कोलकाता, बिकाश चंद्र, सिटी टुडे न्यूज़ : पश्चिम बंगाल के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्न की ड्यूटी कथित तौर पर पैसे लेकर दूसरे से करवाने के मामले ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस मामले में राज्य के स्वास्थ्य विभाग से रिपोर्ट मांगने की बात कही है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब चोरबागान दुर्गा पूजा में भगदड़ के दौरान 19 लोगों की मौत के बाद राज्य सरकार और जूनियर डॉक्टरों के एक वर्ग के बीच बयानबाजी जारी है। एक ओर इंटर्न की ड्यूटी में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग उठ रही है, तो दूसरी ओर चिकित्सक संगठनों ने सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं और अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं।
इंटर्न की ड्यूटी के बदले पैसे लेने का आरोप
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखोपाध्याय ने हाल ही में मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों और उप-प्राचार्यों के साथ बैठक में इंटर्न की ड्यूटी की कथित खरीद-बिक्री का मुद्दा उठाया था। स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, कोलकाता के अलावा कुछ जिला मेडिकल कॉलेजों में भी इस तरह की गतिविधियों की शिकायत सामने आई है। आरोप है कि कुछ इंटर्न अपनी निर्धारित ड्यूटी करने के बजाय पैसे देकर दूसरे लोगों से काम करवाने की व्यवस्था कर रहे थे।
बताया गया कि ड्यूटी में बदलाव के लिए कुछ कॉलेजों के स्तर पर व्हाट्सऐप समूहों का इस्तेमाल किया जा रहा था। हालांकि, इन आरोपों की पूरी सच्चाई और इसमें शामिल लोगों की जिम्मेदारी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने बैठक में प्राचार्यों से यह भी पूछा कि यदि उन्हें ऐसी गतिविधियों की जानकारी थी, तो उन्होंने विभाग को इसकी सूचना क्यों नहीं दी। बैठक में कुछ प्राचार्यों ने अपने संस्थानों में ऐसी किसी घटना की जानकारी होने से इनकार किया। इसके बाद दूसरे मेडिकल कॉलेजों के प्रशासन की जानकारी और जवाबदेही पर भी सवाल उठे।
नवंबर से बायोमेट्रिक हाजिरी लागू करने की तैयारी
स्वास्थ्य विभाग की बैठक में नवंबर से जूनियर डॉक्टरों के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति व्यवस्था लागू करने का निर्णय भी लिया गया। इसका उद्देश्य ड्यूटी पर वास्तविक उपस्थिति सुनिश्चित करना और किसी दूसरे व्यक्ति से निर्धारित जिम्मेदारी पूरी करवाने जैसी कथित अनियमितताओं पर रोक लगाना बताया गया है।
स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखोपाध्याय ने कहा था कि मुर्शिदाबाद मेडिकल कॉलेज के निरीक्षण के दौरान उन्हें इस मामले की जानकारी मिली। उनके अनुसार, वहां एक डेंटल कॉलेज का इंटर्न ड्यूटी कर रहा था और ऐसी व्यवस्था पिछले चार वर्षों से चलने की बात सामने आई थी। उन्होंने कहा कि विभाग इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए प्रयास कर रहा है।
अब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भी इस मामले में रिपोर्ट मांगने की बात कही है। इससे सरकारी चिकित्सा संस्थानों में ड्यूटी व्यवस्था और निगरानी को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
चोरबागान हादसे के बाद शुरू हुआ विवाद
चोरबागान दुर्गा पूजा में भगदड़ के दौरान 19 लोगों की मौत के बाद घायलों को सरकारी अस्पताल से निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने के फैसले पर विवाद शुरू हुआ था। कोलकाता मेडिकल कॉलेज से घायलों को निजी अस्पताल भेजने की प्रक्रिया के बाद जूनियर डॉक्टरों के एक वर्ग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सवाल उठाए थे।
डॉक्टरों का कहना था कि जब सरकारी मेडिकल कॉलेजों में बेहतर उपचार की व्यवस्था होनी चाहिए, तो घायलों को निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की जरूरत क्यों पड़ी। इस मुद्दे पर सरकार और चिकित्सकों के बीच मतभेद सामने आए।
मुख्यमंत्री ने इससे पहले भी जूनियर डॉक्टरों के ड्यूटी छोड़कर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के मामले में रिपोर्ट मांगी थी। अब इंटर्न की ड्यूटी से जुड़े आरोपों पर रिपोर्ट मांगने की घोषणा के बाद विवाद ने एक नया मोड़ ले लिया है।
जूनियर डॉक्टरों पर मुख्यमंत्री की टिप्पणी
मंगलवार को मिलन मेला परिसर में राज्य सरकार के विजय सम्मेलन कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने जूनियर डॉक्टरों के एक वर्ग पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि उन्हें नायक बनाने की जरूरत नहीं है और उनकी राजनीतिक विचारधारा को लेकर भी सवाल उठाए। मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी के बाद चिकित्सक संगठनों की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई।
मुख्यमंत्री ने निजी अस्पतालों की सुविधाओं और सरकारी चिकित्सा व्यवस्था के स्तर पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने मणिपाल और अपोलो जैसे निजी अस्पतालों की सुविधाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारी अस्पतालों को भी बेहतर बनाया जाएगा। कोलकाता मेडिकल कॉलेज की स्थिति पर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इसे फिर से सर्वश्रेष्ठ बनाने के लिए सरकार को समय देना होगा। इससे पहले वह राज्य के मेडिकल कॉलेजों की कमियों को दूर करने के लिए दो वर्ष का समय मांग चुके हैं।
डॉक्टरों ने उठाए सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
आरजी कर आंदोलन से जुड़े चिकित्सक नेता अनिकेत महतो ने मुख्यमंत्री की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए सवाल किया कि घायलों को एसएसकेएम अस्पताल में क्यों नहीं भेजा गया। हालांकि, उन्होंने इंटर्न की ड्यूटी की कथित खरीद-बिक्री को अस्वीकार्य बताया।
एएचएसडी के चिकित्सक नेता सुबर्ण गोस्वामी ने भी कहा कि ड्यूटी की खरीद-बिक्री का समर्थन नहीं किया जा सकता। साथ ही उन्होंने जोर दिया कि यदि कोई गैरकानूनी गतिविधि हुई है, तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए और विरोधी विचार रखने वाले डॉक्टरों को राजनीतिक प्रतिशोध का निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
वेस्ट बंगाल जूनियर डॉक्टर्स फ्रंट के सदस्य चिकित्सक परिचय पांडा ने भी ड्यूटी बेचने की कथित व्यवस्था को गलत बताया। हालांकि, उन्होंने आशंका जताई कि रिपोर्ट मांगने के पीछे कोई अन्य उद्देश्य तो नहीं है। उन्होंने सरकारी अस्पतालों में जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई।
जांच में वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग
वेस्ट बंगाल डॉक्टर्स फोरम के अध्यक्ष कौशिक चाकी ने कहा कि यदि कई वर्षों से इंटर्न की ड्यूटी में ऐसी अनियमितताएं हो रही थीं, तो वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली। उन्होंने मांग की कि जांच केवल इंटर्न तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि विभागाध्यक्षों, कॉलेज प्रशासन, चिकित्सा शिक्षा निदेशक और स्वास्थ्य सचिव की जवाबदेही भी देखी जानी चाहिए।
चिकित्सक नेता देवाशीष हलदार ने भी कहा कि यदि कोई गैरकानूनी काम हुआ है, तो जूनियर और वरिष्ठ डॉक्टरों सहित सभी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की कमियों पर सवाल उठाने वाले डॉक्टरों की छवि खराब करने का प्रयास किया जा रहा है।
फिलहाल, इंटर्न की ड्यूटी से जुड़े आरोपों पर स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट और जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि कथित व्यवस्था किन संस्थानों में चल रही थी, कौन लोग इसमें शामिल थे और प्रशासनिक स्तर पर किसकी जिम्मेदारी बनती है। मामले में आगे की कार्रवाई रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय होगी।




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