्वर शर्मा का दावा है कि आसनसोल से दमकल की गाड़ी को घटनास्थल तक पहुंचने में काफी समय लगा। उनके अनुसार, अगर यही घटना दिन के व्यस्त समय में होती और सड़क पर भारी जाम रहता, तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।

हालांकि, दमकल विभाग की ओर से पहुंचने के समय को लेकर अलग आधिकारिक आंकड़ा सामने आने तक इसे कांग्रेस नेता और स्थानीय लोगों के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। घटना के दौरान पुलिस की तत्काल मौजूदगी और लोगों को बाहर निकालने की कार्रवाई ने जरूर संभावित नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

यही घटना अब एक बड़े सवाल में बदल गई है—क्या कुल्टी जैसे बड़े और घनी आबादी वाले क्षेत्र में आग लगने की स्थिति से निपटने के लिए स्थानीय स्तर पर स्थायी दमकल केंद्र की जरूरत नहीं है?

राजेश्वर शर्मा के नेतृत्व में अभियान

इसी मुद्दे को लेकर पश्चिम बर्धमान जिला ओबीसी कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश्वर शर्मा के नेतृत्व में कुल्टी क्षेत्र में स्थायी फायर स्टेशन की मांग को लेकर अभियान चलाया गया। कांग्रेस की ओर से कहा गया कि कुल्टी में बड़ी आबादी के साथ-साथ बाजार, स्कूल-कॉलेज, कारखाने, बहुमंजिला आवास और घनी बस्तियां मौजूद हैं। ऐसे में किसी भी बड़े अग्निकांड के दौरान शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

कांग्रेस का कहना है कि अगर दमकल की गाड़ी को किसी दूसरे क्षेत्र से घटनास्थल तक पहुंचना पड़े, तो दूरी और यातायात की स्थिति के कारण अतिरिक्त समय लग सकता है। आग जैसी आपात स्थिति में यह देरी नुकसान को बढ़ा सकती है। इसी वजह से पार्टी ने कुल्टी में स्थायी और पूर्ण सुविधाओं से लैस फायर स्टेशन स्थापित करने की मांग रखी है।

अभियान के दौरान “जनता की सुरक्षा, हमारी जिम्मेदारी—कुल्टी में चाहिए फायर स्टेशन” जैसे नारे भी लगाए गए। इस अभियान के जरिए कांग्रेस ने प्रशासन का ध्यान क्षेत्र की अग्निशमन व्यवस्था की ओर आकर्षित करने की कोशिश की।

कांग्रेस की कई मांगें, 24 घंटे सेवा पर जोर

कांग्रेस की ओर से कुल्टी क्षेत्र में केवल एक फायर स्टेशन स्थापित करने की मांग नहीं की गई है। पार्टी ने पर्याप्त संख्या में दमकल की गाड़ियां उपलब्ध कराने, प्रशिक्षित अग्निशमन कर्मचारियों की नियुक्ति और चौबीसों घंटे आपात सेवा सुनिश्चित करने की मांग की है।

इसके अलावा कुल्टी, बराकर, नियामतपुर और आसपास के क्षेत्रों में ऐसी व्यवस्था विकसित करने की मांग की गई है, जिससे आग लगने की स्थिति में दमकल कर्मी कम से कम समय में घटनास्थल तक पहुंच सकें। पार्टी का तर्क है कि स्थानीय स्तर पर दमकल की उपलब्धता होने से शुरुआती स्तर पर आग को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

कांग्रेस ने आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया के लिए स्थानीय स्तर पर अतिरिक्त व्यवस्था विकसित करने की बात भी उठाई है। हालिया घटना के संदर्भ में पार्टी ने कहा कि आग लगने के बाद केवल दमकल की गाड़ी का इंतजार करने के बजाय शुरुआती बचाव और राहत व्यवस्था भी मजबूत होनी चाहिए।

बहुमंजिला इमारतों की अग्नि सुरक्षा भी सवालों में

नियामतपुर की घटना ने केवल फायर स्टेशन की जरूरत को ही चर्चा में नहीं ला दिया है, बल्कि बहुमंजिला आवासीय परिसरों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, संबंधित आवास में आग लगने के दौरान धुआं तेजी से फैल गया था और पार्किंग में खड़े कई वाहन आग की चपेट में आ गए।

विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी बहुमंजिला इमारत में अग्निशामक यंत्र, आपातकालीन निकास, अलार्म सिस्टम, पर्याप्त जल व्यवस्था और नियमित सुरक्षा जांच जैसे इंतजाम महत्वपूर्ण होते हैं। आग लगने के शुरुआती कुछ मिनटों में उपलब्ध संसाधनों का सही इस्तेमाल बड़े हादसे को रोकने में मदद कर सकता है।

इसलिए स्थानीय लोगों की मांग केवल स्थायी फायर स्टेशन तक सीमित नहीं है। वे चाहते हैं कि आवासीय परिसरों और व्यावसायिक इमारतों में भी अग्नि सुरक्षा मानकों की नियमित जांच हो।

कुल्टी में क्यों महत्वपूर्ण है स्थायी दमकल केंद्र?

कुल्टी क्षेत्र में तेजी से शहरीकरण और आबादी के विस्तार के साथ बहुमंजिला इमारतों, बाजारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की संख्या बढ़ी है। ऐसे क्षेत्र में आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता का सवाल स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है।

नियामतपुर की घटना में पुलिस की सक्रियता ने संभावित जनहानि को टालने में मदद की, लेकिन घटना के बाद उठी मांग ने प्रशासन के सामने भविष्य की तैयारियों का सवाल जरूर रखा है। अगर किसी दिन आग और भी बड़े परिसर में फैल जाए, तो शुरुआती प्रतिक्रिया कितनी तेज होगी—यही चिंता अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है।

अभियान में कई कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता मौजूद

स्थायी फायर स्टेशन की मांग को लेकर आयोजित कार्यक्रम में वरिष्ठ कांग्रेस नेता काजल दत्ता, कांग्रेस महिला नेत्री मौमिता सेन गुप्ता, कांग्रेस युवा नेता मनीष बर्णवाल, सिराज राजदान सहित अन्य कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जनता की सुरक्षा किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि प्रशासन और पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। उनका कहना है कि कुल्टी में स्थायी दमकल केंद्र की स्थापना से कुल्टी के साथ-साथ बराकर, नियामतपुर और आसपास के इलाकों को भी आपात स्थिति में राहत मिल सकती है।

अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर हैं। नियामतपुर की आग ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि किसी बड़े अग्निकांड की स्थिति में स्थानीय स्तर पर राहत और बचाव व्यवस्था कितनी तैयार है। स्थायी फायर स्टेशन की मांग पर प्रशासन क्या निर्णय लेता है, यह आने वाले दिनों में देखने वाली बात होगी।

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