सालानपुर: लगातार बारिश के कारण मैथन और पंचेत डैम से बढ़ाए गए पानी के बहाव के बीच अब लोगों के लिए राहत की खबर सामने आई है। बारिश थमने और जलाशयों में पानी की आवक नियंत्रित होने के बाद दामोदर घाटी निगम ने दोनों प्रमुख जलाशयों से पानी छोड़ने की मात्रा में लगातार कमी की है। शुक्रवार दोपहर जारी ताजा आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मैथन डैम से अब 35 हजार क्यूसेक और पंचेत डैम से 40 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। यानी दोनों डैमों को मिलाकर कुल 75 हजार क्यूसेक पानी का बहाव जारी है।
पिछले दिनों लगातार बारिश और जलग्रहण क्षेत्रों से पानी की तेज आवक के कारण मैथन तथा पंचेत डैम से पानी छोड़ने की मात्रा में अचानक बढ़ोतरी करनी पड़ी थी। खासकर बुधवार के बाद पानी की आवक में तेजी देखी गई थी। इसके चलते गुरुवार सुबह डैम से छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा बढ़ाई गई। हालांकि बाद में बारिश की रफ्तार कम होने और जलाशयों में पानी की आवक घटने के साथ स्थिति में सुधार आया। इसके बाद पानी छोड़ने की मात्रा को चरणबद्ध तरीके से कम किया गया।
शुक्रवार सुबह दर्ज आंकड़ों के मुताबिक मैथन डैम का जलस्तर 486.09 फीट और पंचेत डैम का जलस्तर 413.52 फीट रहा। जलस्तर और पानी की आवक पर लगातार नजर रखते हुए डीवीसी की ओर से डिस्चार्ज को नियंत्रित किया जा रहा है। जलाशयों में आने वाले पानी की मात्रा में बदलाव के अनुसार आगे भी पानी छोड़ने की मात्रा में परिवर्तन संभव है।
गुरुवार को अचानक बढ़ा था पानी का बहाव
पिछले कुछ दिनों की स्थिति को देखें तो डैम प्रबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती पानी की आवक में अचानक होने वाला उतार-चढ़ाव रहा। बुधवार को जलग्रहण क्षेत्र से पानी की आवक तेजी से बढ़ी थी। इसके बाद गुरुवार सुबह मैथन और पंचेत दोनों जलाशयों से पानी छोड़ने की मात्रा में उल्लेखनीय वृद्धि करनी पड़ी थी।
हालांकि दोपहर के बाद जब पानी की आवक में कमी दिखाई दी, तो डिस्चार्ज को भी नियंत्रित किया गया। शुक्रवार तक इसमें और कटौती की गई। इससे स्पष्ट है कि फिलहाल डैम प्रबंधन स्थिति पर लगातार नजर रखते हुए आवश्यकता के अनुसार पानी छोड़ने की रणनीति अपना रहा है।
डैम से पानी छोड़ने का सीधा प्रभाव नीचे बहने वाली नदियों के जलस्तर पर पड़ता है। इसलिए मैथन और पंचेत से डिस्चार्ज घटने के बावजूद प्रशासन की निगाह बराकर और दामोदर नदी के जलस्तर पर बनी हुई है। नदियों के आसपास रहने वाले लोगों को किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करने की सलाह दी जा रही है।
बराकर और दामोदर पर प्रशासन की नजर
मैथन और पंचेत डैम से छोड़ा गया पानी आगे चलकर बराकर और दामोदर नदी की जलधारा को प्रभावित करता है। ऐसे में डैम से पानी छोड़ने की मात्रा कम होने के बावजूद नदी के किनारे बसे इलाकों में प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। खासकर निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को नदी के पास जाने से बचने की सलाह दी जा रही है।
बारिश के बाद जमीन में नमी अधिक होने और नदी-नालों में पानी का बहाव तेज रहने के कारण सामान्य दिनों की तुलना में परिस्थितियां अलग हो सकती हैं। अचानक दोबारा बारिश होने या जलग्रहण क्षेत्र में पानी की आवक बढ़ने पर डैम से डिस्चार्ज भी बढ़ाया जा सकता है। इसलिए स्थानीय स्तर पर निगरानी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जलस्तर घटा, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं
मैथन और पंचेत से पानी छोड़ने की मात्रा में कमी निश्चित रूप से राहत देने वाली स्थिति है, लेकिन इसे खतरे की पूरी तरह समाप्ति के रूप में नहीं देखा जा रहा है। जलाशयों का प्रबंधन मौसम, जलस्तर और पानी की आवक जैसे कई कारकों को ध्यान में रखकर किया जाता है। इसलिए आने वाले घंटों में परिस्थितियों के अनुसार डिस्चार्ज में फिर बदलाव हो सकता है।
प्रशासन और डीवीसी के सामने इस समय संतुलन बनाए रखने की चुनौती है। एक तरफ जलाशयों में पानी का स्तर नियंत्रित रखना जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ नीचे के क्षेत्रों में अचानक अधिक पानी पहुंचने से बचाना भी महत्वपूर्ण है। इसी कारण पानी छोड़ने की मात्रा को लगातार निगरानी के आधार पर घटाया या बढ़ाया जाता है।
निचले इलाकों के लोगों को सावधानी बरतने की अपील
डैम से पानी छोड़ने की मात्रा कम होने के बावजूद नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सावधानी बरतने की अपील की जा रही है। लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे नदी के किनारे अनावश्यक रूप से न जाएं और तेज बहाव वाले पानी में उतरने का प्रयास बिल्कुल न करें।
स्थानीय लोगों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि डैम से पानी छोड़ने की सूचना को गंभीरता से लिया जाए। नदी का जलस्तर देखने या तस्वीर लेने के लिए किनारे तक जाना भी जोखिम भरा हो सकता है। खासकर बच्चों को नदी, नाला या जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रखने की जरूरत है।
डीवीसी के अगले फैसले पर रहेगी नजर
अब सबकी नजर डीवीसी के अगले आधिकारिक आंकड़ों पर है। यदि जलग्रहण क्षेत्र में बारिश नहीं होती और पानी की आवक इसी तरह नियंत्रित रहती है, तो डिस्चार्ज में आगे भी कमी की संभावना बन सकती है। इसके विपरीत यदि ऊपरी क्षेत्रों में दोबारा भारी बारिश होती है, तो जलाशयों में पानी की आवक बढ़ने पर पानी छोड़ने की मात्रा फिर बढ़ाई जा सकती है।
फिलहाल शुक्रवार दोपहर 2:30 बजे के आंकड़ों के अनुसार मैथन से 35 हजार और पंचेत से 40 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। दोनों डैमों से कुल 75 हजार क्यूसेक पानी का बहाव जारी है। बारिश रुकने के बाद डिस्चार्ज में आई यह बड़ी कमी आसपास के लोगों के लिए राहत जरूर लेकर आई है, लेकिन बराकर और दामोदर नदी के किनारे रहने वाले लोगों के लिए सतर्कता अभी भी जरूरी है। प्रशासन की निगरानी और डीवीसी के जलस्तर संबंधी आंकड़े आने वाले समय में स्थिति की अगली तस्वीर साफ करेंगे।




Leave a Reply