Monday, 31 August 2026
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आसनसोल-दुर्गापुर

दुर्गापुर में नेहरू की मूर्ति हटाने पर सियासी घमासान, कांग्रेस ने दी 24 घंटे की चेतावनी

Moutushi · 31 August 2026, 9:43 AM

दुर्गापुर: पश्चिम बर्दवान के दुर्गापुर में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की मूर्ति हटाए जाने को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। हर्षवर्धन प्राइमरी स्कूल के पास स्थित एक मेडिटेशन सेंटर के सामने लगी नेहरू की प्रतिमा को कथित तौर पर क्रेन की मदद से हटाकर पास के स्कूल परिसर के जंगलनुमा हिस्से में फेंक दिए जाने का आरोप कांग्रेस की ओर से लगाया गया है। घटना सामने आने के बाद इलाके में राजनीतिक माहौल गरमा गया है और कांग्रेस ने मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

कांग्रेस का आरोप है कि प्रतिमा को जिस स्थान पर स्थापित किया गया था, वहां से उसे हटाने का फैसला बिना उचित प्रक्रिया के किया गया। पार्टी का दावा है कि राखी बंधन कार्यक्रम के आयोजन के लिए जगह खाली कराने के उद्देश्य से नेहरू की मूर्ति को वहां से हटाया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले को लेकर पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रतिमा किसके निर्देश पर और किन परिस्थितियों में हटाई गई।

क्रेन की मदद से प्रतिमा हटाने का आरोप

कांग्रेस की ओर से सामने आए आरोपों के मुताबिक, हर्षवर्धन प्राइमरी स्कूल के पास मेडिटेशन सेंटर के सामने स्थापित पंडित जवाहरलाल नेहरू की प्रतिमा को क्रेन की सहायता से हटाया गया। इसके बाद प्रतिमा को कथित तौर पर पास के स्कूल के जंगल वाले हिस्से में रख दिया गया।

घटना की जानकारी सामने आने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नाराजगी फैल गई। पार्टी नेताओं का कहना है कि देश के पहले प्रधानमंत्री और स्वतंत्र भारत के इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नेता की प्रतिमा के साथ इस तरह का व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता।

हालांकि, प्रतिमा हटाने के पीछे वास्तविक कारण क्या था और इसे हटाने की अनुमति किसने दी थी, यह फिलहाल जांच का विषय है।

कांग्रेस ने पुलिस को दिया 24 घंटे का समय

मामले को लेकर कांग्रेस के जिला अध्यक्ष देवेश चक्रवर्ती ने कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से घटना की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।

देवेश चक्रवर्ती ने पुलिस को कार्रवाई के लिए 24 घंटे का समय दिया है। उनका कहना है कि यदि निर्धारित समय के भीतर मामले में उचित कार्रवाई नहीं होती है, तो कांग्रेस की ओर से बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।

कांग्रेस नेता के इस बयान के बाद आने वाले दिनों में मामला और राजनीतिक रूप ले सकता है। पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह केवल एक प्रतिमा को हटाने का मामला नहीं है, बल्कि देश के इतिहास और सार्वजनिक स्मृतियों से जुड़े सम्मान का भी प्रश्न है।

राखी बंधन कार्यक्रम को लेकर उठे सवाल

कांग्रेस ने दावा किया है कि राखी बंधन कार्यक्रम के लिए स्थान तैयार करने के उद्देश्य से प्रतिमा को हटाया गया। पार्टी ने सवाल उठाया है कि यदि किसी सार्वजनिक कार्यक्रम के लिए स्थान की आवश्यकता थी, तो प्रतिमा को हटाने से पहले संबंधित पक्षों और प्रशासन से अनुमति क्यों नहीं ली गई।

वहीं, इस पूरे मामले में कार्यक्रम के आयोजन और प्रतिमा हटाने के बीच वास्तविक संबंध क्या है, यह भी जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल कांग्रेस के आरोपों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।

विधायक ने कांग्रेस के आरोपों को किया खारिज

दूसरी ओर, दुर्गापुर पूर्व के विधायक चंद्रशेखर बंद्योपाध्याय ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मामले में भाजपा पर आरोप लगाने की कोशिश कर रही है।

विधायक के बयान के बाद विवाद ने स्पष्ट रूप से राजनीतिक रंग ले लिया है। एक ओर कांग्रेस प्रतिमा हटाए जाने को लेकर कार्रवाई की मांग कर रही है, वहीं दूसरी ओर विधायक ने आरोपों को स्वीकार करने से इनकार किया है।

इस तरह घटना को लेकर दो अलग-अलग पक्ष सामने आ चुके हैं। अब पुलिस जांच इस विवाद में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

पुलिस जांच से सामने आएगी पूरी तस्वीर

प्रतिमा हटाए जाने के मामले में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इसे किसने हटाया और किसके निर्देश पर हटाया गया। क्या प्रतिमा हटाने के लिए कोई अनुमति ली गई थी, क्या किसी कार्यक्रम के लिए स्थान खाली कराया जा रहा था या इसके पीछे कोई दूसरा कारण था—इन तमाम सवालों के जवाब पुलिस जांच के बाद सामने आने की उम्मीद है।

घटना से जुड़े लोगों से पूछताछ, आसपास मौजूद लोगों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ सकती है। यदि प्रतिमा को बिना अनुमति हटाए जाने की पुष्टि होती है, तो उसके बाद प्रशासनिक या कानूनी स्तर पर क्या कार्रवाई होगी, यह भी जांच के निष्कर्ष पर निर्भर करेगा।

राजनीतिक विवाद बढ़ने के आसार

दुर्गापुर में पहले से ही राजनीतिक गतिविधियां तेज रहने के बीच नेहरू की प्रतिमा को लेकर सामने आया विवाद कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप को और बढ़ा सकता है। कांग्रेस ने जहां 24 घंटे में कार्रवाई की मांग कर आंदोलन की चेतावनी दी है, वहीं विधायक की ओर से आरोपों को खारिज किए जाने के बाद दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी तेज होने की संभावना है।

स्थानीय लोगों की नजर अब पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर स्थापित महापुरुषों की प्रतिमाओं को लेकर प्रशासन को स्पष्ट नियम और पारदर्शी प्रक्रिया अपनानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह के विवाद की स्थिति पैदा न हो।

फिलहाल नेहरू की प्रतिमा कहां और किस स्थिति में रखी गई है, इसे हटाने का आधिकारिक कारण क्या था और इसके लिए किसकी अनुमति ली गई थी, इन सवालों का जवाब सामने आना बाकी है।

दुर्गापुर में नेहरू की मूर्ति को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर पुलिस जांच का विषय बन गया है। आने वाले समय में जांच के निष्कर्ष ही तय करेंगे कि प्रतिमा हटाने की वास्तविक वजह क्या थी और इस मामले में जिम्मेदारी किसकी बनती है।

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