आसनसोल: पश्चिम बंगाल के औद्योगिक शहर आसनसोल में चुनाव परिणाम के बाद पोस्ट पोल हिंसा को लेकर सियासी माहौल पूरी तरह गर्म हो गया है। आरोप-प्रत्यारोप के बीच कृष्णेन्दु मुखर्जी, जो आसनसोल उत्तर से नवनिर्वाचित भाजपा विधायक हैं, ने एक वीडियो संदेश जारी कर बड़ा बयान दिया है।
⚠️ “भगवा बनकर बदनाम करने की साजिश”
👉 कृष्णेन्दु मुखर्जी ने आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्व
👉 भगवा अबीर-गुलाल लगाकर और हाथों में भाजपा का झंडा लेकर
👉 हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं
➡️ उनका दावा है कि यह सब भाजपा को बदनाम करने की सुनियोजित साजिश है
🕊️ शांति बनाए रखने की अपील
👉 विधायक ने लोगों से शांति और अमन बनाए रखने की अपील की
👉 उन्होंने कहा कि भाजपा पुलिस और जिला प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रही है
👉 सभी कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने और हर गतिविधि पर नजर रखने का निर्देश दिया गया है
🔥 तृणमूल पर सीधे आरोप
👉 कृष्णेन्दु मुखर्जी ने आरोप लगाया कि यह साजिश तृणमूल कांग्रेस से जुड़े लोगों की हो सकती है
👉 उन्होंने कहा कि जो लोग पहले भाजपा कार्यालयों के आसपास भी नहीं दिखते थे
👉 वही अब भगवा पहनकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं
🗣️ तृणमूल नेताओं के ज्ञापन पर प्रतिक्रिया
👉 मलय घटक, हरेराम सिंह, नरेंद्र नाथ चक्रवर्ती और बिधान उपाध्याय द्वारा पुलिस कमिश्नर को दिए गए ज्ञापन पर प्रतिक्रिया देते हुए
👉 मुखर्जी ने कहा कि तृणमूल भाजपा पर आरोप लगा रही है, लेकिन 2021 की हिंसा को भूल गई है
🚔 रातभर सड़कों पर विधायक, सुरक्षा का दावा
👉 विधायक ने बताया कि वे खुद पूरी रात कार्यकर्ताओं के साथ क्षेत्र में भ्रमण कर रहे हैं
👉 कुल्टी के भाजपा विधायक डॉ. अजय पोद्दार भी घटनास्थलों का दौरा कर रहे हैं
👉 पुलिस और केंद्रीय बलों की मदद से प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई जा रही है
🏢 कब्जाए गए कार्यालयों को कराया जा रहा मुक्त
👉 भाजपा का दावा है कि जिन पार्टी कार्यालयों पर कब्जा किया गया था
👉 उन्हें मुक्त कराकर दोबारा कार्यकर्ताओं को सौंपा जा रहा है
😢 पीड़ित कार्यकर्ताओं का मुद्दा
👉 मुखर्जी ने कहा कि पिछले चुनावों में भाजपा के कई कार्यकर्ता हिंसा के शिकार हुए
👉 कुछ ने अपनी जान भी गंवाई
👉 कई कार्यकर्ता अभी भी डर के कारण घर नहीं लौट पाए हैं
➡️ उन्होंने आश्वासन दिया कि ऐसे कार्यकर्ताओं को सम्मानपूर्वक वापस लाया जाएगा
🔚 निष्कर्ष:
आसनसोल में पोस्ट पोल हिंसा—
👉 सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि राजनीतिक टकराव का बड़ा केंद्र बन चुका है
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन और राजनीतिक दल मिलकर हालात को शांत कर पाएंगे, या सियासी टकराव और बढ़ेगा?















