आसनसोल: पश्चिम बंगाल के आसनसोल स्थित बास्तिन बाजार दुर्गा मंदिर में लंबे समय बाद एक बार फिर धार्मिक गतिविधियां शुरू होने से स्थानीय श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल है। मंदिर के कपाट खुलने के बाद यहां सुबह-शाम पूजा-अर्चना और आरती की जा रही है। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है और जय श्रीराम, हर-हर महादेव तथा जय मां दुर्गा के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। मंदिर से जुड़े लोगों का दावा है कि करीब 52 वर्षों के लंबे इंतजार और संघर्ष के बाद मंदिर के कपाट नियमित रूप से खोलने का रास्ता साफ हुआ है। अब समिति की नजर इस वर्ष होने वाली दुर्गापूजा पर है, क्योंकि पूजा अपने 75वें वर्ष में प्रवेश कर रही है।
मंदिर के ट्रस्टी सदस्य संजय अग्रवाल और बास्तिन बाजार दुर्गापूजा सार्वजनीन कमेटी के सदस्य तपन शाहा ने मंदिर के इतिहास, जमीन से जुड़े विवाद और कपाट खुलवाने के लिए किए गए प्रयासों की जानकारी साझा की। उनके अनुसार, यह केवल मंदिर के दरवाजे खुलने का मामला नहीं है, बल्कि वर्षों से चली आ रही धार्मिक परंपरा को नियमित रूप से आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
1952 में शुरू हुई थी बास्तिन बाजार की दुर्गापूजा
संजय अग्रवाल ने बताया कि बास्तिन बाजार में दुर्गापूजा की शुरुआत वर्ष 1952 में हुई थी। इस वर्ष पूजा का 75वां वर्ष मनाया जा रहा है। उनके मुताबिक, समय के साथ मंदिर की जमीन और उससे जुड़े अधिकारों को लेकर दो परिवारों के बीच विवाद पैदा हुआ, जिसके बाद मामला अदालत तक पहुंच गया।
संजय अग्रवाल के अनुसार, बाद में अतीन नारायण चौधरी ने संबंधित जमीन शनि नाम के एक प्रमोटर को बेच दी। इस फैसले का पूजा समिति की ओर से विरोध किया गया। विवाद बढ़ने के बाद मामला प्रशासनिक स्तर पर भी पहुंचा। उस समय पश्चिम बंगाल में माकपा की सरकार थी और आसनसोल महकमा शासक कार्यालय में इस विषय को लेकर बैठक हुई।
उन्होंने बताया कि बैठक में जमीन खरीदने और मंदिर समिति की ओर से उसके संचालन को लेकर सहमति बनी। इसके बाद समिति ने 45 लाख रुपये में 60 दिनों के भीतर जमीन खरीद ली। समिति के अनुसार, जमीन खरीदने के बाद वहां निर्माण कार्य शुरू किया गया, लेकिन इसी दौरान राज्य में राजनीतिक सत्ता परिवर्तन हो गया और ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस की सरकार बनी।
पूजा को लेकर विरोध और लंबे समय तक बंद रहे कपाट
संजय अग्रवाल का आरोप है कि इसके बाद मंदिर में पूजा-अर्चना को लेकर विरोध शुरू हुआ। उनके मुताबिक, कुछ मुस्लिम समुदाय के लोगों ने यहां पूजा किए जाने पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद मंदिर में नियमित पूजा बंद हो गई और कपाट लंबे समय तक नहीं खुल सके। हालांकि, इस पूरे विवाद से जुड़े अलग-अलग पक्षों की बात और प्रशासनिक रिकॉर्ड की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
संजय अग्रवाल ने कहा कि मंदिर को नियमित रूप से खोलने के लिए समिति ने लगातार प्रयास किए। उनका आरोप है कि कुछ राजनीतिक नेताओं ने इस मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया, जिसके कारण समाधान में देरी हुई। उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय तक मंदिर के कपाट बंद रहने के बावजूद समिति ने अपनी मांग उठाना जारी रखा।
उन्होंने एक दिलचस्प बात साझा करते हुए कहा कि जिन युवकों ने पहले मंदिर खोलने का विरोध किया था, आज वह उनका भी धन्यवाद करते हैं। उनके अनुसार, लंबे विवाद के कारण आसनसोल ही नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल और देश के अन्य हिस्सों तक इस मंदिर की स्थिति की जानकारी पहुंची।
विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी ने किया था कपाट खुलवाने का वादा
संजय अग्रवाल ने बताया कि चुनाव से पहले विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी ने मंदिर के कपाट खुलवाने का आश्वासन दिया था। उनके मुताबिक, विधायक ने कहा था कि चुनाव जीतने के बाद मंदिर को खोलने की दिशा में कदम उठाया जाएगा।
संजय अग्रवाल के अनुसार, चुनाव परिणाम आने के बाद महीने की 4 तारीख को शाम करीब 4 बजे मंदिर के कपाट खोल दिए गए। इसके लिए उन्होंने विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी और राज्य में नई सरकार का आभार जताया। मंदिर खुलने के बाद श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया और अब यहां नियमित रूप से सुबह तथा शाम पूजा-अर्चना की जा रही है।
कपाट खुलने के बाद मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली। समिति के सदस्य तपन शाहा ने बताया कि लोगों का उत्साह इतना अधिक था कि भीड़ को संभालना भी चुनौती बन गया था। इस दौरान जय श्रीराम, हर-हर महादेव और जय मां दुर्गा के नारे लगाए गए तथा भजन-कीर्तन और आरती का आयोजन हुआ।
75वें वर्ष में कमल थीम पर बनेगा भव्य पंडाल
बास्तिन बाजार दुर्गापूजा इस बार अपने 75वें वर्ष में प्रवेश कर रही है। इस खास अवसर को यादगार बनाने के लिए समिति की ओर से विशेष तैयारियां की जा रही हैं। संजय अग्रवाल ने बताया कि इस वर्ष पूजा पंडाल की थीम कमल का फूल रखी गई है। इसी विषय को ध्यान में रखकर पंडाल तैयार किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस आयोजन में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को भी आमंत्रित करने की इच्छा है। इसके लिए विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी के माध्यम से आवेदन किए जाने की बात कही गई है। समिति का प्रयास है कि 75वें वर्ष का आयोजन भव्य तरीके से धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हो।
कालीपूजा के बाद मंदिर के विस्तार की योजना
संजय अग्रवाल ने आगे बताया कि कालीपूजा के बाद मंदिर को बड़े स्वरूप में तैयार करने की योजना है। इसके बाद मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा से जुड़ी धार्मिक प्रक्रिया आयोजित करने की तैयारी की जाएगी। समिति चाहती है कि मंदिर का विकास इस तरह हो कि श्रद्धालुओं को नियमित पूजा और दर्शन के लिए बेहतर व्यवस्था मिल सके।
वहीं, कमेटी सदस्य तपन शाहा ने बताया कि वर्ष 1952 से यहां दुर्गापूजा होती आ रही है। उनके अनुसार, पहले दुर्गापूजा के अवसर पर मंदिर के दरवाजे खोले जाते थे, लेकिन साल के बाकी समय कपाट बंद रहते थे। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान मंदिर को स्थायी रूप से खोलने में अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने का आरोप लगाया। तपन शाहा ने कहा कि अब मंदिर खुलने के बाद भजन और आरती शुरू हो गई है तथा श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है।
आस्था और आयोजन को लेकर बढ़ी उम्मीदें
बास्तिन बाजार दुर्गा मंदिर में नियमित पूजा शुरू होने और 75वें वर्ष की दुर्गापूजा की तैयारी ने स्थानीय स्तर पर नई चर्चा शुरू कर दी है। समिति के सामने अब मंदिर की नियमित व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधा और आगामी पूजा आयोजन को सफल बनाने की जिम्मेदारी है।
1952 में शुरू हुई परंपरा के 75वें वर्ष में प्रवेश के साथ कमल थीम पर पंडाल निर्माण और मंदिर के विस्तार की योजना इस आयोजन को विशेष बनाने की तैयारी है। लंबे समय से बंद कपाट खुलने के बाद अब श्रद्धालुओं की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आगामी दुर्गापूजा किस भव्यता के साथ आयोजित होती है।




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