Sunday, 18 October 2026
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आसनसोल-दुर्गापुर

आसनसोल में कल्याणपुर सेक्टर दुर्गापूजा का 40वां वर्ष, कंबोडिया के बौद्ध मंदिर की तर्ज पर सजा पंडाल

Moutushi · 17 October 2026, 5:50 PM

आसनसोल: पश्चिम बंगाल के औद्योगिक शहर आसनसोल में दुर्गापूजा को लेकर तैयारियां और उत्साह देखने को मिल रहा है। शहर के कल्याणपुर इलाके में स्थित कल्याणपुर सेक्टर दुर्गापूजा कमेटी इस वर्ष अपने पूजा आयोजन के 40वें वर्ष में प्रवेश कर गई है। चार दशकों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कमेटी ने इस बार अपने पूजा मंडप को एक खास धार्मिक और सांस्कृतिक अवधारणा से जोड़ने का प्रयास किया है। इस वर्ष मंडप को कंबोडिया के एक बौद्ध मंदिर की तर्ज पर तैयार किया गया है। इसकी सजावट में बौद्ध मंदिरों की स्थापत्य शैली, बुद्ध की प्रतिमाओं और होगला पत्तों से बनी कलाकृतियों को विशेष स्थान दिया गया है।

इस दुर्गापूजा की सबसे खास बात यह है कि मंडप की परिकल्पना केवल आकर्षक सजावट तक सीमित नहीं है। आयोजकों ने इसके माध्यम से दुनिया को शांति का संदेश देने की कोशिश की है। वर्तमान समय में विश्व के विभिन्न हिस्सों में युद्ध और संघर्ष की स्थितियों को देखते हुए कमेटी ने ऐसी थीम चुनी है, जो लोगों को शांति, सद्भाव और मानवीय मूल्यों के महत्व की याद दिलाती है। धार्मिक उत्सव के साथ सामाजिक संदेश को जोड़ने की यह पहल इस वर्ष की पूजा को एक अलग पहचान देने का प्रयास है।

कंबोडिया के बौद्ध मंदिर से प्रेरित पूजा मंडप

कल्याणपुर सेक्टर दुर्गापूजा का इस वर्ष का प्रमुख आकर्षण कंबोडिया के बौद्ध मंदिर की शैली पर तैयार किया गया मंडप है। बौद्ध मंदिरों की स्थापत्य परंपरा, धार्मिक वातावरण और कलात्मक अभिव्यक्ति से प्रेरणा लेकर इसे विशेष रूप देने की योजना बनाई गई है। मंडप में बौद्ध मठों में स्थापित बुद्ध की प्रतिमाओं को भी शामिल किया गया है, जिससे इसकी धार्मिक और सांस्कृतिक प्रस्तुति को विशिष्ट बनाया जा सके।

दुर्गापूजा के दौरान हर वर्ष विभिन्न पूजा समितियां अपनी कल्पना और रचनात्मकता के माध्यम से श्रद्धालुओं के सामने नए विषय प्रस्तुत करती हैं। कहीं ऐतिहासिक इमारतों की झलक दिखाई देती है, तो कहीं लोककला, प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक परंपराओं को सजावट का आधार बनाया जाता है। इसी क्रम में कल्याणपुर सेक्टर की पूजा समिति ने इस बार बौद्ध मंदिर की शैली को अपनी थीम का केंद्र बनाया है।

इस मंडप की परिकल्पना में अलग-अलग धार्मिक परंपराओं की कलात्मक विशेषताओं को सामने लाने का प्रयास किया गया है। बुद्ध की प्रतिमाओं और मंदिर की शैली के माध्यम से श्रद्धालुओं को एक अलग वातावरण का अनुभव कराने की तैयारी है। इससे दुर्गापूजा देखने आने वाले लोगों को केवल पूजा मंडप की सजावट ही नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपे विचार और संदेश पर भी ध्यान देने का अवसर मिलेगा।

होगला पत्तों की कलाकृतियां बढ़ाएंगी मंडप की खूबसूरती

इस वर्ष मंडप की सजावट में होगला पत्तों से तैयार की गई विभिन्न कलाकृतियों को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इन पत्तों का इस्तेमाल करके सजावटी आकृतियां तैयार की गई हैं, जो मंडप की थीम के अनुरूप इसकी सुंदरता बढ़ाने में योगदान देंगी। पारंपरिक सामग्री के माध्यम से कलात्मक सजावट तैयार करना इस पूजा की एक खास विशेषता है।

होगला पत्तों का उपयोग ग्रामीण और पारंपरिक हस्तशिल्प में लंबे समय से होता रहा है। इनसे विभिन्न प्रकार की उपयोगी वस्तुओं और सजावटी सामग्रियों का निर्माण किया जाता है। पूजा मंडप की सजावट में ऐसी सामग्री का इस्तेमाल शिल्पकला की संभावनाओं को सामने लाता है। इसके साथ ही यह दिखाता है कि रचनात्मक सोच के माध्यम से पारंपरिक सामग्री को भी आकर्षक कलात्मक रूप दिया जा सकता है।

कंबोडिया के बौद्ध मंदिर की शैली और होगला पत्तों से बनी कलाकृतियों का संयोजन मंडप को इस वर्ष अलग पहचान देने वाला है। बुद्ध की प्रतिमाओं के साथ सजावट के इन तत्वों को इस तरह प्रस्तुत करने की परिकल्पना की गई है कि मंडप की मूल थीम और शांति का संदेश एक-दूसरे से जुड़े रहें।

युद्ध और संघर्ष के बीच शांति का संदेश

पूजा आयोजकों के अनुसार, इस वर्ष की थीम चुनने के पीछे दुनिया भर में युद्ध की स्थिति एक महत्वपूर्ण वजह है। विभिन्न क्षेत्रों में जारी संघर्षों के बीच शांति की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए मंडप के माध्यम से सकारात्मक संदेश देने का प्रयास किया गया है। कमेटी का उद्देश्य है कि पूजा देखने आने वाले लोग इस संदेश से जुड़ें और विश्व शांति के महत्व को समझें।

युद्ध का प्रभाव केवल संघर्ष वाले क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहता। इससे आम लोगों की जिंदगी, परिवारों की सुरक्षा, बच्चों के भविष्य और समाज की स्थिरता पर भी असर पड़ता है। ऐसे समय में शांति, संवाद और आपसी समझ की जरूरत पर जोर देना महत्वपूर्ण हो जाता है। कल्याणपुर सेक्टर दुर्गापूजा की इस वर्ष की थीम इसी व्यापक विचार को धार्मिक उत्सव की प्रस्तुति के माध्यम से सामने लाने की कोशिश करती है।

दुर्गापूजा बंगाल की प्रमुख सांस्कृतिक परंपराओं में से एक है। इस अवसर पर लोग मां दुर्गा की आराधना करने के साथ परिवार और समुदाय के लोगों के साथ उत्सव में शामिल होते हैं। पूजा मंडपों के माध्यम से कला, संस्कृति और सामाजिक विचारों को प्रस्तुत करने की परंपरा भी इस उत्सव का हिस्सा है। ऐसे में शांति का संदेश देने वाली थीम लोगों को उत्सव के साथ एक महत्वपूर्ण मानवीय विचार से जोड़ सकती है।

चार दशक की परंपरा के साथ नई कल्पना

कल्याणपुर सेक्टर दुर्गापूजा कमेटी के लिए इस वर्ष का आयोजन इसलिए भी विशेष है, क्योंकि पूजा अपने 40वें वर्ष में पहुंच गई है। चार दशकों की यात्रा किसी भी स्थानीय पूजा आयोजन के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव होती है। इस दौरान पूजा लोगों के धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन से जुड़ती है तथा सामुदायिक भागीदारी का अवसर बनती है।

इस बार कंबोडिया के बौद्ध मंदिर की तर्ज पर मंडप तैयार करने का निर्णय परंपरा के साथ नई कल्पना को जोड़ने की कोशिश है। होगला पत्तों से बनी कलाकृतियां, बुद्ध की प्रतिमाएं और शांति का संदेश इस आयोजन के तीन प्रमुख आकर्षण हैं। इन तत्वों के माध्यम से समिति अपनी पूजा को एक ऐसी प्रस्तुति देना चाहती है, जिसमें धार्मिक उत्सव के साथ कला और सामाजिक संदेश का भी समावेश हो।

आसनसोल के कल्याणपुर इलाके में स्थित यह पूजा मंडप दुर्गापूजा के दौरान श्रद्धालुओं और मंडप देखने के शौकीन लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है। हालांकि, आगंतुकों की संख्या या किसी विशेष कार्यक्रम की जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन थीम की विशिष्टता इस आयोजन को अलग पहचान दिलाने की क्षमता रखती है।

कुल मिलाकर, कल्याणपुर सेक्टर दुर्गापूजा का 40वां वर्ष केवल एक वार्षिक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि नई कलात्मक कल्पना और शांति के संदेश को सामने लाने का अवसर भी है। कंबोडिया के बौद्ध मंदिर से प्रेरित मंडप और होगला पत्तों की कलाकृतियों के जरिए कमेटी इस वर्ष श्रद्धालुओं के सामने एक अलग अनुभव प्रस्तुत करने की तैयारी में है। आयोजकों की उम्मीद है कि मां दुर्गा की आराधना के साथ यहां पहुंचने वाले लोगों तक विश्व शांति और सद्भाव का संदेश भी पहुंचेगा।

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