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आसनसोल-दुर्गापुर

आसनसोल में रेलवे क्वार्टरों में रहने वालों को आखिरी चेतावनी, आरपीएफ ने माइकिंग कर जल्द खाली करने का दिया आदेश

Moutushi · 31 October 2026, 4:13 PM

आसनसोल, बिकाश चंद्र, सिटी टुडे न्यूज़: आसनसोल के महुआडांगा इलाके में रेलवे के क्षतिग्रस्त और जर्जर क्वार्टरों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। रेलवे प्रशासन ने इन क्वार्टरों को खाली कराने के लिए अब सख्त रुख अपनाया है। शुक्रवार सुबह आसनसोल ईस्ट पोस्ट के रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के अधिकारियों ने इलाके में माइकिंग कर लोगों को जल्द से जल्द मकान खाली करने का निर्देश दिया। अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि यह अंतिम चेतावनी है और इसके बाद भी यदि लोग क्वार्टर खाली नहीं करते हैं, तो रेलवे प्रशासन और आरपीएफ की ओर से उन्हें खाली कराने के लिए कार्रवाई की जाएगी।

सुबह-सुबह आरपीएफ अधिकारियों की मौजूदगी और माइकिंग से महुआडांगा इलाके में हलचल देखने को मिली। अधिकारी केवल एक स्थान पर खड़े होकर घोषणा करने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि इलाके में घूम-घूमकर क्षतिग्रस्त क्वार्टरों में रहने वाले लोगों को मकान खाली करने की हिदायत देते नजर आए। इस दौरान लोगों को बताया गया कि रेलवे के ये आवास लंबे समय से जर्जर स्थिति में हैं और इनमें रहना सुरक्षित नहीं माना जा रहा है।

माइकिंग कर लोगों को दी गई अंतिम चेतावनी

रेलवे सुरक्षा बल की ओर से की गई घोषणा में लोगों को साफ संदेश दिया गया कि वे बिना देर किए क्षतिग्रस्त क्वार्टर खाली कर दें। आरपीएफ अधिकारियों ने कहा कि पहले भी इन मकानों की स्थिति को लेकर चिंता जताई गई है, लेकिन अब रेलवे प्रशासन ने इन्हें खाली कराने का निर्णय लिया है। इसलिए लोगों को इस चेतावनी को गंभीरता से लेना चाहिए।

अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि चेतावनी के बावजूद लोग इन क्वार्टरों में बने रहते हैं, तो रेलवे और आरपीएफ की ओर से आवश्यक कार्रवाई करते हुए मकान खाली कराए जाएंगे। इस घोषणा के बाद इलाके में रहने वाले परिवारों के सामने अपने सामान और रहने की वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। हालांकि, फिलहाल प्रशासन की ओर से लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित स्थान पर जाने का निर्देश दिया गया है।

लंबे समय से जर्जर हैं रेलवे के क्वार्टर

रेलवे प्रशासन का कहना है कि महुआडांगा इलाके के संबंधित क्वार्टर लंबे समय से खराब और जर्जर अवस्था में हैं। पुराने भवनों की दीवारों, छतों और अन्य हिस्सों की स्थिति समय के साथ कमजोर हो सकती है। ऐसी इमारतों में लगातार रहना वहां रहने वाले परिवारों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता अधिक रहती है।

रेलवे प्रशासन के अनुसार, इन मकानों में किसी भी समय बड़ी दुर्घटना होने की आशंका बनी हुई है। भवन का कोई हिस्सा अचानक टूटकर गिरने या अन्य संरचनात्मक नुकसान होने की स्थिति में जान-माल का खतरा पैदा हो सकता है। इसी आशंका को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने इन क्वार्टरों को खाली कराने का फैसला लिया है। प्रशासन का दावा है कि यह कदम किसी को परेशान करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया जा रहा है।

जबरन खाली कराने की कार्रवाई की चेतावनी

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आरपीएफ ने इसे अंतिम चेतावनी बताया है। यानी रेलवे प्रशासन अब केवल मौखिक अपील तक सीमित नहीं रहना चाहता। यदि लोग निर्धारित निर्देशों के बावजूद क्वार्टर खाली नहीं करते हैं, तो आगे बलपूर्वक खाली कराने की कार्रवाई की जा सकती है।

हालांकि, ऐसी कार्रवाई के दौरान प्रभावित परिवारों के सामान, उनके रहने की व्यवस्था और अन्य मानवीय पहलुओं का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण होगा। जर्जर भवनों को खाली कराना सुरक्षा की दृष्टि से जरूरी हो सकता है, लेकिन लंबे समय से वहां रह रहे परिवारों के लिए अचानक मकान छोड़ना आसान नहीं होता। कई परिवारों के सामने नए स्थान पर रहने, सामान स्थानांतरित करने और दैनिक जीवन को व्यवस्थित करने जैसी चुनौतियां हो सकती हैं।

सुरक्षा और पुनर्वास को लेकर लोगों की चिंता

महुआडांगा के क्षतिग्रस्त रेलवे क्वार्टरों में रहने वाले लोगों के लिए यह मामला केवल मकान खाली करने के निर्देश तक सीमित नहीं है। उनके सामने यह भी सवाल है कि वे अपने परिवार के साथ कहां जाएंगे और वैकल्पिक आवास की व्यवस्था कैसे करेंगे। विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए अचानक दूसरी जगह रहने का इंतजाम करना कठिन हो सकता है।

ऐसे में रेलवे प्रशासन की ओर से सुरक्षा संबंधी निर्देशों के साथ-साथ प्रभावित लोगों को आवश्यक जानकारी और उचित समय उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि भवन वास्तव में रहने के लिहाज से खतरनाक स्थिति में हैं, तो वहां से लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना प्राथमिकता होनी चाहिए। वहीं, कार्रवाई के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था या विवाद की स्थिति न बने, इसके लिए भी प्रशासनिक समन्वय जरूरी होगा।

अब आगे क्या कदम उठाएंगे क्वार्टरों में रहने वाले लोग?

शुक्रवार सुबह की माइकिंग के बाद अब महुआडांगा इलाके के लोगों के सामने रेलवे प्रशासन के निर्देशों का पालन करने का सवाल है। आरपीएफ ने साफ कर दिया है कि चेतावनी के बाद भी क्वार्टर खाली नहीं किए गए तो जबरन खाली कराने की कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में आने वाले दिनों में रेलवे प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजर रहेगी।

फिलहाल रेलवे की ओर से इन क्षतिग्रस्त क्वार्टरों को खाली कराने के पीछे मुख्य वजह भवनों की जर्जर स्थिति और संभावित दुर्घटना का खतरा बताया गया है। अब देखना होगा कि अंतिम चेतावनी के बाद वहां रहने वाले परिवार कितनी जल्दी मकान खाली करते हैं और रेलवे प्रशासन इस प्रक्रिया को किस तरह आगे बढ़ाता है।

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