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आसनसोल-दुर्गापुर

आसनसोल में 73वें वर्ष में राधानगर रोड एथलेटिक क्लब की दुर्गापूजा, ‘कैलाश पर मां’ थीम बनेगी आकर्षण

Moutushi · 17 October 2026, 5:43 PM

आसनसोल: पश्चिम बंगाल के औद्योगिक शहर आसनसोल में दुर्गापूजा को लेकर उत्साह बढ़ने लगा है। शहर के राधानगर इलाके में स्थित राधानगर रोड एथलेटिक क्लब इस वर्ष अपने दुर्गोत्सव के 73वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। इस बार पूजा की मुख्य थीम ‘कैलाश पर मां’ रखी गई है। इसी धार्मिक कल्पना को आधार बनाकर पूजा मंडप को एक काल्पनिक मंदिर का स्वरूप देने की तैयारी की गई है। मंडप में मां दुर्गा की उपस्थिति के साथ कैलाश पर्वत के वातावरण और भगवान शिव से जुड़े धार्मिक प्रतीकों को कलात्मक ढंग से प्रस्तुत करने की योजना है। लगभग सात दशक पुरानी परंपरा और नई रचनात्मक सोच का यह मेल इस पूजा को विशेष पहचान देने की तैयारी में है।

‘कैलाश पर मां’ की अवधारणा पर तैयार होगा मंडप

राधानगर रोड एथलेटिक क्लब की इस वर्ष की पूजा का मुख्य आकर्षण उसकी विषयवस्तु है। ‘कैलाश पर मां’ नाम से तैयार की जा रही थीम में देवी दुर्गा को कैलाश के दिव्य वातावरण से जोड़कर दिखाने की कल्पना की गई है। मंडप को एक काल्पनिक मंदिर की तर्ज पर तैयार किया जा रहा है, जिसमें धार्मिक आस्था और कलात्मक सजावट का समन्वय देखने को मिलेगा।

कैलाश पर्वत को भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है। इसी धार्मिक मान्यता को ध्यान में रखते हुए मंडप की सजावट में शिव और मां दुर्गा से जुड़े प्रतीकों को प्रमुखता देने की योजना बनाई गई है। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को पूजा मंडप में प्रवेश करते ही एक अलग धार्मिक वातावरण का अनुभव कराना है।

दुर्गापूजा के दौरान विषय आधारित मंडप लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनते हैं। इनमें धार्मिक कथाओं, पौराणिक प्रसंगों और वास्तुकला की कल्पनाओं को सजावट के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है। राधानगर रोड एथलेटिक क्लब की इस वर्ष की अवधारणा भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास है।

प्रवेश द्वार पर स्थापित होगी नंदी की प्रतिमा

इस पूजा मंडप के प्रवेश द्वार को भी विशेष रूप देने की योजना है। जानकारी के अनुसार, प्रवेश द्वार के ऊपर नंदी की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। भगवान शिव के वाहन के रूप में पूजे जाने वाले नंदी का धार्मिक महत्व है और उनकी प्रतिमा कैलाश से जुड़ी अवधारणा को और प्रभावशाली बनाने में मदद करेगी।

मंडप की समग्र बनावट में मंदिर की स्थापत्य शैली और धार्मिक प्रतीकों को शामिल करने की योजना है। प्रवेश द्वार से लेकर अंदरूनी सजावट तक थीम के अनुरूप दृश्य तैयार किए जाएंगे, ताकि मंडप का स्वरूप एक काल्पनिक धार्मिक परिसर जैसा दिखाई दे।

इस तरह की सजावट में केवल प्रतिमाओं का प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि उनके बीच सामंजस्य स्थापित करना भी महत्वपूर्ण होता है। अलग-अलग धार्मिक प्रतीकों को एक ही विषयवस्तु के अंतर्गत प्रस्तुत करने से मंडप की कलात्मक पहचान मजबूत होती है। क्लब की तैयारी इसी विचार पर आधारित है।

विष्णु, शिव, काली और सरस्वती सहित कई देवी-देवताओं की झलक

राधानगर रोड एथलेटिक क्लब की पूजा में इस बार विभिन्न देवी-देवताओं की प्रतिमाओं और धार्मिक तत्वों को भी शामिल करने की योजना बनाई गई है। प्रस्तावित सजावट में विष्णु, शिव, काली, गणेश, श्मशान काली, नारायण और सरस्वती सहित विभिन्न देवी-देवताओं से जुड़े स्वरूप प्रदर्शित किए जाएंगे।

इन धार्मिक प्रतीकों के माध्यम से मंडप को अधिक व्यापक और आकर्षक रूप देने की तैयारी है। अलग-अलग देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भारतीय धार्मिक परंपराओं की विविधता को सामने लाएंगी। साथ ही, प्राचीन वास्तुकला और मूर्तिकला से प्रेरित सजावट मंडप के स्वरूप को विशेष बनाने में भूमिका निभाएगी।

प्राचीन भारतीय मंदिरों की बनावट, प्रतिमाओं की बारीकियां और धार्मिक कलाकृतियां लंबे समय से पूजा मंडपों की सजावट के लिए प्रेरणा का स्रोत रही हैं। इस वर्ष की थीम में भी इन तत्वों को शामिल करने की योजना है, ताकि श्रद्धालुओं को धार्मिक आस्था के साथ कलात्मक प्रस्तुति का अनुभव मिल सके।

25 फीट की ऊंचाई से झरने का विशेष आकर्षण

इस वर्ष के मंडप की एक और खास विशेषता लगभग 25 फीट की ऊंचाई से झरना बहाने की व्यवस्था है। इस झरने को मंडप की समग्र थीम के अनुरूप प्रस्तुत करने की योजना बनाई गई है। कैलाश पर्वत की प्राकृतिक कल्पना और धार्मिक वातावरण के साथ जलधारा का दृश्य मंडप को अलग पहचान दे सकता है।

ऊंचाई से बहते झरने का दृश्य सजावट में प्राकृतिक वातावरण का एहसास पैदा कर सकता है। यदि इसे प्रकाश व्यवस्था और आसपास की कलात्मक संरचनाओं के साथ समन्वित किया जाता है, तो श्रद्धालुओं के लिए यह एक खास दृश्य अनुभव बन सकता है।

हालांकि, झरने की अंतिम सजावट और प्रकाश व्यवस्था के बारे में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, लगभग 25 फीट की ऊंचाई से जलधारा की व्यवस्था इस वर्ष के आयोजन की प्रमुख विशेषताओं में शामिल है।

73 वर्षों की परंपरा को आगे बढ़ाने की तैयारी

राधानगर रोड एथलेटिक क्लब की दुर्गापूजा लगभग 73 वर्षों की परंपरा को आगे बढ़ा रही है। इतने लंबे समय से आयोजित होने वाला यह उत्सव स्थानीय धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।

क्लब की ओर से हर वर्ष नई कल्पना और अनूठी सजावट के माध्यम से श्रद्धालुओं के सामने कुछ अलग प्रस्तुत करने का प्रयास किया जाता है। इस बार भी ‘कैलाश पर मां’ की अवधारणा के जरिए पुरानी परंपरा को नए कलात्मक रूप में प्रस्तुत करने की तैयारी है।

दुर्गापूजा पश्चिम बंगाल में केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामुदायिक सहभागिता और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का बड़ा अवसर है। पूजा मंडपों के निर्माण और सजावट में कलाकारों, कारीगरों तथा आयोजकों की मेहनत शामिल होती है। स्थानीय लोगों के लिए भी यह उत्सव एक साथ आने और अपनी परंपराओं से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है।

राधानगर रोड और चित्रा सिनेमा हॉल के पास रहेगा पूजा मंडप

राधानगर रोड एथलेटिक क्लब का पूजा मंडप राधानगर रोड और चित्रा सिनेमा हॉल के निकट स्थित है। इस स्थान पर दुर्गापूजा के दौरान श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। विषय आधारित सजावट, विभिन्न देवी-देवताओं की प्रतिमाएं और झरने की व्यवस्था लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकती हैं।

पूजा घूमने की योजना बनाने वाले लोगों के लिए मंडप की थीम जानना उपयोगी होगा। हालांकि, दर्शन के समय, यातायात व्यवस्था और आयोजन से संबंधित अन्य जानकारियों की पुष्टि स्थानीय आयोजकों की ओर से जारी सूचना के आधार पर की जानी चाहिए।

धार्मिक आस्था और कलात्मक कल्पना का संगम

कुल मिलाकर, राधानगर रोड एथलेटिक क्लब का 73वां दुर्गोत्सव अपनी पुरानी परंपरा और नई रचनात्मक कल्पना के मेल के साथ खास बनने की तैयारी में है। ‘कैलाश पर मां’ की थीम, प्रवेश द्वार पर नंदी की प्रतिमा, विभिन्न देवी-देवताओं की झलक और लगभग 25 फीट ऊंचाई से बहने वाला झरना इस वर्ष के मंडप की प्रमुख विशेषताएं होंगी।

आसनसोल में दुर्गापूजा के उत्सवी माहौल के बीच यह आयोजन धार्मिक आस्था, प्राचीन कला और आधुनिक मंडप सजावट के समन्वय को सामने लाने का प्रयास है। अब श्रद्धालुओं की नजरें इस बात पर रहेंगी कि तैयार होने के बाद यह काल्पनिक कैलाश मंदिर किस तरह अपनी कलात्मक प्रस्तुति से लोगों को आकर्षित करता है।

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