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आसनसोल-दुर्गापुर

नगर निगम चुनाव से पहले फिरहाद हकीम का बड़ा बयान, कहा- अब नगर राजनीति से संन्यास लेने का समय

Moutushi · 25 October 2026, 9:16 AM

कोलकाता, बिकाश चंद्र, सिटी टुडे न्यूज़ : पश्चिम बंगाल में आगामी नगर निगम चुनाव से पहले पूर्व नगर विकास मंत्री और कोलकाता के पूर्व महापौर फिरहाद हकीम के बयान ने नगर राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। फिरहाद हकीम ने कहा है कि अब उनके लिए नगर राजनीति से संन्यास लेने का समय आ गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नगर राजनीति से हटने की बात का अर्थ यह नहीं है कि वह तत्काल पूरी राजनीति छोड़ रहे हैं। उनके बयान के साथ ही आगामी नगर निगम चुनाव में उनकी भूमिका और भविष्य की राजनीतिक योजनाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। <Cite refs={[“turn963034search1″,”turn963034search0”]}/>

फिरहाद हकीम ने क्यों कही संन्यास लेने की बात?

फिरहाद हकीम लगातार दो बार राज्य में नगर विकास विभाग की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। नगर निकायों के कामकाज और स्थानीय नागरिकों की समस्याओं पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि नगर निगम चुनाव का संबंध सीधे जनता को सेवाएं उपलब्ध कराने से है। उनके अनुसार, नगर राजनीति में केवल राजनीतिक समीकरणों को देखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं को समझना और उनका समाधान करना अधिक महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि जब किसी इलाके में जलजमाव होता है, सड़क खराब हो जाती है या स्ट्रीट लाइट काम नहीं करती, तब स्थानीय लोग अपने जनप्रतिनिधियों को तलाशते हैं। ऐसे समय में जनता यह देखती है कि कौन-सा प्रतिनिधि उनकी समस्या के समाधान के लिए आगे आया और किसने उन्हें जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराईं।

उनके इस बयान से स्पष्ट है कि वह नगर राजनीति को जमीनी स्तर पर लोगों की समस्याओं से जुड़ा काम मानते हैं। हालांकि, उन्होंने अपनी उम्र और लगातार सक्रिय रहकर काम करने की चुनौतियों का भी उल्लेख किया।

“एक समय सभी को सेवानिवृत्त होना पड़ता है”

फिरहाद हकीम ने अपने बयान में कहा, “एक समय सभी को सेवानिवृत्त होना पड़ता है। मेरे भी सेवानिवृत्त होने का समय आ गया है। राजनीति से नहीं, बल्कि नगर राजनीति से संन्यास लेने का समय आ गया है।” <Cite refs={[“turn963034search1”]}/>

उनके इस कथन को आगामी नगर निगम चुनाव के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नगर निकायों में जनप्रतिनिधियों की भूमिका केवल चुनाव जीतने तक सीमित नहीं होती। उन्हें स्थानीय नागरिकों की शिकायतें सुननी पड़ती हैं, सड़कों की स्थिति पर ध्यान देना पड़ता है, जलनिकासी की समस्याओं को उठाना पड़ता है और रोशनी जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मामलों में पहल करनी पड़ती है।

फिरहाद हकीम ने संकेत दिया कि युवावस्था में इन समस्याओं को देखने और उनके समाधान के लिए लगातार भागदौड़ करना अपेक्षाकृत आसान होता है, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ यह काम कठिन हो सकता है। उनके बयान में नगर राजनीति की जिम्मेदारियों और लगातार सक्रिय रहने की जरूरत का उल्लेख प्रमुखता से सामने आया।

जलजमाव, खराब सड़क और रोशनी जैसी समस्याओं का किया जिक्र

कोलकाता जैसे बड़े शहर में जलजमाव, सड़क की मरम्मत, जलनिकासी और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाएं नगर प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण विषय हैं। बारिश के दौरान जलजमाव होने पर आम लोगों को आवागमन में परेशानी होती है। खराब सड़कों से यातायात प्रभावित होता है, जबकि अंधेरी सड़कों पर लोगों को आवाजाही में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।

फिरहाद हकीम ने इन्हीं बुनियादी मुद्दों का उदाहरण देते हुए बताया कि नगर राजनीति में जनप्रतिनिधियों से जनता की अपेक्षाएं सीधे तौर पर जुड़ी होती हैं। उनके मुताबिक, स्थानीय चुनावों में लोग उस प्रतिनिधि पर भरोसा करते हैं जिसने उनकी समस्याओं को समझा हो और जरूरत पड़ने पर सहायता के लिए आगे आया हो।

इस दृष्टिकोण से उनका बयान केवल चुनाव लड़ने या न लड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि नगर प्रशासन और नागरिक सेवाओं की भूमिका पर भी ध्यान खींचता है।

आगामी नगर निगम चुनाव में नहीं उतरने का संकेत

फिरहाद हकीम के बयान का सबसे महत्वपूर्ण पहलू आगामी कोलकाता नगर निगम चुनाव से जुड़ा है। हालिया खबरों के अनुसार, उन्होंने आगामी नगर निगम चुनाव में उम्मीदवार नहीं बनने की बात कही है। इसके साथ ही उन्होंने अपनी सक्रिय राजनीतिक भूमिका के भविष्य को लेकर भी संकेत दिए हैं। <Cite refs={[“turn963034search0″,”turn963034search3”]}/>

हालांकि, नगर राजनीति से हटने की घोषणा और पूरी राजनीति से संन्यास लेने के बीच अंतर है। उनके सार्वजनिक बयान में नगर राजनीति से संन्यास लेने की बात कही गई है। इसलिए इसे तत्काल सभी राजनीतिक जिम्मेदारियों से इस्तीफा देने के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।

उनके इस रुख से यह सवाल भी उठ रहा है कि आगामी चुनाव में स्थानीय स्तर पर नए चेहरों को कितनी जगह मिलेगी और नगर निकायों में नेतृत्व की जिम्मेदारी किस तरह आगे बढ़ेगी। इन सवालों पर अंतिम तस्वीर उम्मीदवारों की घोषणा और संबंधित राजनीतिक निर्णयों के बाद ही स्पष्ट होगी।

मदन मित्रा के बयान के बाद चर्चा और तेज

फिरहाद हकीम से पहले मदन मित्रा ने भी राजनीति से दूर होने की संभावना जताई थी। मदन मित्रा ने हाल में कहा था कि वह मौजूदा राजनीतिक माहौल से निराश हैं और सक्रिय राजनीति से धीरे-धीरे हटने के बारे में सोच रहे हैं। हालांकि, उनके बयान को भी तत्काल राजनीति छोड़ने की औपचारिक घोषणा नहीं माना गया था। <Cite refs={[“turn963034search5″,”turn963034search6”]}/>

अब फिरहाद हकीम के नगर राजनीति से संन्यास लेने संबंधी बयान के बाद राजनीतिक हलकों में इस विषय पर चर्चा बढ़ गई है। दोनों नेताओं के बयानों की परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन दोनों ने अपने भविष्य की राजनीतिक भूमिका को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल फिरहाद हकीम के बयान के बाद सबसे अधिक ध्यान आगामी नगर निगम चुनाव में उनकी भूमिका पर है। उनके नगर राजनीति से हटने के संकेतों के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ने पर वह अपने रुख को लेकर क्या स्पष्टता देते हैं।

उनका बयान यह भी याद दिलाता है कि नगर निगम चुनाव में स्थानीय मुद्दे कितने महत्वपूर्ण होते हैं। जलजमाव, सड़क, जलनिकासी और रोशनी जैसी समस्याएं सीधे नागरिकों के दैनिक जीवन को प्रभावित करती हैं। इसलिए किसी भी नगर निकाय के लिए नागरिक सेवाओं की निरंतरता और जवाबदेही अहम रहती है।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि फिरहाद हकीम ने नगर राजनीति से संन्यास लेने की बात कही है और आगामी नगर निगम चुनाव में उम्मीदवार नहीं बनने का संकेत दिया है। उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर आगे की स्थिति उनके अगले सार्वजनिक बयानों और औपचारिक निर्णयों से स्पष्ट होगी।

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