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बंगाल में किडनी तस्करी गिरोह का बड़ा खुलासा, रेट चार्ट के साथ बांग्लादेशी नागरिक गिरफ्तार

Moutushi · 30 August 2026, 4:03 PM

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में कथित किडनी तस्करी गिरोह की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस नेटवर्क से जुड़ी चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ रही हैं। पुलिस जांच में अब इस गिरोह के कथित अंतरराष्ट्रीय संपर्क की भी पड़ताल शुरू हो गई है। बंगाल विशेष कार्य बल ने बागुईआटी इलाके के अतघरा फुलतला से रसेल अहमद नाम के एक बांग्लादेशी नागरिक को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, रसेल का नाम पहले भी किडनी तस्करी से जुड़े एक मामले में सामने आ चुका है।

रसेल को कथित तौर पर शनिवार रात बंगाल विशेष कार्य बल ने गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद उसे विधाननगर दक्षिण थाने की पुलिस को सौंप दिया गया, जहां उससे पूरे मामले को लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि किडनी तस्करी के इस कथित नेटवर्क में उसकी भूमिका क्या थी और उसके संपर्क में कौन-कौन लोग थे।

2024 में भी गिरफ्तार हो चुका है रसेल

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, रसेल अहमद को वर्ष 2024 में भी किडनी तस्करी गिरोह में कथित संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उस समय दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बाद उसके बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई थीं। जांच एजेंसियों के अनुसार, रसेल बांग्लादेशी नागरिक है और कथित तौर पर अवैध तरीके से भारत में दाखिल हुआ था।

पुलिस का यह भी आरोप है कि भारत में रहने के दौरान उसने कथित तौर पर आधार कार्ड और पैन कार्ड जैसे दस्तावेज भी बनवा लिए थे। अब एक बार फिर किडनी तस्करी से जुड़े मामले में उसका नाम सामने आने के बाद जांच एजेंसियां पुराने मामले और मौजूदा जांच के बीच संभावित संबंधों की पड़ताल कर रही हैं।

प्रभास मंडल से पूछताछ के बाद सामने आया नाम

किडनी तस्करी के इस कथित नेटवर्क की जांच में कुछ दिन पहले प्रभास मंडल नाम के एक व्यक्ति की गिरफ्तारी हुई थी। पुलिस के अनुसार, प्रभास से पूछताछ के दौरान रसेल अहमद का नाम सामने आया। इसके बाद जांच एजेंसियों ने रसेल की तलाश शुरू की और अंततः उसे बागुईआटी क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस को संदेह है कि यह कथित नेटवर्क केवल एक इलाके तक सीमित नहीं हो सकता। भारत-बांग्लादेश सीमा से जुड़े क्षेत्रों से लेकर दूसरे राज्यों तक इसके संपर्क होने की आशंका की जांच की जा रही है। हालांकि, नेटवर्क की वास्तविक पहुंच और इसमें शामिल लोगों की संख्या का पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा।

आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निशाना बनाने का आरोप

जांच में पुलिस को कथित तौर पर यह जानकारी मिली है कि गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लोगों को निशाना बनाता था। आरोप है कि जरूरतमंद लोगों को आकर्षक नौकरी और बेहतर आर्थिक भविष्य का लालच दिया जाता था। इसके बाद उन्हें दूसरे राज्यों में ले जाकर कथित तौर पर किडनी निकालने के लिए तैयार किया जाता था।

पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पीड़ितों से संपर्क कौन करता था, उन्हें कौन दूसरे स्थानों तक पहुंचाता था और चिकित्सा प्रक्रिया से जुड़े लोगों की भूमिका क्या थी। जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि कथित तौर पर अंग निकालने के बाद उन्हें कहां और किस माध्यम से पहुंचाया जाता था।

रसेल के पास से मिला कथित रेट चार्ट

मामले में सबसे महत्वपूर्ण बरामदगी में से एक रसेल अहमद के पास से मिला कथित रेट चार्ट बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, इस दस्तावेज में अलग-अलग स्थानों और कथित तौर पर किडनी की मांग से जुड़ी जानकारियां दर्ज थीं।

इसके अलावा जांचकर्ताओं को विभिन्न राज्यों के निजी अस्पतालों से संबंधित कुछ कागजात भी मिले हैं। इन दस्तावेजों में कथित तौर पर यह जानकारी दर्ज थी कि किन अस्पतालों में कितने गुर्दों की आवश्यकता है। पुलिस अब इन दस्तावेजों की सत्यता और उनके स्रोत की जांच कर रही है।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन दस्तावेजों का कथित तस्करी नेटवर्क से सीधा संबंध है या नहीं। किसी अस्पताल या संस्था की भूमिका को लेकर अभी कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। दस्तावेजों की जांच और संबंधित लोगों से पूछताछ के बाद ही तस्वीर साफ होगी।

18 अगस्त की शिकायत से शुरू हुई जांच

बताया जा रहा है कि मामले की जांच की शुरुआत 18 अगस्त को हुई, जब एक पीड़ित के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर विधाननगर पुलिस ने कथित बिचौलिए प्रभास मंडल को गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान पुलिस को कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी मिली और इसी क्रम में रसेल अहमद का नाम सामने आया।

अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शिकायतकर्ता के परिवार से किस प्रकार संपर्क किया गया था और उन्हें किस तरह कथित तौर पर इस नेटवर्क में फंसाने का प्रयास किया गया। जांचकर्ताओं की नजर उन सभी संभावित कड़ियों पर है, जिनके माध्यम से पीड़ितों को कथित तौर पर दूसरे राज्यों तक पहुंचाया जाता था।

अंतरराष्ट्रीय संपर्क की भी जांच

रसेल के बांग्लादेशी नागरिक होने के कारण जांच का दायरा अब भारत-बांग्लादेश सीमा से जुड़े संभावित संपर्कों तक भी बढ़ गया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या कथित नेटवर्क में सीमा पार से किसी प्रकार की मदद या संपर्क मौजूद था।

हालांकि, केवल किसी व्यक्ति की नागरिकता के आधार पर पूरे नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय होने का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। पुलिस दस्तावेजों, मोबाइल संपर्क, वित्तीय लेनदेन और अन्य साक्ष्यों की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।

अदालत में पेशी और आगे की जांच

गिरफ्तार रसेल अहमद से विधाननगर दक्षिण थाने में पूछताछ जारी है। पुलिस उसे अदालत में पेश कर आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत पूछताछ की अनुमति मांग सकती है। जांच एजेंसियां यह जानना चाहती हैं कि कथित गिरोह में उसकी भूमिका क्या थी, वह किन लोगों के संपर्क में था और उसके पास बरामद दस्तावेज कहां से आए।

किडनी तस्करी जैसे गंभीर अपराध में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती कथित नेटवर्क की पूरी श्रृंखला का पता लगाना है। केवल बिचौलियों तक पहुंचने के बजाय जांच एजेंसियों को कथित तौर पर पीड़ितों की पहचान करने वाले लोगों, उन्हें स्थानांतरित करने वालों और चिकित्सा प्रक्रिया से जुड़े संभावित संदिग्धों तक पहुंचना होगा।

फिलहाल रसेल अहमद की गिरफ्तारी के बाद मामले में एक और महत्वपूर्ण कड़ी जुड़ गई है। रेट चार्ट, अस्पतालों से संबंधित कथित दस्तावेज और पहले गिरफ्तार किए गए प्रभास मंडल से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस जांच आगे बढ़ा रही है। आने वाले दिनों में पूछताछ और दस्तावेजों की जांच से इस कथित किडनी तस्करी नेटवर्क के बारे में और भी महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है।

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