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“सत्ता बदली, दादागिरी नहीं!” जमुड़िया की ताराकोलेयरी में सियासी घमासान

Moutushi · 9 August 2026, 11:24 AM

जमुड़िया, पश्चिम बर्धमान:
पश्चिम बर्धमान जिले के जमुड़िया क्षेत्र में एक बार फिर खदान की राजनीति गरमा गई है। चुरुलिया स्थित ताराकोलेयरी खदान में शुक्रवार को भाजपा के विरोध प्रदर्शन के चलते कोयला उत्पादन और परिवहन पूरी तरह प्रभावित हुआ, जिससे इलाके में तनाव का माहौल बन गया।

📍 खदान गेट पर सियासी प्रदर्शन

सूत्रों के मुताबिक, भाजपा के स्थानीय नेता और कार्यकर्ता पार्टी का झंडा लेकर खदान के मुख्य गेट पर पहुंचे और जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि खदान में काम देने में पक्षपात किया जा रहा है।

⚠️ क्या है विवाद की जड़?

भाजपा समर्थकों का आरोप है कि खदान में सिर्फ तृणमूल कांग्रेस से जुड़े लोगों को ही रोजगार दिया जा रहा है, जबकि भाजपा समर्थकों को नजरअंदाज किया जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर स्थिति तनावपूर्ण हो गई और कुछ समय के लिए खदान का काम ठप पड़ गया।

⛔ उत्पादन और परिवहन पर असर

प्रदर्शन के कारण कोयला उत्खनन और ट्रांसपोर्ट पूरी तरह बंद हो गया, जिससे न केवल खदान का काम प्रभावित हुआ, बल्कि राज्य की ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ गई।

🏭 WBPDCL की अहम खदान

ताराकोलेयरी, राज्य सरकार की कंपनी पश्चिम बंगाल पावर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (डब्ल्यूबीपीडीसीएल) की एक महत्वपूर्ण ओपनकास्ट खदान है। यहां से हर दिन राज्य के कई ताप विद्युत केंद्रों को कोयला भेजा जाता है। ऐसे में बार-बार व्यवधान से बिजली उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

🚔 प्रशासन का हस्तक्षेप

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और कंपनी के अधिकारी मौके पर पहुंचे। काफी समझाइश और बातचीत के बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया, जिसके बाद कोयला उत्पादन और परिवहन फिर से शुरू कराया गया

🗣️ स्थानीय लोगों की राय

स्थानीय निवासियों का कहना है कि खदान की राजनीति कोई नई बात नहीं है। उनका कहना है कि पहले ऐसे आरोप तृणमूल कांग्रेस पर लगते थे, और अब भाजपा पर भी वही आरोप सामने आ रहे हैं।
लोगों के मुताबिक,
“सत्ता चाहे जिसकी भी हो, लेकिन खदान गेट पर राजनीति और काम रोकने की संस्कृति खत्म नहीं हुई है।”

🔍 आगे क्या?

बार-बार इस तरह के विरोध और काम ठप होने की घटनाएं न केवल स्थानीय रोजगार को प्रभावित कर रही हैं, बल्कि राज्य की ऊर्जा व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ा रही हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो आने वाले समय में इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।

👉 फिलहाल स्थिति सामान्य है, लेकिन जमुड़िया की यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर रही है कि क्या खदानों में काम और राजनीति को अलग किया जा सकेगा?

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