आसनसोल में मजदूर दिवस पर गरजा वाम मोर्चा—श्रम कानूनों के खिलाफ बुलंद आवाज

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आसनसोल: अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस (1 मई) के अवसर पर आसनसोल में वाम मोर्चा की ओर से भव्य कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जहां मजदूरों के अधिकारों और उनकी वर्तमान स्थिति को लेकर जोरदार आवाज उठाई गई। इस दौरान बड़ी संख्या में वामपंथी कार्यकर्ता, श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधि और स्थानीय लोग मौजूद रहे।

🚩 मजदूरों के मुद्दों पर गरजी सभा

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था—
👉 मजदूरों के अधिकारों पर चर्चा
👉 रोजगार की अस्थिरता और वेतन की समस्या
👉 सामाजिक सुरक्षा और श्रम कानूनों की स्थिति

सभा में वक्ताओं ने कहा कि—
➡️ देश के विकास में मजदूरों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है
➡️ लेकिन आज वही वर्ग सबसे ज्यादा असुरक्षित और दबाव में है

🗣️ लेबर कोड पर तीखा हमला

सभा में प्रमुख वक्ता पार्थ मुखर्जी ने केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए श्रम कानूनों पर जमकर निशाना साधा।

👉 उन्होंने कहा—
➡️ नए लेबर कोड “मजदूर विरोधी” हैं
➡️ इससे कंपनियों को ज्यादा छूट मिलेगी
➡️ मजदूरों के अधिकार कमजोर होंगे

👉 उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि—
➡️ काम के घंटे, सुरक्षा और सामाजिक लाभ प्रभावित होंगे
➡️ मजदूरों की आवाज को दबाने की कोशिश हो रही है

“लड़ाई जारी रहेगी”—आंदोलन का ऐलान

पार्थ मुखर्जी ने साफ कहा—
👉 वामपंथी दल और श्रमिक संगठन इस मुद्दे पर आंदोलन जारी रखेंगे
👉 मजदूरों को एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए आगे आना होगा

📢 अन्य नेताओं का भी सरकार पर हमला

सभा में मौजूद अन्य नेताओं ने भी केंद्र सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की।

👉 उनका कहना था—
➡️ मजदूरों के हितों की अनदेखी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगी
➡️ मजदूर दिवस सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि संघर्ष का प्रतीक है

🔊 नारेबाजी से गूंजा माहौल

कार्यक्रम के दौरान—
👉 मजदूर एकता के समर्थन में नारे लगाए गए
👉 श्रम कानूनों में बदलाव की मांग उठाई गई

➡️ पूरे क्षेत्र में एकता और संघर्ष का संदेश दिया गया

आने वाले समय में आंदोलन होगा तेज

नेताओं ने संकेत दिया कि—
👉 आने वाले दिनों में मजदूरों के मुद्दों को लेकर आंदोलन और तेज किया जाएगा
👉 बड़े स्तर पर प्रदर्शन और विरोध की तैयारी है

🔚 निष्कर्ष:

आसनसोल में मनाया गया मजदूर दिवस सिर्फ एक औपचारिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह मजदूरों के हक और अधिकारों की लड़ाई का बड़ा मंच बन गया।

👉 बढ़ती महंगाई
👉 रोजगार की अनिश्चितता
👉 नए श्रम कानूनों का विरोध

इन सबके बीच साफ है—मजदूरों की आवाज अब और बुलंद होने वाली है! 🚩

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