कोलकाता: कोलकाता के पार्क स्ट्रीट इलाके में बच्चे से कथित तौर पर दूध छीने जाने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक बहस का रूप ले चुका है। इस मामले में विपक्ष की ओर से सरकार और नगर पालिका एवं शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पाल पर सवाल उठाए जाने के बाद मंत्री ने सोमवार सुबह सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी कर पूरे मामले पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि घटना को जिस तरह से पेश किया जा रहा है, वास्तविक स्थिति उससे अलग है।
अग्निमित्रा पाल ने दावा किया कि पार्क स्ट्रीट के फुटपाथ पर उस दिन किसी बच्चे के मुंह से दूध नहीं छीना गया था। उनके अनुसार, बच्चे के परिवार के सदस्यों से केवल फुटपाथ से हटने के लिए कहा गया था। मंत्री ने कहा कि व्यस्त सड़क के किनारे छोटे बच्चे का रेंगना गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकता है। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित बनाए।
‘बच्चे के साथ ऐसी स्थिति में हादसा हो जाए तो जिम्मेदारी कौन लेगा?’
मंत्री ने अपने वीडियो संदेश में सवाल उठाया कि यदि व्यस्त सड़क के किनारे किसी छोटे बच्चे के साथ दुर्घटना हो जाती तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता। उन्होंने कहा कि जो लोग इस मामले में मानवता की बात कर रहे हैं, उन्हें यह भी बताना चाहिए कि अगर बच्चे के साथ कोई गंभीर हादसा हो जाता तो क्या वे उसकी जिम्मेदारी लेते।
अग्निमित्रा पाल ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी गरीब व्यक्ति को परेशान करना नहीं है। उनका तर्क है कि फुटपाथ आम लोगों के आवागमन के लिए होता है और उसे पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि किसी भी कार्रवाई को केवल एक घटना या एक व्यक्ति के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। शहर में रोजाना बड़ी संख्या में लोग पैदल चलते हैं। यदि फुटपाथ पर लगातार अतिक्रमण, अवैध पार्किंग या अन्य बाधाएं रहेंगी तो आम नागरिकों को सड़क पर उतरकर चलना पड़ेगा, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है।
फुटपाथ को लेकर मंत्री का दो टूक संदेश
अग्निमित्रा पाल ने फुटपाथ के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि फुटपाथ गरीब और अमीर के बीच कोई भेदभाव नहीं करता। वहां से गुजरने वाला हर व्यक्ति इंसान है और हर व्यक्ति को सुरक्षित तरीके से चलने का अधिकार है।
मंत्री ने सर्वोच्च न्यायालय के उस व्यापक सिद्धांत का भी उल्लेख किया, जिसके तहत फुटपाथ को पैदल यात्रियों के लिए उपयोगी और सुरक्षित बनाए रखने पर जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि फुटपाथ का मूल उद्देश्य लोगों को पैदल चलने की सुविधा देना है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 15 वर्षों में बड़ी संख्या में लोगों को फुटपाथ पर रहने के लिए मजबूर किया गया और उन्हें पर्याप्त रोजगार के अवसर नहीं मिले। मंत्री ने इसी मुद्दे को लेकर वसूली, रिश्वत और भ्रष्टाचार जैसे आरोपों का भी जिक्र करते हुए विपक्ष पर राजनीतिक हमला किया।
हॉकर्स और अवैध पार्किंग पर भी सरकार सख्त
पार्क स्ट्रीट विवाद के बीच अग्निमित्रा पाल ने फुटपाथ से अतिक्रमण हटाने, अवैध पार्किंग पर कार्रवाई और शहर की व्यवस्था सुधारने की सरकार की नीति को भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि सरकार यदि फुटपाथ को खाली कराने या अवैध पार्किंग हटाने का प्रयास करती है तो विपक्ष की ओर से इसका विरोध किया जाता है।
मंत्री ने कहा कि सरकार किसी एक व्यक्ति के लाभ या नुकसान को देखकर निर्णय नहीं लेगी। सरकार को पूरे शहर और आम जनता के हित को ध्यान में रखकर काम करना होगा। उनका कहना था कि सड़क और फुटपाथ पर चलने वाले आम नागरिकों की सुविधा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी किसी अन्य वर्ग की जरूरतें।
उन्होंने संकेत दिया कि शहर में अतिक्रमण और यातायात व्यवस्था को लेकर आने वाले समय में भी कार्रवाई जारी रह सकती है। सरकार का लक्ष्य सार्वजनिक स्थानों को व्यवस्थित करना और लोगों के लिए सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना बताया गया।
निवेश के लिए शहर की तस्वीर बदलना जरूरी
अग्निमित्रा पाल ने शहर की व्यवस्था को सीधे राज्य में निवेश से जोड़ते हुए कहा कि सरकार नए उद्योग और निवेश लाने की कोशिश कर रही है। उद्योगपतियों के साथ बातचीत भी चल रही है। ऐसे में यदि कोई निवेशक राज्य में आकर सड़कों पर भारी जाम, खराब सड़कें, अव्यवस्थित पार्किंग और बदहाल शहरी व्यवस्था देखता है, तो उसके सामने निवेश को लेकर स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े होंगे।
उन्होंने कहा कि निवेश केवल बड़े-बड़े दावों से नहीं आता, बल्कि इसके लिए बेहतर बुनियादी ढांचा और व्यवस्थित शहर भी जरूरी है। इसी वजह से सड़क, नाली और अन्य शहरी सुविधाओं में सुधार का काम किया जा रहा है।
मंत्री ने बताया कि सड़कों से लेकर जल निकासी व्यवस्था तक विभिन्न क्षेत्रों में सुधार के प्रयास चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अक्टूबर तक सभी सड़कों को ठीक करने की बात कही है।
‘100 दिनों में 15 साल की समस्या खत्म नहीं होगी’
अग्निमित्रा पाल ने सरकार के कामकाज को लेकर भी विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिछले 15 वर्षों में बंगाल की शहरी और प्रशासनिक व्यवस्था में जो समस्याएं पैदा हुई हैं, उन्हें केवल 100 दिनों में पूरी तरह ठीक कर पाना संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि कोई जादुई मंत्र बोलते ही वर्षों पुरानी समस्याएं अचानक खत्म हो जाएंगी। इसके लिए समय, योजना और लगातार काम करने की जरूरत होगी। मंत्री ने दावा किया कि सरकार इसी दिशा में काम कर रही है और धीरे-धीरे शहरों की व्यवस्था में सुधार किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जनता से किए गए वादों को लागू करना सरकार की जिम्मेदारी है और सरकार अपने वादों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आम लोगों से सरकार के प्रयासों में सहयोग करने की अपील भी की।
पार्क स्ट्रीट के कथित ‘दूध कांड’ से शुरू हुआ विवाद अब फुटपाथ, अतिक्रमण, हॉकर्स, रोजगार, शहरी विकास और निवेश जैसे बड़े मुद्दों से जुड़ गया है। मंत्री के बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। अब देखना होगा कि सरकार की अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई और शहरी सुधार की नीति को लेकर विपक्ष आगे क्या रुख अपनाता है।





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