Thursday, 15 October 2026
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आसनसोल-दुर्गापुर

74 साल पुरानी दुर्गापूजा में उमड़ा उत्साह, फूल के आकार का पंडाल बना आसनसोल का खास आकर्षण

Moutushi · 15 October 2026, 9:29 AM

आसनसोल: पश्चिम बंगाल की चर्चित दुर्गापूजाओं में शामिल आसनसोल के बास्टिन बाजार सर्वजननी दुर्गापूजा का आयोजन इस वर्ष भी भव्य रूप से किया गया है। पूजा के उद्घाटन समारोह को लेकर इलाके में खास उत्साह देखने को मिला। इस अवसर पर आसनसोल उत्तर विधानसभा के विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी विशेष रूप से उपस्थित रहे। धार्मिक आस्था, आकर्षक सजावट और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच आयोजित कार्यक्रम ने इस ऐतिहासिक पूजा की परंपरा को एक बार फिर चर्चा में ला दिया।

बास्टिन बाजार की यह दुर्गापूजा केवल एक वार्षिक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि स्थानीय लोगों की आस्था और वर्षों पुरानी सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़ी हुई है। वर्ष 1952 से चली आ रही इस परंपरा ने समय के साथ इलाके में अपनी अलग पहचान बनाई है। इस वर्ष फूल के आकार में तैयार किया गया आकर्षक पंडाल, मंदिर के कपाट खुले रहने की व्यवस्था और सांस्कृतिक कार्यक्रम पूजा के प्रमुख आकर्षण बने हुए हैं।

वर्ष 1952 से जुड़ा है पूजा का इतिहास

बास्टिन बाजार सर्वजननी दुर्गापूजा की शुरुआत वर्ष 1952 में हुई थी। तब से यहां मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की परंपरा चली आ रही है। कई दशकों से आयोजित हो रही इस पूजा के साथ स्थानीय निवासियों की धार्मिक भावनाएं जुड़ी हुई हैं। लंबे समय से चली आ रही परंपरा ने इसे आसनसोल के प्रमुख पूजा आयोजनों में एक विशिष्ट स्थान दिलाया है।

दुर्गापूजा बंगाल की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस अवसर पर लोग मां दुर्गा की आराधना करने के साथ परिवार, मित्रों और पड़ोसियों के साथ त्योहार की खुशियां भी साझा करते हैं। बास्टिन बाजार की पूजा में भी धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सामुदायिक भागीदारी का महत्व दिखाई देता है।

वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को बनाए रखना आयोजकों और स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए खास महत्व रखता है। यही कारण है कि हर वर्ष पूजा के आयोजन को लेकर लोगों में उत्सुकता बनी रहती है। इस बार भी उद्घाटन समारोह और पंडाल की सजावट ने इलाके में उत्सव का माहौल बनाया है।

मंदिर के कपाट खुलने से श्रद्धालुओं में उत्साह

बास्टिन बाजार की दुर्गापूजा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पहलू मंदिर के कपाट बंद होने और बाद में फिर खुलने का घटनाक्रम है। आयोजकों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, विवाद के कारण एक समय मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए थे। इससे श्रद्धालुओं को निराशा हुई थी और मंदिर में दर्शन की सुविधा को लेकर चर्चा होती रही थी।

आयोजकों का कहना है कि सत्ता परिवर्तन के बाद मंदिर के कपाट दोबारा खोले गए। इस वर्ष की पूजा इसलिए भी विशेष मानी जा रही है, क्योंकि श्रद्धालुओं को अब यहां आकर मां के दर्शन और पूजा-अर्चना करने का अवसर मिल रहा है।

बताया गया कि विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी की पहल के बाद मंदिर के कपाट 24 घंटे खुले रहने की व्यवस्था की गई है। इससे श्रद्धालु अपनी सुविधानुसार मंदिर में पहुंचकर दर्शन कर सकते हैं। मंदिर खुला रहने की यह व्यवस्था स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे पूजा-अर्चना के लिए आने वाले भक्तों को अधिक सुविधा मिलती है।

हालांकि, मंदिर के कपाट बंद होने की पुरानी घटना और उन्हें दोबारा खोलने से जुड़े कारणों के बारे में विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस घटनाक्रम को आयोजकों की ओर से दी गई जानकारी के आधार पर देखा जाना चाहिए।

फूल के आकार का पंडाल बना आकर्षण का केंद्र

इस वर्ष बास्टिन बाजार सर्वजननी दुर्गापूजा में पंडाल की सजावट लोगों का ध्यान खींच रही है। पंडाल को फूल के आकार में तैयार किया गया है, जिससे इसे आकर्षक रूप दिया गया है। इसकी बनावट पूजा स्थल को अलग पहचान प्रदान करती है और श्रद्धालुओं तथा दर्शकों के लिए खास आकर्षण बन रही है।

दुर्गापूजा के दौरान पंडाल सजावट का विशेष महत्व होता है। अलग-अलग थीम, कलात्मक संरचनाओं और रोशनी के माध्यम से पूजा समितियां लोगों को आकर्षित करने का प्रयास करती हैं। बास्टिन बाजार में फूल के आकार की सजावट इसी उत्सवी परंपरा का हिस्सा है।

मंदिर परिसर में प्रवेश करने पर श्रद्धालुओं को पूजा और भक्ति का वातावरण अनुभव होता है। मां दुर्गा के दर्शन, पूजा-अर्चना और सजे हुए परिसर के बीच त्योहार की रौनक दिखाई देती है। यहां आने वाले लोगों के लिए यह स्थान केवल पंडाल देखने का केंद्र नहीं, बल्कि पुरानी परंपरा और धार्मिक आस्था से जुड़ा स्थल भी है।

उद्घाटन समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति

पूजा के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन भी किया गया। इन कार्यक्रमों के माध्यम से भारतीय संस्कृति और परंपराओं की झलक देखने को मिली। धार्मिक आयोजन के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समारोह को और आकर्षक बनाया।

कार्यक्रम में विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी की मौजूदगी विशेष रही। इस दौरान पूजा के ऐतिहासिक महत्व, मंदिर के कपाट दोबारा खुलने और इस वर्ष की सजावट को लेकर चर्चा हुई। हालांकि, कार्यक्रम में प्रस्तुत किए गए सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सूची और कलाकारों के नामों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।

दुर्गापूजा जैसे त्योहारों में सांस्कृतिक कार्यक्रम लोगों को एक साथ जोड़ने का माध्यम बनते हैं। इनके जरिए स्थानीय परंपराओं को आगे बढ़ाने और नई पीढ़ी को सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का अवसर मिलता है। बास्टिन बाजार की पूजा में धार्मिक आयोजन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का मेल इसी भावना को दर्शाता है।

पुरानी परंपरा और नई सजावट का संगम

बास्टिन बाजार सर्वजननी दुर्गापूजा की विशेषता इसका ऐतिहासिक महत्व और वर्तमान आयोजन की भव्यता है। एक ओर वर्ष 1952 से चली आ रही पूजा की परंपरा है, तो दूसरी ओर फूल के आकार का आकर्षक पंडाल और सांस्कृतिक कार्यक्रम इस वर्ष के आयोजन को खास बना रहे हैं।

मंदिर के कपाट 24 घंटे खुले रहने की बताई गई व्यवस्था भी श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण है। इससे लोगों को अपनी सुविधा के अनुसार दर्शन करने का अवसर मिलता है। स्थानीय स्तर पर इस पूजा का महत्व केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आसनसोल की सांस्कृतिक पहचान और सामुदायिक जीवन से भी जुड़ा है।

कुल मिलाकर, बास्टिन बाजार सर्वजननी दुर्गापूजा इस वर्ष अपने ऐतिहासिक सफर, मां दुर्गा के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था, फूल के आकार के पंडाल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के कारण आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी की मौजूदगी में आयोजित उद्घाटन समारोह ने इस आयोजन को विशेष पहचान दी। वर्ष 1952 से चली आ रही यह परंपरा आज भी स्थानीय लोगों के लिए धार्मिक विश्वास और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक बनी हुई है।

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