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आसनसोल-दुर्गापुर

बागेश्वर बाबा के खिलाफ आसनसोल में कांग्रेस का प्रदर्शन, पोस्टर जलाकर थाने में दी शिकायत

Moutushi · 9 September 2026, 8:03 PM

आसनसोल: पश्चिम बंगाल में दुर्गापूजा के दौरान खान-पान और धार्मिक परंपराओं को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक रंग लेता दिखाई दे रहा है। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, जिन्हें बागेश्वर बाबा के नाम से भी जाना जाता है, के कथित बयान को लेकर आसनसोल में कांग्रेस ने जोरदार विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए पोस्टर जलाया और बाद में आसनसोल साउथ थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराने की बात कही।

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने पश्चिम बंगाल और यहां के लोगों की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिससे बंगाल और बंगालियों की अस्मिता प्रभावित हुई है। कांग्रेस की ओर से कहा गया कि पश्चिम बंगाल की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं अपनी विशिष्ट पहचान रखती हैं और यहां के लोगों को यह बताने की जरूरत नहीं है कि दुर्गापूजा के दौरान उन्हें किस तरह रहना या क्या खाना चाहिए।

कथित बयान के खिलाफ कांग्रेस का विरोध

जानकारी के अनुसार, धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री हाल ही में कोलकाता में आयोजित हनुमान कथा कार्यक्रम में पहुंचे थे। इसी दौरान उनके द्वारा नवरात्रि और दुर्गापूजा के समय मांसाहारी भोजन को लेकर कथित तौर पर टिप्पणी की गई थी। इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रिया सामने आने लगी।

इसी मुद्दे को लेकर आसनसोल कांग्रेस ने विरोध का रास्ता अपनाया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि धार्मिक आस्था और खान-पान से जुड़े मामलों में पश्चिम बंगाल की अपनी परंपराएं और सामाजिक विविधता रही है। ऐसे में बाहर से किसी व्यक्ति द्वारा यहां के लोगों को खान-पान या परंपराओं के बारे में निर्देश देने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती।

कांग्रेस की ओर से यह भी कहा गया कि दुर्गापूजा बंगाल के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अलग-अलग समुदाय और परिवार अपनी-अपनी परंपराओं के अनुसार त्योहार मनाते हैं। ऐसे में खान-पान को लेकर किसी एक विचार को सभी लोगों पर लागू करने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।

पोस्टर जलाकर जताया विरोध

आसनसोल में विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के खिलाफ नारेबाजी की और उनके पोस्टर में आग लगाकर अपना आक्रोश जाहिर किया। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा कि बंगाल की संस्कृति और अस्मिता को लेकर किसी भी प्रकार की कथित आपत्तिजनक टिप्पणी का राजनीतिक और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाएगा।

कांग्रेस नेताओं का कहना था कि विरोध का उद्देश्य किसी धर्म या धार्मिक आयोजन का विरोध करना नहीं है, बल्कि उन कथित टिप्पणियों पर आपत्ति दर्ज कराना है, जिन्हें पार्टी बंगाल की सांस्कृतिक पहचान और लोगों की भावनाओं से जुड़ा हुआ मानती है।

पोस्टर जलाने के बाद कांग्रेस नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल आसनसोल साउथ थाने पहुंचा। वहां उन्होंने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के कथित बयान को लेकर पुलिस के समक्ष शिकायत देने की बात कही। कांग्रेस की मांग है कि मामले की जांच की जाए और यदि किसी प्रकार का कानून का उल्लंघन सामने आता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

‘बंगाल में क्या खाना है, यह कोई बाहर से तय नहीं करेगा’

कांग्रेस नेताओं ने इस दौरान कहा कि पश्चिम बंगाल में दुर्गापूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक उत्सव भी है। यहां की पूजा पद्धतियों, खान-पान और पारिवारिक परंपराओं में लंबे समय से विविधता रही है।

उनका कहना था कि किसी व्यक्ति की धार्मिक मान्यता अलग हो सकती है और वह अपने अनुसार जीवन जीने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन दूसरे राज्य के लोगों की परंपराओं को लेकर निर्देश देने या टिप्पणी करने का अधिकार किसी को नहीं होना चाहिए।

कांग्रेस नेताओं ने विशेष रूप से दुर्गापूजा के दौरान खान-पान को लेकर दिए गए कथित बयान पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि बंगाल के लोग अपनी परंपराओं और संस्कृति को अच्छी तरह जानते हैं और उन्हें यह सीख देने की आवश्यकता नहीं है कि त्योहार के दौरान उन्हें क्या खाना चाहिए और किस तरह रहना चाहिए।

पहले भी गरमा चुका है मांसाहार का मुद्दा

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के कथित बयान के बाद दुर्गापूजा के दौरान मांसाहार को लेकर बहस तेज हुई है। इससे पहले भी विभिन्न संगठनों और राजनीतिक नेताओं की ओर से पूजा पंडालों के आसपास खान-पान को लेकर अलग-अलग विचार सामने आते रहे हैं।

एक ओर कुछ धार्मिक संगठनों की ओर से नवरात्रि और दुर्गापूजा के दौरान सात्त्विक भोजन और शाकाहार पर जोर दिया जाता है, वहीं दूसरी ओर बंगाल की शाक्त परंपरा का हवाला देते हुए कुछ लोग मांसाहारी भोजन की परंपरा को भी धार्मिक और सांस्कृतिक संदर्भों से जोड़ते हैं।

यही वजह है कि यह मुद्दा केवल खान-पान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब संस्कृति, धार्मिक स्वतंत्रता और क्षेत्रीय पहचान से भी जुड़ता जा रहा है। राजनीतिक दल भी इस बहस को अपने-अपने दृष्टिकोण से उठा रहे हैं।

आसनसोल में शिकायत के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल

आसनसोल कांग्रेस द्वारा थाने में शिकायत दिए जाने के बाद इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर राजनीतिक चर्चा और तेज होने की संभावना है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह बंगाल की सांस्कृतिक पहचान और लोगों की परंपराओं के सम्मान के मुद्दे को मजबूती से उठाएगी।

वहीं, पुलिस शिकायत पर आगे क्या कार्रवाई करती है, यह भी महत्वपूर्ण होगा। किसी भी शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल कांग्रेस की ओर से कथित बयान को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई है और जांच की मांग की गई है।

दुर्गापूजा जैसे बड़े त्योहार से पहले इस प्रकार का विवाद सामने आने के कारण राजनीतिक माहौल पर भी इसका असर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर अन्य राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया भी सामने आने की संभावना है।

आसनसोल में कांग्रेस का यह प्रदर्शन फिलहाल बंगाल की संस्कृति और खान-पान की स्वतंत्रता के सवाल को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ले आया है। एक तरफ धार्मिक मान्यताओं और व्यक्तिगत आस्था का प्रश्न है, तो दूसरी तरफ स्थानीय परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान के सम्मान की बात उठ रही है। अब निगाह इस बात पर है कि पुलिस शिकायत पर क्या कदम उठाती है और बागेश्वर बाबा की ओर से इस विवाद पर आगे कोई प्रतिक्रिया आती है या नहीं।

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