Tuesday, 27 October 2026
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बंगाल

मनीष शुक्ला हत्याकांड पर भाजपा में घमासान, कौस्तुभ बागची की चेतावनी से सियासी हलचल

Moutushi · 27 October 2026, 10:25 AM

कोलकाता, बिकाश चंद्र, सिटी टुडे न्यूज़: वर्ष 2020 में टीटागढ़ में भाजपा नेता मनीष शुक्ला की गोली मारकर हत्या के मामले ने एक बार फिर राज्य की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। बैरकपुर के भाजपा विधायक कौस्तुभ बागची ने इस पुराने हत्याकांड को लेकर अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेता और मंत्री अर्जुन सिंह पर सवाल उठाए हैं। कौस्तुभ ने आरोप लगाया कि मनीष शुक्ला हत्याकांड में जिन लोगों के नाम सामने आए थे, उनके साथ भाजपा के कुछ नेताओं की नजदीकियां दिखाई दे रही हैं। उन्होंने पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष उत्तम दास और प्रशांत चौधरी को भाजपा में शामिल किए जाने का विरोध करते हुए यहां तक चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर वह पार्टी के राज्य कार्यालय के सामने अपने ऊपर केरोसिन डालकर आत्महत्या कर लेंगे। इस बयान के बाद भाजपा के भीतर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है।

छह साल पुराने हत्याकांड को लेकर फिर उठे सवाल

मनीष शुक्ला की हत्या 4 अक्टूबर 2020 को उत्तर 24 परगना जिले के टीटागढ़ में भाजपा कार्यालय के बाहर गोली मारकर की गई थी। उस समय वह भाजपा के स्थानीय नेता और नगरपालिका के पार्षद थे। इस घटना ने बैरकपुर औद्योगिक क्षेत्र की राजनीति में व्यापक चर्चा पैदा की थी।

मामले की जांच राज्य के आपराधिक जांच विभाग यानी सीआईडी ने की थी। जनवरी 2021 में दाखिल आरोपपत्र से संबंधित खबरों के अनुसार, जांच एजेंसी ने कई लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था और कुछ अन्य लोगों के नाम संदिग्धों के रूप में सामने आए थे। इस मामले में उत्तम दास और प्रशांत चौधरी के नाम भी जांच के दौरान सामने आए थे। हालांकि, किसी व्यक्ति का नाम जांच या शिकायत में आने मात्र से उसका दोष सिद्ध नहीं हो जाता।

अब कौस्तुभ बागची ने इस मामले को नए सिरे से आगे बढ़ाने की बात कही है। उनका कहना है कि वह कानूनी प्रक्रिया के जरिए मामले में आगे की कार्रवाई की पहल कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, मुख्य सचिव, सीआईडी के महानिदेशक और बैरकपुर के पुलिस आयुक्त को पत्र लिखने की बात कही है।

अर्जुन सिंह और भाजपा नेताओं की नजदीकियों पर आपत्ति

सोमवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कौस्तुभ बागची ने कहा कि मनीष शुक्ला हत्याकांड में जिन लोगों के नाम सामने आए थे, उनके साथ भाजपा के कुछ नेताओं की तस्वीरें दिखाई देना उन्हें स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने अर्जुन सिंह का नाम लेते हुए इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी जाहिर की।

कौस्तुभ ने कहा कि अर्जुन सिंह एक बड़े नेता हैं और उन्हें उनसे व्यक्तिगत नाराजगी नहीं है। लेकिन, उनके अनुसार, ऐसे लोगों के साथ पार्टी नेताओं की तस्वीरें सामने आने से कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के बीच गलत संदेश जा सकता है।

उन्होंने उत्तम दास और प्रशांत चौधरी को भाजपा में शामिल किए जाने का स्पष्ट विरोध किया। कौस्तुभ का कहना है कि वह किसी भी परिस्थिति में इन दोनों को पार्टी में शामिल करने के पक्ष में नहीं हैं। उनके इस बयान ने पार्टी के भीतर पुराने नेताओं और नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर बहस छेड़ दी है।

आत्महत्या की चेतावनी देकर जताया विरोध

संवाददाता सम्मेलन के दौरान कौस्तुभ बागची ने कहा कि यदि उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया, तो वह और कठोर कदम उठा सकते हैं। उन्होंने भाजपा के राज्य कार्यालय के सामने केरोसिन डालकर आत्महत्या करने की चेतावनी दी।

उन्होंने अपने पुराने राजनीतिक रुख का भी उल्लेख किया। कौस्तुभ के अनुसार, इससे पहले भी उन्होंने अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धता जताने के लिए लंबे समय तक सिर मुंडवाकर रखा था। उनका कहना था कि जरूरत पड़ने पर वह अपने विरोध को और आगे ले जाएंगे।

उनकी इस टिप्पणी ने विवाद को और बढ़ा दिया है। हालांकि, यह बयान उनकी ओर से दी गई चेतावनी है; इसे किसी वास्तविक कार्रवाई के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। फिलहाल, इस मुद्दे पर पार्टी नेतृत्व की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक निर्णय सामने आने की जानकारी नहीं है।

अर्जुन सिंह की प्रतिक्रिया भी आई सामने

कौस्तुभ बागची के आरोपों के बीच अर्जुन सिंह की प्रतिक्रिया भी सामने आई। समाचार एजेंसी यूएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, अर्जुन सिंह ने कहा, “मैं जानता हूं कि राजनीति कैसे की जाती है।” हालांकि, उत्तम दास और प्रशांत चौधरी को भाजपा में शामिल किए जाने के संबंध में उनकी ओर से कोई विस्तृत स्पष्टीकरण रिपोर्ट में नहीं दिया गया।

कौस्तुभ के आरोपों और अर्जुन सिंह की प्रतिक्रिया के बाद बैरकपुर क्षेत्र में भाजपा की स्थानीय राजनीति को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस विवाद का केंद्र केवल दो व्यक्तियों की संभावित राजनीतिक एंट्री नहीं, बल्कि पुराने हत्याकांड से जुड़े सवाल और पार्टी की राजनीतिक छवि भी है।

मनीष शुक्ला के पिता चंद्रमणि शुक्ला का पलटवार

इस पूरे विवाद में मनीष शुक्ला के पिता चंद्रमणि शुक्ला ने भी कौस्तुभ बागची पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि बेटे की हत्या के मामले में कानूनी लड़ाई के दौरान जब बैरकपुर में कोई वकील नहीं मिल रहा था, तब उन्होंने कौस्तुभ से संपर्क किया था।

चंद्रमणि शुक्ला के अनुसार, कौस्तुभ शुरुआत में मुकदमा लड़ने के लिए तैयार हो गए थे, लेकिन बाद में अपनी जान को खतरा होने की बात कहकर उन्होंने केस लड़ने से इनकार कर दिया था। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि कुछ लोग उनके बेटे के नाम का इस्तेमाल करके बैरकपुर में राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ये चंद्रमणि शुक्ला के दावे हैं; इन पर कौस्तुभ की ओर से क्या विस्तृत प्रतिक्रिया आई है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।

अब आगे क्या होगा?

मनीष शुक्ला हत्याकांड को लेकर ताजा विवाद ने भाजपा के भीतर राजनीतिक सहमति, पुराने मामलों और संभावित नए पार्टी सदस्यों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। कौस्तुभ बागची ने कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही है, जबकि चंद्रमणि शुक्ला ने उनके पुराने रुख पर सवाल उठाए हैं।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि पार्टी नेतृत्व इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है और कौस्तुभ की ओर से भेजे गए पत्रों के बाद संबंधित अधिकारी क्या कदम उठाते हैं। हत्याकांड में जिन लोगों पर आरोप या संदेह जताया गया था, उनकी कानूनी स्थिति और किसी भी आगे की कार्रवाई का निर्धारण अदालत तथा जांच एजेंसियों के निष्कर्षों के आधार पर ही होना चाहिए।

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