Saturday, 5 September 2026
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आसनसोल-दुर्गापुर

जन्माष्टमी पर दयालबाबा आश्रम पहुंचीं अग्निमित्रा पाल, विधि-विधान से की पूजा-अर्चना

Moutushi · 4 September 2026, 2:51 PM

आसनसोल: भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव जन्माष्टमी के अवसर पर आसनसोल दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के महिशिला गांव स्थित दयालबाबा आश्रम में भक्तिमय माहौल देखने को मिला। जन्माष्टमी के पावन अवसर पर भाजपा विधायक अग्निमित्रा पाल दयालबाबा आश्रम पहुंचीं और मंदिर में विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने भगवान के दर्शन कर क्षेत्रवासियों सहित सभी लोगों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

जन्माष्टमी को लेकर सुबह से ही मंदिर और आश्रम परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर भक्तों में विशेष उत्साह दिखाई दिया। धार्मिक वातावरण के बीच पूजा-अर्चना और भक्ति के कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसी दौरान अग्निमित्रा पाल भी दयालबाबा आश्रम पहुंचीं और श्रद्धा के साथ मंदिर में पूजा की।

जन्माष्टमी पर दयालबाबा आश्रम में पहुंचीं अग्निमित्रा पाल

महिशिला गांव स्थित दयालबाबा आश्रम स्थानीय स्तर पर धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। जन्माष्टमी जैसे विशेष पर्व पर यहां श्रद्धालुओं की मौजूदगी से पूरे परिसर में उत्सव का माहौल बन गया। अग्निमित्रा पाल के पहुंचने पर भी वहां मौजूद लोगों में उत्साह देखने को मिला।

मंदिर में पूजा-अर्चना के दौरान उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद लिया। इसके बाद उन्होंने जन्माष्टमी के महत्व को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जन्माष्टमी का अर्थ ही पूजा और शुभ शुरुआत से जुड़ा है। यह पर्व लोगों को भक्ति, प्रेम, सद्भाव और सकारात्मकता का संदेश देता है।

अग्निमित्रा पाल ने कहा कि त्योहार केवल धार्मिक आयोजन नहीं होते, बल्कि समाज के लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने का भी अवसर प्रदान करते हैं। जन्माष्टमी के दौरान अलग-अलग स्थानों पर लोग सामूहिक रूप से भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाते हैं और धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं।

उत्सव के बीच सुरक्षा पर भी जोर

जन्माष्टमी के अवसर पर पूजा-अर्चना के बाद अग्निमित्रा पाल ने त्योहार के दौरान आम लोगों की सुरक्षा को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि लोग पूरे उत्साह और खुशी के साथ पर्व मनाएं, लेकिन साथ ही सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि त्योहार के दिनों में बड़ी संख्या में लोग मंदिरों, पूजा स्थलों और विभिन्न धार्मिक आयोजनों में शामिल होते हैं। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। आम जनता को किसी प्रकार की परेशानी न हो और लोग सुरक्षित वातावरण में धार्मिक उत्सव का आनंद ले सकें, इसके लिए आवश्यक व्यवस्थाओं पर ध्यान देना जरूरी है।

अग्निमित्रा पाल ने कहा कि उत्सव के दौरान लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि जन्माष्टमी का पर्व पूरे क्षेत्र में शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाया जाएगा।

धार्मिक उत्सव से सामाजिक एकता का संदेश

जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की स्मृति में मनाया जाने वाला प्रमुख हिंदू पर्व है। इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है। कई स्थानों पर भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और उनके जीवन से जुड़े प्रसंगों को भी प्रस्तुत किया जाता है।

महिशिला के दयालबाबा आश्रम में भी जन्माष्टमी के अवसर पर श्रद्धा और आस्था का माहौल देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने मंदिर में पूजा-अर्चना की और भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन किए। पर्व को लेकर लोगों में उत्साह का माहौल रहा।

जन्माष्टमी का धार्मिक महत्व होने के साथ-साथ सामाजिक महत्व भी है। यह पर्व लोगों को प्रेम, करुणा, सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनके उपदेशों को आज भी भारतीय समाज में महत्वपूर्ण माना जाता है। यही वजह है कि जन्माष्टमी के अवसर पर छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर वर्ग के लोग उत्साह के साथ धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं।

आसनसोल में भी दिखा पर्व का उत्साह

जन्माष्टमी के अवसर पर आसनसोल और आसपास के इलाकों में भी धार्मिक उत्साह देखने को मिला। मंदिरों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ी और कई जगहों पर विशेष पूजा-अर्चना की गई। लोगों ने अपने घरों में भी भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की तथा परिवार के साथ पर्व मनाया।

महिशिला गांव स्थित दयालबाबा आश्रम में अग्निमित्रा पाल का पहुंचना भी इसी धार्मिक उत्सव का हिस्सा रहा। पूजा-अर्चना के दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं और क्षेत्र के लोगों से पर्व को शांतिपूर्ण एवं खुशी के साथ मनाने की अपील की।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि उत्सव का आनंद तभी बेहतर तरीके से लिया जा सकता है, जब लोगों के बीच आपसी सद्भाव और भाईचारा बना रहे। धार्मिक पर्व समाज में सकारात्मक ऊर्जा और एकजुटता का वातावरण तैयार करने का अवसर देते हैं।

भगवान श्रीकृष्ण के संदेश को जीवन में उतारने की जरूरत

जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के साथ उनके संदेशों को याद करने की भी परंपरा है। श्रीकृष्ण ने जीवन में कर्म, कर्तव्य और धर्म के महत्व पर जोर दिया था। ऐसे में जन्माष्टमी केवल पूजा और उत्सव का दिन नहीं, बल्कि अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर भी माना जाता है।

दयालबाबा आश्रम में आयोजित पूजा-अर्चना के दौरान भी इसी धार्मिक भावना की झलक देखने को मिली। श्रद्धालुओं ने भक्ति के साथ भगवान श्रीकृष्ण की आराधना की और अपने परिवार तथा समाज की खुशहाली की प्रार्थना की।

अग्निमित्रा पाल ने भी जन्माष्टमी के अवसर पर लोगों को पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पर्व सभी के जीवन में खुशियां, शांति और समृद्धि लेकर आएगा।

भक्तिमय माहौल में संपन्न हुआ आयोजन

महिशिला गांव स्थित दयालबाबा आश्रम में जन्माष्टमी के अवसर पर पूजा-अर्चना के दौरान पूरा वातावरण धार्मिक और भक्तिमय नजर आया। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की मौजूदगी और पर्व को लेकर उत्साह ने आयोजन को विशेष बना दिया।

अग्निमित्रा पाल के दौरे के दौरान जहां धार्मिक आस्था का माहौल देखने को मिला, वहीं उनके सुरक्षा संबंधी संदेश ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि त्योहार खुशी और उत्साह के साथ मनाया जाना चाहिए, लेकिन लोगों की सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।

जन्माष्टमी के इस पावन अवसर पर दयालबाबा आश्रम में हुई पूजा-अर्चना ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि धार्मिक पर्व केवल आस्था का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि समाज में शांति, सद्भाव और एकता को मजबूत करने का माध्यम भी बन सकते हैं। महिशिला में जन्माष्टमी का यह आयोजन इसी धार्मिक भावना और सामूहिक उत्साह के साथ संपन्न हुआ।

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