आसनसोल, बिकाश चंद्र, सिटी टुडे न्यूज़: पश्चिम बर्दवान जिले के आसनसोल स्थित लाइफलाइन अस्पताल में सोमवार को काम के घंटों और अस्थायी कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर बड़ा विवाद सामने आया। अस्पताल के करीब 150 अस्थायी कर्मचारियों ने मुख्य द्वार के सामने धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का आरोप है कि अस्पताल में उनसे पहले निर्धारित आठ घंटे के बजाय अब 12 घंटे काम करने का दबाव बनाया जा रहा है। जब कर्मचारियों ने इस फैसले का विरोध किया, तो उनकी जगह दूसरी एजेंसी के माध्यम से नए लोगों को नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इसी फैसले से नाराज होकर बड़ी संख्या में पुराने कर्मचारी अस्पताल के मुख्य गेट पर एकत्रित हुए और अपनी मांगों को लेकर विरोध जताया।
सोमवार को अचानक बड़ी संख्या में कर्मचारियों के प्रदर्शन के कारण अस्पताल के मुख्य द्वार के सामने तनावपूर्ण माहौल बन गया। प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों ने प्रबंधन और संबंधित एजेंसी के फैसले पर नाराजगी जताते हुए काम के निर्धारित घंटों का पालन करने की मांग उठाई। उनका कहना है कि लंबे समय से अस्पताल में काम करने के बावजूद अब उनके रोजगार पर संकट खड़ा हो गया है।
आठ घंटे की जगह 12 घंटे ड्यूटी कराने का आरोप
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों में दीपाली और किशन बावरी सहित कई लोगों ने अपनी परेशानी सामने रखी। उनका आरोप है कि वे लंबे समय से लाइफलाइन अस्पताल में अस्थायी कर्मचारी के रूप में काम कर रहे हैं। पहले उनसे आठ घंटे की ड्यूटी ली जाती थी, लेकिन अब अचानक कार्य अवधि बढ़ाकर 12 घंटे करने की बात कही जा रही है।
कर्मचारियों का कहना है कि 12 घंटे लगातार काम करने का फैसला उनके लिए परेशानी का कारण बन सकता है। उनका सवाल है कि जब वे पहले से निर्धारित कार्य अवधि के अनुसार अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे थे, तो अब अचानक अतिरिक्त चार घंटे काम करने का दबाव क्यों बनाया जा रहा है?
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, उन्होंने इस बदलाव पर आपत्ति जताई और आठ घंटे की ड्यूटी जारी रखने की मांग की। लेकिन उनका आरोप है कि विरोध करने के बाद उनकी जगह दूसरी एजेंसी के जरिए नए कर्मचारियों को काम पर रखने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इससे पुराने कर्मचारियों के बीच नौकरी चले जाने की आशंका और नाराजगी दोनों बढ़ गईं।
दूसरी एजेंसी से नए कर्मचारियों की नियुक्ति पर विवाद
इस पूरे विवाद का एक बड़ा कारण पुरानी व्यवस्था के कर्मचारियों की जगह दूसरी एजेंसी के माध्यम से नए लोगों को नियुक्त करने का आरोप भी है। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने लंबे समय तक अस्पताल में अपनी सेवाएं दी हैं। ऐसे में उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय नए कर्मचारियों को लाने की प्रक्रिया शुरू करना उचित नहीं है।
कर्मचारियों के अनुसार, यदि काम के घंटों में बदलाव करना है तो इसके संबंध में स्पष्ट जानकारी और उचित प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। अचानक 12 घंटे की ड्यूटी का दबाव बनाना और विरोध करने वालों की जगह नए लोगों को रखने की कोशिश करना उनके साथ अन्याय है।
हालांकि, अस्पताल प्रबंधन और संबंधित एजेंसी की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है। इसलिए कर्मचारियों द्वारा लगाए गए आरोपों और नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ी वास्तविक स्थिति स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है।
पुराने और नए कर्मचारियों के बीच धक्का-मुक्की, बढ़ा तनाव
सोमवार को जब बड़ी संख्या में पुराने अस्थायी कर्मचारी अस्पताल के मुख्य द्वार पर जमा होकर धरना देने लगे, तब वहां स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। इस दौरान पुराने और नए कर्मचारियों के बीच धक्का-मुक्की जैसी स्थिति भी देखने को मिली।
दोनों पक्षों के बीच बढ़ते तनाव के कारण अस्पताल परिसर के बाहर हंगामे का माहौल बन गया। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे, जबकि नए कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर विवाद भी जारी रहा। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान के बाहर इस तरह की स्थिति बनने से मरीजों और उनके परिजनों के बीच भी परेशानी की आशंका पैदा हुई।
सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस
घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। पुलिस ने अस्पताल के मुख्य द्वार के सामने बने तनावपूर्ण माहौल को संभालने की कोशिश की। हालांकि, पुलिस की मौजूदगी के बावजूद कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन जारी रहा।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब तक उनकी मांगों पर उचित विचार नहीं किया जाता, तब तक वे अपनी आवाज उठाते रहेंगे। वे चाहते हैं कि अस्पताल प्रबंधन और संबंधित एजेंसी उनके साथ बातचीत कर समस्या का समाधान निकाले।

कर्मचारियों की मांग- नियमों के अनुसार ही कराई जाए ड्यूटी
प्रदर्शन कर रहे लगभग 150 अस्थायी कर्मचारियों की मुख्य मांग है कि उनसे सरकारी नियमों और निर्धारित कार्य अवधि के अनुसार ही काम लिया जाए। उनका कहना है कि आठ घंटे की जगह 12 घंटे काम कराने का दबाव स्वीकार नहीं किया जाएगा।
इसके साथ ही कर्मचारियों ने अपनी नौकरी की सुरक्षा और दूसरी एजेंसी के माध्यम से नए लोगों की नियुक्ति को लेकर भी चिंता जताई। उनका मानना है कि लंबे समय से अस्पताल में काम कर रहे कर्मचारियों की समस्याओं को पहले सुना जाना चाहिए और उनकी सहमति तथा लागू नियमों को ध्यान में रखकर ही कोई बदलाव किया जाना चाहिए।
प्रबंधन के फैसले पर टिकी सबकी निगाहें
आसनसोल लाइफलाइन अस्पताल में सामने आया यह विवाद अब केवल ड्यूटी के चार अतिरिक्त घंटों तक सीमित नहीं रह गया है। इसके साथ अस्थायी कर्मचारियों के रोजगार की सुरक्षा, एजेंसी के माध्यम से नियुक्ति और कार्यस्थल पर उचित व्यवहार जैसे सवाल भी जुड़ गए हैं।
फिलहाल अस्पताल के मुख्य द्वार के सामने कर्मचारियों के प्रदर्शन के कारण माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। अब देखना होगा कि अस्पताल प्रबंधन और संबंधित एजेंसी कर्मचारियों की मांगों पर क्या कदम उठाते हैं और बातचीत के जरिए इस विवाद का समाधान निकल पाता है या नहीं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या लंबे समय से अस्पताल में काम कर रहे इन 150 अस्थायी कर्मचारियों को उनकी मांगों के अनुरूप राहत मिल पाएगी?




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