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जामडोबा में खेती को मिलेगी नई उड़ान, ड्रोन से खाद-कीटनाशक छिड़काव का प्रशिक्षण; महिलाओं को मिली इलेक्ट्रिक ढेंकी

Moutushi · 4 October 2026, 1:59 PM

मंत्री अग्निमित्रा पाल ने किया प्रशिक्षण शिविर का उद्घाटन, स्वयं सहायता समूह की आदिवासी महिलाएं अब पारंपरिक तरीके से चावल तैयार कर बाजार में बेचेंगी

आसनसोल: खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और ग्रामीण महिलाओं को पारंपरिक आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में आसनसोल दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के जामडोबा गांव में दो महत्वपूर्ण पहल की गईं। राज्य के कृषि विभाग की ओर से यहां किसानों को ड्रोन के माध्यम से खेतों में खाद और कीटनाशक का छिड़काव करने का प्रशिक्षण दिया गया। वहीं, दूसरी ओर स्वयं सहायता समूह से जुड़ी आदिवासी समुदाय की महिलाओं को बिजली से चलने वाली ढेंकी प्रदान की गई, ताकि वे पारंपरिक तरीके से धान से चावल तैयार कर उसे बाजार तक पहुंचा सकें। दोनों कार्यक्रमों का उद्घाटन और वितरण राज्य की नगर एवं शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पाल ने किया।

इस पहल में एक ओर खेती के काम को आधुनिक तकनीक के सहारे आसान बनाने पर जोर दिया गया, तो दूसरी ओर ग्रामीण महिलाओं की पारंपरिक कला और कौशल को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया गया। जामडोबा में आयोजित कार्यक्रम को किसानों और स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के लिए उपयोगी पहल के रूप में देखा जा रहा है।

अब ड्रोन से खेतों में होगा खाद और कीटनाशक का छिड़काव

जामडोबा गांव में कृषि विभाग की ओर से आयोजित प्रशिक्षण शिविर का मुख्य उद्देश्य किसानों को कृषि कार्यों में ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल से परिचित कराना था। शिविर में खेतों में फसलों पर ड्रोन के माध्यम से खाद और कीटनाशक का छिड़काव करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई। किसानों को बताया गया कि आधुनिक कृषि उपकरणों का सही तरीके से इस्तेमाल करके खेती के कुछ कठिन और समय लेने वाले कामों को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकता है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन मंत्री अग्निमित्रा पाल ने किया। इस दौरान ड्रोन के माध्यम से खेतों में छिड़काव की प्रक्रिया को लेकर प्रशिक्षण दिया गया। किसानों के लिए यह तकनीक खेती के पारंपरिक तरीकों से अलग है। इसलिए इसके संचालन, इस्तेमाल के तरीके और सावधानियों की जानकारी देना भी इस तरह के प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

मंत्री अग्निमित्रा पाल ने कहा कि ड्रोन के माध्यम से खाद और कीटनाशक का प्रयोग करने से किसानों की मेहनत कम होगी। खेती में तकनीक के इस्तेमाल से काम को आसान बनाने और किसानों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में यह एक उपयोगी कदम हो सकता है।

किसानों को मिल सकते हैं कई फायदे

खेती में खाद और कीटनाशक का छिड़काव एक नियमित लेकिन मेहनत वाला काम है। बड़े खेतों में इस प्रक्रिया को पूरा करने में अधिक समय और श्रम लग सकता है। ऐसे में ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल से छिड़काव की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने की संभावना रहती है। इसके अलावा, खेत के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचने में भी ड्रोन मददगार हो सकता है।

हालांकि, ड्रोन से छिड़काव का लाभ तभी बेहतर तरीके से मिल सकता है, जब इसका संचालन प्रशिक्षित व्यक्ति करे और फसल, मौसम तथा इस्तेमाल किए जा रहे कृषि उत्पाद के अनुसार उचित मात्रा और सावधानियों का पालन किया जाए। कीटनाशकों के मामले में निर्धारित सुरक्षा निर्देशों का पालन करना भी बेहद जरूरी है। किसानों को तकनीक के साथ-साथ इन बातों की जानकारी देना महत्वपूर्ण है, ताकि आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल सुरक्षित और प्रभावी ढंग से हो सके।

जामडोबा में आयोजित प्रशिक्षण शिविर से स्थानीय किसानों को ड्रोन आधारित कृषि तकनीक को समझने और भविष्य में इसके उपयोग की संभावनाओं से परिचित होने का अवसर मिला।

आदिवासी महिलाओं को मिली बिजली से चलने वाली ढेंकी

कार्यक्रम का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा स्वयं सहायता समूह की आदिवासी महिलाओं को बिजली से चलने वाली ढेंकी प्रदान करना रहा। ढेंकी ग्रामीण बंगाल की पारंपरिक धान कूटने की व्यवस्था का एक अहम हिस्सा रही है। पहले गांवों में इसी के माध्यम से धान से चावल तैयार किया जाता था। समय के साथ मशीनों और आधुनिक मिलों के बढ़ते इस्तेमाल के कारण पारंपरिक ढेंकी का उपयोग धीरे-धीरे कम होता गया।

इस परंपरा को फिर से जीवंत करने और महिलाओं को इससे जोड़कर रोजगार का अवसर तैयार करने के उद्देश्य से यह पहल की गई। मंत्री अग्निमित्रा पाल ने औपचारिक रूप से स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को बिजली से चलने वाली ढेंकी सौंपी।

समूह की महिलाओं ने इस पहल पर खुशी जताते हुए कहा कि इससे उन्हें अपनी पुरानी परंपरा को फिर से अपनाने का अवसर मिला है। उनके अनुसार, धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही इस पारंपरिक व्यवस्था को आधुनिक सुविधा के साथ दोबारा शुरू करना उनके लिए उत्साहजनक है।

ढेंकी से चावल तैयार कर बाजार में बेचेंगी महिलाएं

इस योजना के तहत स्वयं सहायता समूह की महिलाएं बिजली से चलने वाली ढेंकी के माध्यम से धान से चावल तैयार करेंगी। इसके बाद तैयार चावल को पैकेट में भरकर बाजार तक पहुंचाया जाएगा। इस तरह महिलाएं केवल चावल तैयार करने तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि पैकेजिंग और बिक्री की प्रक्रिया से भी जुड़ेंगी।

इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पारंपरिक खाद्य उत्पादन को स्वयं सहायता समूह की आर्थिक गतिविधि से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। यदि समूह की महिलाएं नियमित रूप से उत्पादन, पैकेजिंग और बाजार तक पहुंच बनाने में सफल होती हैं, तो इससे उनके लिए आय का एक अतिरिक्त स्रोत विकसित हो सकता है।

स्थानीय स्तर पर तैयार चावल को बाजार में पहचान दिलाने के लिए गुणवत्ता, साफ-सफाई, उचित पैकेजिंग और नियमित आपूर्ति पर ध्यान देना होगा। इसके साथ ही उत्पाद की बिक्री के लिए बाजार और ग्राहकों तक पहुंच बनाना भी जरूरी होगा। स्वयं सहायता समूहों को इस दिशा में उचित मार्गदर्शन और सहयोग मिले तो ऐसी पहल ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने में मदद कर सकती है।

आधुनिक खेती और परंपरा को साथ लेकर चलने की पहल

जामडोबा में आयोजित दोनों कार्यक्रमों की खासियत यह रही कि इनमें ग्रामीण विकास के दो अलग-अलग पहलुओं को एक साथ सामने रखा गया। ड्रोन प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ने का प्रयास किया गया, जबकि बिजली से चलने वाली ढेंकी देकर आदिवासी महिलाओं को पारंपरिक चावल उत्पादन से आर्थिक गतिविधि शुरू करने का अवसर दिया गया।

एक तरफ खेती में तकनीकी बदलाव से किसानों की मेहनत कम करने की संभावना है, तो दूसरी तरफ पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय उत्पादों के माध्यम से महिलाओं के लिए रोजगार के रास्ते तैयार किए जा सकते हैं। अब इन पहलों का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि किसान प्रशिक्षण के बाद ड्रोन तकनीक का कितना उपयोग कर पाते हैं और स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अपने उत्पाद को बाजार में किस तरह स्थापित करती हैं।

जामडोबा गांव में की गई यह पहल आधुनिक तकनीक और पुरानी परंपरा के बीच संतुलन बनाने का प्रयास है। इससे स्थानीय किसानों और महिलाओं को नए अवसर मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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