अंडाल, बिकाश चंद्र, सिटी टुडे न्यूज़ : पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्दवान जिले के अंडाल क्षेत्र के खांद्रा गांव में मां लक्ष्मी की पूजा से जुड़ी एक अनोखी परंपरा आज भी श्रद्धा और विश्वास के साथ निभाई जा रही है। यहां की सबसे खास बात यह है कि गांव में प्रचलित मान्यता के अनुसार, मां लक्ष्मी की पूजा केवल सिंह परिवार में होती है। करीब 178 वर्षों से चली आ रही इस पूजा की शुरुआत के पीछे एक सपना जुड़ा हुआ है। परिवार की मान्यता है कि मां लक्ष्मी ने स्वयं सुधाकृष्ण सिंह को सपने में पूजा शुरू करने का आदेश दिया था। तभी से पीढ़ी दर पीढ़ी यह परंपरा आगे बढ़ती चली आ रही है।
हर साल पूजा के अवसर पर खांद्रा गांव में उत्सव जैसा माहौल बन जाता है। तीन दिनों तक धार्मिक अनुष्ठानों के साथ विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। गांव के निवासियों के अलावा आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग इस आयोजन में शामिल होते हैं। समय बदलने के बावजूद इस पूजा के प्रति लोगों की आस्था और भावनात्मक जुड़ाव आज भी बना हुआ है।
सपने में मिला था मां लक्ष्मी का आदेश
सिंह परिवार में प्रचलित मान्यता के अनुसार, लगभग 178 वर्ष पहले परिवार के सदस्य सुधाकृष्ण सिंह को एक रात सपने में मां लक्ष्मी के दर्शन हुए थे। मान्यता है कि मां ने उन्हें पूजा शुरू करने का निर्देश दिया। परिवार ने इस सपने को देवी का आदेश मानते हुए उनकी आराधना शुरू की।
इसी घटना को खांद्रा में सिंह परिवार की लक्ष्मी पूजा की शुरुआत से जोड़कर देखा जाता है। परिवार के लिए यह केवल एक धार्मिक कथा नहीं, बल्कि उनकी पीढ़ियों से चली आ रही आस्था और पारिवारिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
हालांकि, सपने से जुड़ी यह कहानी परिवार की पारंपरिक मान्यता पर आधारित है। इतने लंबे समय से चली आ रही इस परंपरा का ऐतिहासिक महत्व स्थानीय लोगों के बीच विशेष चर्चा का विषय बना रहता है।
मुर्शिदाबाद के कांदी से खांद्रा पहुंचे थे सुधाकृष्ण सिंह
परिवार से जुड़ी मान्यता के अनुसार, सिंह परिवार का मूल निवास पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के कांदी क्षेत्र में था। कहा जाता है कि मां लक्ष्मी के निर्देश के बाद सुधाकृष्ण सिंह कांदी से खांद्रा गांव पहुंचे और यहां पूजा की शुरुआत की।
बाद में परिवार ने खांद्रा में स्थायी रूप से रहना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे यह पूजा परिवार की पहचान बन गई और पीढ़ियों के साथ इसकी परंपरा भी आगे बढ़ती रही।
इस कहानी में कांदी से खांद्रा तक का सफर केवल एक परिवार के स्थान परिवर्तन का विवरण नहीं है, बल्कि स्थानीय धार्मिक विरासत से जुड़ी स्मृति भी है। परिवार की मान्यता के अनुसार, मां लक्ष्मी की आराधना से शुरू हुआ यह सिलसिला आज भी उसी श्रद्धा के साथ जारी है।
गांव में सिंह परिवार की पूजा का विशेष महत्व
खांद्रा गांव में मां लक्ष्मी की पूजा को लेकर एक विशेष परंपरा प्रचलित है। स्थानीय जानकारी के अनुसार, गांव में अन्य स्थानों पर अलग से लक्ष्मी पूजा नहीं होती और सिंह परिवार की पूजा ही इस अवसर का प्रमुख केंद्र रहती है।
इसी वजह से पूजा के दिनों में परिवार के घर और उससे जुड़े आयोजन को विशेष महत्व मिलता है। स्थानीय लोगों के लिए यह आयोजन वर्षों से चली आ रही धार्मिक परंपरा को देखने, उसमें शामिल होने और आपसी मेलजोल बढ़ाने का अवसर भी बनता है।
करीब 178 वर्षों का समय किसी भी पारिवारिक परंपरा के लिए लंबी अवधि है। इस दौरान कई पीढ़ियां बदल चुकी हैं, लेकिन परिवार की मान्यता और पूजा से जुड़ी रीति-रिवाजों को आगे बढ़ाने का सिलसिला कायम है।
तीन दिनों तक पूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम
सिंह परिवार की लक्ष्मी पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं रहती। पूजा के अवसर पर तीन दिनों तक विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इनमें गांव के लोगों के साथ आसपास के क्षेत्रों के निवासी भी भाग लेते हैं।
धार्मिक आयोजन के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का जुड़ना इस पूजा को सामुदायिक उत्सव का रूप देता है। लोगों को एक-दूसरे से मिलने, परंपराओं को साझा करने और अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहने का अवसर मिलता है।
पूजा के दिनों में गांव में उत्साह का माहौल रहता है। परिवार और स्थानीय लोगों की भागीदारी इस आयोजन को खास बनाती है। इस तरह धार्मिक आस्था और सामाजिक मेल-मिलाप एक साथ दिखाई देते हैं।
178 वर्षों से पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ रही विरासत
समय के साथ रहन-सहन, सामाजिक परिस्थितियों और उत्सव मनाने के तरीकों में बदलाव आया है। इसके बावजूद सिंह परिवार की लक्ष्मी पूजा की परंपरा बरकरार है। परिवार के सदस्य आज भी पुराने रीति-रिवाजों और श्रद्धा के साथ मां लक्ष्मी की आराधना करते हैं।
ऐसी पारिवारिक परंपराएं स्थानीय इतिहास और सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनके माध्यम से नई पीढ़ी अपने पूर्वजों की मान्यताओं, पारिवारिक कथाओं और धार्मिक रीति-रिवाजों से परिचित होती है।
खांद्रा की यह पूजा इसी निरंतरता का उदाहरण है। करीब डेढ़ शताब्दी से भी अधिक समय से जारी इस आयोजन ने परिवार और गांव के लोगों के बीच एक विशेष संबंध बनाए रखा है।
धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता का संदेश
सिंह परिवार की लक्ष्मी पूजा खांद्रा गांव की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन चुकी है। तीन दिनों तक चलने वाले आयोजन में आसपास के लोगों की भागीदारी यह दिखाती है कि धार्मिक परंपराएं सामाजिक मेल-मिलाप का माध्यम भी बन सकती हैं।
मां लक्ष्मी को समृद्धि और शुभता की देवी माना जाता है। उनकी पूजा के अवसर पर लोग परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना करते हैं। खांद्रा में भी यह आयोजन स्थानीय लोगों के लिए श्रद्धा और परंपरा से जुड़ा विशेष अवसर है।
सपने में मां लक्ष्मी के आदेश से पूजा शुरू होने की पारिवारिक मान्यता से लेकर आज तक कायम परंपरा तक, खांद्रा के सिंह परिवार की यह लक्ष्मी पूजा 178 वर्षों की आस्था, सांस्कृतिक विरासत और पीढ़ियों के जुड़ाव की कहानी कहती है। यही वजह है कि हर साल यह आयोजन गांव और आसपास के क्षेत्रों के लोगों के लिए खास आकर्षण बना रहता है।




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