Monday, 21 September 2026
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बंगाल

जेल में बंद पति के लिए पत्नी ने मांगे वोट, मिलन प्रधान की गिरफ्तारी पर उठाए सवाल

Moutushi · 21 September 2026, 11:41 AM

नंदीग्राम: पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में राजनीतिक घटनाक्रम लगातार नया मोड़ ले रहा है। कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान के जेल में बंद होने के बीच अब उनकी पत्नी अर्पिता प्रधान ने चुनाव प्रचार की कमान संभालते हुए मतदाताओं से अपने पति के पक्ष में मतदान करने की अपील की है। अर्पिता प्रधान ने एक वीडियो संदेश जारी कर लोगों से मतदान के जरिए अपनी राय व्यक्त करने की अपील की और मिलन प्रधान की गिरफ्तारी को लेकर सवाल भी उठाए।

नंदीग्राम विधानसभा सीट पर आगामी 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है। यह चुनाव उस समय और अधिक चर्चा में आ गया, जब तृणमूल कांग्रेस की ओर से मैदान में उतारी गई उम्मीदवार संचिता प्रधान दे ने अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की। समर्थन की घोषणा के कुछ ही समय बाद मिलन प्रधान को 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े पुराने मामलों में गिरफ्तार कर लिया गया। इस घटनाक्रम ने चुनावी राजनीति में हलचल बढ़ा दी।

पुलिस के अनुसार, मिलन प्रधान के खिलाफ लंबे समय से लंबित गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट थे। पुलिस ने बताया कि उनके खिलाफ 2007 में दर्ज मामलों में दंगा, हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, आपराधिक धमकी और अन्य गंभीर आरोप शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, इन मामलों में लंबित वारंट के आधार पर 18 सितंबर को उन्हें गिरफ्तार किया गया। दूसरी ओर, कांग्रेस और मिलन प्रधान के पक्ष की ओर से गिरफ्तारी के समय और परिस्थितियों को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

गिरफ्तारी के बाद मिलन प्रधान को अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें 3 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। ऐसे में 6 अक्टूबर को होने वाले चुनाव से पहले उनके लिए प्रत्यक्ष रूप से चुनाव प्रचार करना मुश्किल हो गया है। चुनाव प्रचार समाप्त होने की तारीख 4 अक्टूबर है, जिसके कारण उनके पास जेल से बाहर आकर प्रचार करने के लिए बहुत सीमित समय बचता है, यदि अदालत से उन्हें राहत मिलती है।

इसी राजनीतिक परिस्थिति के बीच उनकी पत्नी अर्पिता प्रधान का वीडियो संदेश सामने आया है। वीडियो संदेश में उन्होंने नंदीग्राम के मतदाताओं से अपने पति के पक्ष में मतदान करने की अपील की। उन्होंने लोगों से कहा कि वे अपने वोट के जरिए अपनी राय सामने रखें और “झूठ के खिलाफ और सच के पक्ष में” जवाब दें। अर्पिता प्रधान ने अपने पति को पुराने मामले में फंसाए जाने का आरोप भी लगाया है।

हालांकि, पुराने मामलों को लेकर पुलिस और मिलन प्रधान के पक्ष के दावों में अंतर है। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी लंबित गैर-जमानती वारंटों के आधार पर की गई है और चुनाव से पहले ऐसे वारंटों को लागू करने के लिए कार्रवाई की जा रही है। वहीं, मिलन प्रधान के वकील और कांग्रेस नेताओं ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया तथा उसके समय पर सवाल उठाए हैं। इसलिए मामले में दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग देखना जरूरी है।

मिलन प्रधान की गिरफ्तारी ने नंदीग्राम के चुनाव प्रचार की तस्वीर भी बदल दी है। उम्मीदवार खुद मतदाताओं के बीच जाकर प्रचार नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में उनके परिवार और पार्टी कार्यकर्ताओं के जरिए मतदाताओं तक संदेश पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस ने भी संकेत दिया है कि उम्मीदवार की गिरफ्तारी के बावजूद वह चुनावी मैदान से पीछे नहीं हटेगी और पार्टी कार्यकर्ता उनके पक्ष में प्रचार जारी रखेंगे।

नंदीग्राम का राजनीतिक महत्व पहले से ही काफी अधिक रहा है। 2007 का भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन इस क्षेत्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है और मिलन प्रधान के खिलाफ दर्ज पुराने मामले भी उसी दौर से जुड़े बताए जा रहे हैं। यही वजह है कि उनकी गिरफ्तारी का असर केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उपचुनाव के राजनीतिक विमर्श का भी हिस्सा बन गया है।

अर्पिता प्रधान के वीडियो संदेश के सामने आने के बाद कांग्रेस समर्थकों के बीच इसे उम्मीदवार की अनुपस्थिति में प्रचार का महत्वपूर्ण माध्यम माना जा रहा है। दूसरी ओर, राजनीतिक विरोधी इस पूरे घटनाक्रम को अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं। हालांकि, मिलन प्रधान के खिलाफ लगाए गए पुराने आपराधिक आरोपों और उनकी गिरफ्तारी को लेकर अंतिम कानूनी स्थिति अदालत की प्रक्रिया से ही तय होगी।

फिलहाल नंदीग्राम में मुकाबला कई राजनीतिक दावों और आरोप-प्रत्यारोपों के बीच आगे बढ़ रहा है। एक तरफ मिलन प्रधान जेल में हैं और उनकी पत्नी मतदाताओं से उनके पक्ष में मतदान की अपील कर रही हैं, तो दूसरी तरफ अन्य उम्मीदवार अपने-अपने तरीके से प्रचार में जुटे हैं। मिलन प्रधान की न्यायिक हिरासत 3 अक्टूबर तक है और मतदान 6 अक्टूबर को होना है। ऐसे में चुनाव से पहले आने वाले दिनों में अदालत से जुड़े घटनाक्रम और राजनीतिक प्रचार दोनों पर नंदीग्राम की नजर बनी रहेगी।

अर्पिता प्रधान की अपील ने इस उपचुनाव को एक भावनात्मक और राजनीतिक दोनों तरह के मुद्दे से जोड़ दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नंदीग्राम के मतदाता इस पूरे घटनाक्रम को किस तरह देखते हैं और 6 अक्टूबर को अपने मत के जरिए क्या प्रतिक्रिया देते हैं। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के बावजूद उनके पक्ष की चुनावी गतिविधियां रुकी नहीं हैं और उनकी पत्नी का वीडियो संदेश इस अभियान का नया चेहरा बनकर सामने आया है।

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