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आसनसोल-दुर्गापुर

आसनसोल में ऑटो-टोटो को लेकर बस मालिकों की बड़ी बैठक, रोजगार पर मंडराया संकट!

Moutushi · 12 September 2026, 5:57 PM

आसनसोल: आसनसोल शिल्पांचल में ऑटो और टोटो की बढ़ती संख्या को लेकर बस मालिकों और कर्मचारियों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। यात्रियों को लेकर बस और टोटो के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा अब रोजगार और आय के मुद्दे से भी जुड़ती नजर आ रही है। एक दिन पहले बाराबनी में इसी विषय को लेकर विवाद और मिनी बस चालकों की हड़ताल के बाद शनिवार को आसनसोल सिटी बस स्टैंड में बस परिवहन से जुड़े मालिकों और कर्मचारियों की अहम बैठक हुई।

बैठक में मुख्य रूप से ऑटो-टोटो की बढ़ती संख्या, उनके संचालन से बस सेवा पर पड़ रहे कथित प्रभाव और बस कर्मचारियों के रोजगार को लेकर चर्चा की गई। बैठक के बाद बस मालिकों और कर्मचारियों ने अपनी समस्याओं को सामने रखते हुए सरकार और प्रशासन से इस दिशा में आवश्यक कदम उठाने की मांग की।

टोटो की बढ़ती संख्या से बस सेवा प्रभावित होने का दावा

बस मालिकों और कर्मचारियों का कहना है कि शिल्पांचल के विभिन्न मार्गों पर टोटो की संख्या लगातार बढ़ रही है। उनके अनुसार, कई स्थानों पर यात्रियों को लेने के लिए टोटो की संख्या इतनी अधिक हो गई है कि इसका असर पारंपरिक बस सेवा पर पड़ रहा है।

बैठक में बस मालिकों की ओर से दावा किया गया कि यात्री अब कम दूरी के लिए बड़ी संख्या में टोटो का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे बसों में यात्रियों की संख्या प्रभावित होती है और अंततः इसका असर बस संचालन से जुड़े कर्मचारियों की आय पर पड़ता है।

बस मालिकों का कहना है कि बस परिवहन व्यवस्था में चालक, परिचालक और अन्य कर्मचारियों की आजीविका जुड़ी हुई है। यदि बसों की आय लगातार कम होती है, तो इसका सीधा असर उन परिवारों पर पड़ सकता है जिनकी रोजी-रोटी इसी क्षेत्र से जुड़ी है।

परमिट और टैक्स का मुद्दा भी उठा

बैठक के दौरान बस मालिकों ने परमिट और कर भुगतान को लेकर भी अपनी परेशानी सामने रखी। उनका कहना है कि वे सरकार से निर्धारित प्रक्रिया के तहत परमिट लेकर बसों का संचालन करते हैं और नियमित रूप से सरकार को टैक्स का भुगतान करते हैं।

बस मालिकों के अनुसार, बस संचालन के दौरान परमिट, कर, कर्मचारियों की मजदूरी, वाहन के रखरखाव और अन्य खर्चों का वहन करना पड़ता है। ऐसे में यदि दूसरी ओर कुछ वाहन कथित तौर पर बिना आवश्यक नियमों या परमिट के संचालित होते हैं, तो उनके लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाता है।

हालांकि, किन-किन टोटो के पास आवश्यक दस्तावेज या परमिट हैं और किनके पास नहीं हैं, इसे लेकर अंतिम स्थिति संबंधित विभाग की जांच और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।

बाराबनी विवाद के बाद आसनसोल में बैठक

टोटो को लेकर विवाद का मुद्दा उस समय और चर्चा में आ गया जब एक दिन पहले बाराबनी क्षेत्र में इसी विषय को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद मिनी बस चालकों की हड़ताल की स्थिति भी सामने आई थी। इस घटनाक्रम के बाद शनिवार को आसनसोल सिटी बस स्टैंड में बस परिवहन से जुड़े मालिकों और कर्मचारियों की बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बैठक में मौजूद लोगों ने कहा कि समस्या को केवल बस और टोटो के बीच प्रतिस्पर्धा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, यह बड़ी संख्या में परिवहन कर्मचारियों के रोजगार और परिवारों की आय से जुड़ा विषय है। इसलिए सरकार और प्रशासन को पूरे परिवहन क्षेत्र की स्थिति को ध्यान में रखकर कोई स्थायी समाधान तलाशना चाहिए।

नई सरकार से कार्रवाई की उम्मीद थी

बस मालिकों ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि नई सरकार के आने के बाद बिना नियम और आवश्यक परमिट के संचालित होने वाले टोटो के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। उनका आरोप है कि अब तक उनकी समस्याओं का समाधान उस स्तर पर नहीं हुआ है जिसकी वे अपेक्षा कर रहे थे।

बस मालिकों और कर्मचारियों ने मांग की कि प्रशासन शहर और शिल्पांचल में चलने वाले ऑटो-टोटो की स्थिति की जांच करे। यदि कोई वाहन निर्धारित नियमों का पालन नहीं कर रहा है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

उनका कहना है कि उनका उद्देश्य यात्रियों को परेशानी में डालना नहीं है, बल्कि परिवहन व्यवस्था में नियमों का समान रूप से पालन सुनिश्चित कराना है।

यात्रियों के लिए टोटो भी बना महत्वपूर्ण साधन

दूसरी ओर, शहरी और ग्रामीण इलाकों में टोटो कम दूरी की यात्रा के लिए आम लोगों का महत्वपूर्ण परिवहन साधन बन चुका है। संकरी सड़कों और छोटी दूरी वाले मार्गों पर टोटो लोगों को अपेक्षाकृत आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। यही वजह है कि कई यात्री अपनी सुविधा के अनुसार टोटो को प्राथमिकता देते हैं।

ऐसे में बस मालिकों और टोटो चालकों के बीच संतुलन बनाना प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। एक तरफ यात्रियों की सुविधा और रोजगार का सवाल है, तो दूसरी तरफ परमिट, यातायात नियम और परिवहन व्यवस्था को व्यवस्थित रखने की जिम्मेदारी भी प्रशासन की है।

नियमों के पालन पर जोर

बस मालिकों और कर्मचारियों का कहना है कि वे चाहते हैं कि सभी प्रकार के सार्वजनिक परिवहन वाहनों के लिए नियम समान रूप से लागू हों। यदि किसी वाहन के लिए परमिट, दस्तावेज, कर या अन्य वैधानिक आवश्यकताएं निर्धारित हैं, तो उनका पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

बैठक के बाद बस मालिकों और कर्मचारियों ने सरकार से उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करने की मांग की। उनका कहना है कि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में बस परिवहन क्षेत्र में रोजगार और संचालन से जुड़ी परेशानियां और बढ़ सकती हैं।

सरकार और प्रशासन के अगले कदम पर नजर

फिलहाल आसनसोल में ऑटो-टोटो और बस परिवहन को लेकर उठे इस मुद्दे पर सभी की नजर प्रशासन के अगले कदम पर है। बस मालिकों और कर्मचारियों की ओर से अपनी चिंता स्पष्ट रूप से सामने रख दी गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग परिवहन नियमों के पालन, परमिट की जांच और बस तथा टोटो के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा को लेकर क्या कदम उठाता है।

आसनसोल शिल्पांचल में सार्वजनिक परिवहन बड़ी संख्या में लोगों की रोजमर्रा की जरूरत से जुड़ा है। इसलिए बस मालिकों, कर्मचारियों, टोटो चालकों और यात्रियों—सभी के हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित व्यवस्था बनाना जरूरी माना जा रहा है। शनिवार की बैठक ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि क्या नियमों के समान पालन के साथ बस और टोटो दोनों के लिए ऐसी व्यवस्था बनाई जा सकती है, जिससे यात्रियों की सुविधा भी बनी रहे और परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों का रोजगार भी सुरक्षित रहे?

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