आसनसोल, विकास चंद्र, सिटी टुडे न्यूज़: पश्चिम बर्दवान जिले के आसनसोल स्थित बर्नपुर के नरसिंहबांध इलाके में शनिवार तड़के आबकारी विभाग ने एक सरकारी लाइसेंस प्राप्त शराब दुकान पर बड़ी छापेमारी की। करीब छह घंटे तक चली इस कार्रवाई से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। छापेमारी के दौरान विभागीय अधिकारियों ने बड़ी संख्या में शराब की पेटियां और बोतलें जब्त कीं। इसके बाद संबंधित दुकान को सील कर दिया गया। वहीं, दुकान के अंदर कथित तौर पर नकली शराब की पैकेजिंग किए जाने के आरोप ने मामले को और गंभीर बना दिया है। दूसरी ओर, स्थानीय निवासियों ने इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर शराब दुकान को स्थायी रूप से बंद करने अथवा किसी दूसरी जगह स्थानांतरित करने की मांग तेज कर दी है।
सुबह 4:30 बजे पांच गाड़ियों से पहुंची आबकारी विभाग की टीम
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह करीब 4:30 बजे आबकारी विभाग के लगभग 20 से 25 अधिकारियों की टीम पांच गाड़ियों में सवार होकर नरसिंहबांध पहुंची। अधिकारियों ने इलाके में पहुंचने के बाद पैदल ही संबंधित शराब दुकान तक जाकर तलाशी अभियान शुरू किया। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई करीब छह घंटे से अधिक समय तक चली।
इस दौरान दुकान के अंदर रखी शराब की पेटियों और बोतलों की जांच की गई। कार्रवाई के दौरान इतनी शराब जब्त की गई कि उसे ले जाने के लिए विभागीय अधिकारियों को एक गाड़ी का इस्तेमाल करना पड़ा। जब्त की गई शराब को विभागीय वाहनों में लादकर वहां से ले जाया गया। इसके बाद आबकारी विभाग की टीम ने दुकान को सील कर दिया।

स्थानीय लोगों ने दावा किया कि दुकान के अंदर नकली शराब की पैकेजिंग का काम भी किया जा रहा था। हालांकि, इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि दुकान के अंदर वास्तव में किस तरह की गतिविधियां संचालित हो रही थीं।
सुबह से देर रात तक शराब बिक्री का आरोप
छापेमारी के बाद स्थानीय निवासी एक बार फिर शराब दुकान के खिलाफ खुलकर सामने आए हैं। स्थानीय निवासी संतोष शर्मा ने आरोप लगाया कि लंबे समय से इस दुकान के कारण पूरे इलाके का माहौल खराब हो रहा है। उनका कहना है कि दुकान पर सुबह करीब छह बजे से ही शराब की बिक्री और आपूर्ति शुरू हो जाती है, जबकि रात लगभग 12 बजे तक दुकान के सामने लोगों की भीड़ लगी रहती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि दुकान के आसपास खुलेआम शराब का सेवन किया जाता है। इसके चलते आए दिन नशे में धुत लोगों के बीच मारपीट, झगड़े और गाली-गलौज की घटनाएं होती हैं। इससे आसपास रहने वाले परिवारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शराब दुकान के कारण महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को भी असहज परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है।
स्कूल से महज 10 मीटर की दूरी पर शराब दुकान
इस पूरे विवाद में सबसे गंभीर मुद्दा शराब दुकान और नजदीकी प्राथमिक विद्यालय के बीच की दूरी को लेकर है। स्थानीय निवासियों के मुताबिक, यह शराब दुकान स्कूल से महज 10 मीटर की दूरी पर स्थित है। प्रतिदिन इसी रास्ते से छोटे-छोटे बच्चे पढ़ने के लिए विद्यालय आते-जाते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस सड़क से बच्चों को स्कूल जाना पड़ता है, उसी के आसपास शराब पीने वालों की भीड़ लगी रहती है। महिलाओं और अन्य राहगीरों को भी इसी रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ता है। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा और सामाजिक वातावरण को लेकर अभिभावकों में चिंता बनी हुई है।
निवासियों का सवाल है कि जब किसी इलाके में विद्यालय और आवासीय मकान मौजूद हैं, तो वहां इस तरह की गतिविधियों को लेकर प्रशासन को विशेष सतर्कता क्यों नहीं बरतनी चाहिए?
थाने से डीएम कार्यालय तक कई बार की गई शिकायत
संतोष शर्मा के अनुसार, शराब दुकान को हटाने की मांग को लेकर स्थानीय लोग पहले भी कई बार विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं। इस संबंध में हीरापुर थाने में शिकायत दर्ज कराने के साथ पश्चिम बर्दवान जिला प्रशासन के जिलाधिकारी कार्यालय और आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट में भी लिखित आवेदन दिया गया है।
उनका आरोप है कि नियमानुसार दुकान सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक खुलनी चाहिए, लेकिन यहां सुबह छह बजे से ही शराब की बिक्री और आपूर्ति शुरू हो जाती है। इस समस्या के बारे में दुकान के मैनेजर को भी कई बार बताया गया, लेकिन स्थानीय लोगों को कोई स्थायी समाधान नहीं मिला।
मालिक बदलने के बाद बढ़ी परेशानी, पहले भी हो चुकी है छापेमारी
स्थानीय निवासियों का दावा है कि करीब तीन-चार साल पहले वर्तमान मालिक पक्ष द्वारा दुकान का संचालन संभालने के बाद से इलाके में समस्याएं बढ़ गई हैं। संतोष शर्मा ने यह भी दावा किया कि आबकारी विभाग पहले भी दो बार इस दुकान पर छापेमारी कर चुका है। हालांकि, उनका आरोप है कि कार्रवाई के कुछ दिनों बाद फिर से दुकान में पहले की तरह शराब की बिक्री शुरू हो जाती है।

स्थानीय लोगों ने इलाके की विधायक और राज्य की शहरी विकास एवं नगरपालिका मामलों की मंत्री अग्निमित्रा पाल से भी इस समस्या में हस्तक्षेप करने तथा शराब दुकान को दूसरी जगह स्थानांतरित कराने की मांग की है।
100 साल पुरानी दुकान, अब घनी आबादी के बीच बनी परेशानी
स्थानीय निवासियों का कहना है कि नरसिंहबांध में करीब 100 साल पहले जब इस शराब दुकान की स्थापना हुई थी, तब इलाके में आबादी काफी कम थी। लेकिन समय के साथ यहां तेजी से आवासीय विस्तार हुआ है। आज दुकान के आसपास बड़ी संख्या में घर, विद्यालय और नर्सिंग होम मौजूद हैं।
लोगों का तर्क है कि जिस स्थान पर कभी आबादी कम थी, वहां अब घनी बस्ती विकसित हो चुकी है। इसलिए पुराने समय की परिस्थितियों को आधार बनाकर दुकान का संचालन जारी रखना उचित नहीं है। उनकी मांग है कि इसे किसी ऐसे खाली स्थान पर स्थानांतरित किया जाए, जहां आम लोगों और विद्यार्थियों को परेशानी न हो।

छापेमारी के बाद स्थायी समाधान की उम्मीद
शनिवार की कार्रवाई के बाद नरसिंहबांध के निवासियों को उम्मीद है कि आबकारी विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए केवल छापेमारी और दुकान सील करने तक सीमित नहीं रहेगा। लोगों की मांग है कि जब तक पूरे मामले की जांच नहीं हो जाती, तब तक दुकान को दोबारा खोलने की अनुमति नहीं दी जाए और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर उचित कार्रवाई की जाए।
फिलहाल, जब्त शराब की वास्तविक मात्रा, दुकान में कथित नकली शराब की पैकेजिंग और बिक्री के समय से जुड़े आरोपों की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी। आबकारी विभाग की ओर से बताया गया है कि शिकायत मिलने के बाद शनिवार को यह अभियान चलाया गया और पूरे मामले की जांच की जा रही है। अब देखना होगा कि इस कार्रवाई के बाद नरसिंहबांध के लोगों को वर्षों पुरानी समस्या से राहत मिलती है या फिर उन्हें अपनी मांगों को लेकर एक बार फिर आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।




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