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आसनसोल का बेटा दीपक साह बना देश का वीर, एक करोड़ के इनामी नक्सली विवेक के खिलाफ ऑपरेशन में दिखाई बहादुरी

Moutushi · 18 August 2026, 2:32 PM

आसनसोल के बेटे की बहादुरी को देश का सलाम

आसनसोल के लिए यह गर्व का क्षण है। शहर के नमो पाड़ा क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले दीपक साह को देश के प्रतिष्ठित वीरता सम्मान शौर्य चक्र से सम्मानित किया जाएगा। दीपक साह केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की 209 कोबरा बटालियन में कॉन्स्टेबल (जीडी) के रूप में तैनात हैं। उन्होंने 21 अप्रैल 2025 को झारखंड के बोकारो जिले के लुगुबुरु जंगल क्षेत्र में हुए एक बड़े नक्सल-विरोधी अभियान के दौरान असाधारण साहस का परिचय दिया था।

इस अभियान में सुरक्षा बलों ने एक करोड़ रुपये के इनामी भाकपा (माओवादी) केंद्रीय समिति सदस्य प्रयाग मांझी उर्फ विवेक समेत आठ नक्सलियों को मार गिराया था। अब स्वतंत्रता दिवस 2026 के अवसर पर राष्ट्रपति की ओर से घोषित वीरता पुरस्कारों में दीपक साह का नाम शौर्य चक्र के लिए सामने आने के बाद आसनसोल में खुशी और गर्व का माहौल है।

आसनसोल से शुरू हुआ था दीपक का सफर

दीपक साह के परिवार के लिए यह सम्मान बेहद भावुक कर देने वाला है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनके पिता का नाम अशोक साह और माता का नाम रिंकू साह है। दीपक ने सेंट जोसेफ हाई स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। वर्ष 2017 में उन्होंने सीआरपीएफ की सेवा में कदम रखा

एक सामान्य परिवार से निकलकर देश की सुरक्षा के लिए जिम्मेदारी संभालने वाले दीपक ने अपने सेवाकाल में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों का सामना किया। जंगलों में अभियान, दुर्गम इलाकों में गश्त और अचानक होने वाली मुठभेड़ों के बीच ड्यूटी करना सुरक्षाबलों के लिए हमेशा चुनौतीपूर्ण रहता है।

लेकिन 21 अप्रैल 2025 का लुगुबुरु ऑपरेशन उनके सैन्य जीवन के सबसे महत्वपूर्ण अभियानों में शामिल हो गया।

लुगुबुरु के जंगल में शुरू हुई थी मुठभेड़

21 अप्रैल को लालपनिया थाना क्षेत्र के लुगु पहाड़ी इलाके में 209 कोबरा बटालियन और झारखंड पुलिस की संयुक्त टीम तलाशी अभियान पर निकली थी। सुरक्षा बलों को इलाके में नक्सली गतिविधियों की जानकारी मिली थी। इसी दौरान जंगल में मौजूद नक्सलियों ने जवानों पर गोलीबारी शुरू कर दी।

अचानक शुरू हुई फायरिंग के बाद सुरक्षाबलों ने मोर्चा संभाला और जवाबी कार्रवाई शुरू की। करीब दो घंटे तक चली मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने आठ नक्सलियों को मार गिराया।

इस अभियान में डिप्टी कमांडेंट अंजनी कुमार ने आगे से नेतृत्व करते हुए अपनी टीम का हौसला बनाए रखा, जबकि कॉन्स्टेबल दीपक साह ने भी ऑपरेशन की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारी गोलीबारी और बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद जवानों ने अपनी स्थिति संभाले रखी।

एक करोड़ के इनामी विवेक का हुआ अंत

लुगुबुरु अभियान की सबसे बड़ी सफलता भाकपा (माओवादी) केंद्रीय समिति के सदस्य प्रयाग मांझी उर्फ विवेक का मारा जाना था। उस पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था।

विवेक को विवेक दा, फुचना, नागो मांझी और करन दा जैसे नामों से भी जाना जाता था। वह पारसनाथ पहाड़ियों और आसपास के इलाकों में सक्रिय एक प्रभावशाली नक्सली कमांडर माना जाता था।

उसके खिलाफ झारखंड के साथ-साथ बिहार, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में कई हिंसक घटनाओं से जुड़े मामले थे। अकेले गिरिडीह जिले में उसके खिलाफ 50 से अधिक मामले दर्ज होने की बात सामने आई थी।

विवेक के अलावा मुठभेड़ में अरविंद यादव उर्फ अविनाश और साहेबराम मांझी उर्फ राहुल मांझी समेत सात अन्य नक्सली भी मारे गए थे।

हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद

ऑपरेशन के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके में तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान एक एके श्रृंखला की राइफल, तीन इंसास राइफलें, एक एसएलआर, आठ देसी कट्टे और एक पिस्तौल बरामद किए गए।

इस पूरे अभियान की खास बात यह रही कि इतनी बड़ी मुठभेड़ के बावजूद किसी भी सुरक्षाकर्मी के घायल होने की खबर नहीं आई। सुरक्षा बलों की रणनीति, टीमवर्क और साहस को इस सफलता का महत्वपूर्ण कारण माना गया।

दीपक साह के परिवार के लिए गर्व का पल

दीपक साह के शौर्य चक्र के लिए चुने जाने की खबर उनके परिवार के लिए केवल सम्मान नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और त्याग की पहचान है। आसनसोल के नमो पाड़ा क्षेत्र से निकलकर देश की सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ में सेवा देने वाले दीपक ने अब अपने शहर का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है।

पिता अशोक साह और माता रिंकू साह के लिए बेटे को देश के दूसरे सबसे बड़े शांतिकालीन वीरता सम्मान से सम्मानित किया जाना निश्चित रूप से गौरव और भावुकता का क्षण होगा।

2017 से देश सेवा, अब शौर्य चक्र

वर्ष 2017 में सीआरपीएफ में शामिल होने के बाद दीपक साह ने देश के अलग-अलग चुनौतीपूर्ण इलाकों में अपनी जिम्मेदारी निभाई। 209 कोबरा जैसी विशेष नक्सल-विरोधी इकाई में सेवा करना अपने आप में कठिन जिम्मेदारी है। ऐसे अभियानों में जवानों को हर कदम पर खतरे का सामना करना पड़ता है।

लुगुबुरु अभियान में उनके प्रदर्शन ने साबित किया कि कठिन परिस्थितियों में भी वह अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटे। अब शौर्य चक्र के जरिए देश उनके साहस को आधिकारिक सम्मान देने जा रहा है।

आसनसोल के लिए यह केवल एक जवान को मिला सम्मान नहीं, बल्कि शहर के उस बेटे की उपलब्धि है जिसने अपने जीवन को देश की सुरक्षा के लिए समर्पित किया। दीपक साह की कहानी सेंट जोसेफ हाई स्कूल से शुरू होकर सीआरपीएफ की वर्दी और लुगुबुरु के रणक्षेत्र तक पहुंची और अब शौर्य चक्र के सम्मान तक पहुंच गई है। उनका यह सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए साहस, अनुशासन और देशसेवा की प्रेरणा बनेगा।

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