आसनसोल: नबी दिवस के अवसर पर आसनसोल में धार्मिक जुलूस के दौरान तेज आवाज में डीजे बजाने के मामले में पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए डीजे उपकरण जब्त कर लिया। ध्वनि प्रदूषण को लेकर प्रशासन की सख्ती के बीच हुई इस कार्रवाई से धार्मिक आयोजनों में तेज आवाज वाले ध्वनि उपकरणों के इस्तेमाल को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। पुलिस की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है।
बताया गया कि नबी दिवस के अवसर पर आसनसोल की सड़कों से धार्मिक जुलूस निकाला जा रहा था। जुलूस के दौरान डीजे के माध्यम से धार्मिक गीत बजाए जा रहे थे। इसी दौरान पुलिस प्रशासन की नजर तेज आवाज में बज रहे डीजे पर गई। इसके बाद पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए डीजे उपकरण को अपने कब्जे में ले लिया। कार्रवाई के बाद इलाके में कुछ समय के लिए चर्चा का माहौल बना रहा।
ध्वनि प्रदूषण को लेकर प्रशासन सख्त
पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद ध्वनि प्रदूषण को लेकर प्रशासन की ओर से सख्ती बढ़ाए जाने की बात कही जा रही है। धार्मिक स्थलों और विभिन्न आयोजनों में लाउडस्पीकर तथा अन्य ध्वनि उपकरणों के इस्तेमाल को लेकर नियमों के पालन पर जोर दिया जा रहा है।
आसनसोल में नबी दिवस के जुलूस के दौरान डीजे जब्त किए जाने की घटना को भी इसी अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रशासन की ओर से यह संदेश देने की कोशिश मानी जा रही है कि धार्मिक या सामाजिक आयोजन किसी भी समुदाय से संबंधित हो, निर्धारित ध्वनि सीमा और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े नियमों का पालन करना जरूरी होगा।
हाल के दिनों में ध्वनि प्रदूषण को लेकर मंदिर, मस्जिद, चर्च और गुरुद्वारे समेत विभिन्न धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई की चर्चाएं सामने आई हैं। ऐसे में नबी दिवस के दौरान डीजे जब्त किए जाने से यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा के केंद्र में आ गया है।
जुलूस के दौरान पुलिस की नजर
नबी दिवस के मौके पर बड़ी संख्या में लोग धार्मिक कार्यक्रमों और जुलूस में शामिल हुए। ऐसे आयोजनों के दौरान भीड़, यातायात और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। इसके साथ ही ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी होती है।
बताया जा रहा है कि पुलिस ने जुलूस के दौरान डीजे के इस्तेमाल पर कार्रवाई करते हुए उपकरण जब्त किया। हालांकि, पुलिस की ओर से इस मामले में विस्तृत जानकारी या आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर आधिकारिक विवरण सामने आना बाकी है।
डीजे जब्ती की घटना के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि आने वाले दिनों में दुर्गापूजा, गणेश पूजा, काली पूजा, विसर्जन जुलूस और अन्य धार्मिक आयोजनों के दौरान ध्वनि प्रदूषण को लेकर प्रशासन किस तरह की नीति अपनाएगा।
कांग्रेस नेता शाह आलम ने किया स्वागत
पुलिस कार्रवाई पर कांग्रेस नेता शाह आलम की प्रतिक्रिया भी सामने आई। उन्होंने पुलिस के कदम को सराहनीय बताया। हालांकि, उन्होंने इसके साथ एक महत्वपूर्ण बात भी रखी। शाह आलम का कहना है कि ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ यदि प्रशासन कार्रवाई कर रहा है, तो यह कार्रवाई सभी धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में समान रूप से लागू होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी एक समुदाय को निशाना बनाकर प्रशासन की ओर से कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। यदि नियम सभी के लिए समान हैं और प्रशासन बिना किसी भेदभाव के सभी आयोजनों में उनका पालन सुनिश्चित करता है, तो ऐसी कार्रवाई का स्वागत किया जाना चाहिए।
शाह आलम की इस टिप्पणी के बाद ध्वनि प्रदूषण के मुद्दे पर समान कार्रवाई और प्रशासन की निष्पक्षता को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
आने वाले त्योहारों पर भी रहेगी नजर
आसनसोल और पश्चिम बर्दवान जिले में आने वाले समय में कई बड़े धार्मिक आयोजन होने हैं। दुर्गापूजा के साथ विभिन्न पूजा समितियों की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम, जुलूस और विसर्जन समारोह आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों में भी बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है।
ऐसे में नबी दिवस के दौरान डीजे जब्त किए जाने की कार्रवाई को आने वाले त्योहारों के लिए प्रशासन के रुख का संकेत भी माना जा रहा है। यदि ध्वनि प्रदूषण को लेकर इसी तरह सख्ती जारी रहती है, तो पूजा समितियों और आयोजकों को भी ध्वनि उपकरणों के इस्तेमाल से पहले निर्धारित नियमों का ध्यान रखना होगा।
ध्वनि प्रदूषण का असर आम लोगों के साथ-साथ बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों पर पड़ सकता है। इसी कारण सार्वजनिक स्थानों पर तेज आवाज में ध्वनि उपकरणों के इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए समय-समय पर प्रशासन की ओर से दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं।
नियम सभी के लिए समान होने की मांग
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात अब यह होगी कि प्रशासन आगे ध्वनि प्रदूषण के नियमों को किस तरह लागू करता है। कांग्रेस नेता शाह आलम ने स्पष्ट रूप से कहा है कि कार्रवाई किसी विशेष समुदाय तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि नियम सभी के लिए हैं, तो सभी धार्मिक आयोजनों में समान रूप से उनका पालन कराया जाना चाहिए।
नबी दिवस के दौरान डीजे जब्त किए जाने की कार्रवाई ने आसनसोल में ध्वनि प्रदूषण और धार्मिक आयोजनों को लेकर नई बहस को जन्म दिया है। एक तरफ प्रशासन सार्वजनिक शांति, यातायात व्यवस्था और ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण को लेकर सख्ती का संदेश दे रहा है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दल इस बात पर नजर रख रहे हैं कि आने वाले त्योहारों में इन नियमों को किस तरह लागू किया जाता है।
फिलहाल डीजे जब्ती की यह घटना आसनसोल में चर्चा का विषय बनी हुई है। आने वाले दिनों में प्रशासन की ओर से अन्य धार्मिक और सामाजिक आयोजनों के दौरान की जाने वाली कार्रवाई पर लोगों की नजर रहेगी। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि आयोजक धार्मिक उत्सवों की परंपरा और उत्साह को बनाए रखते हुए सार्वजनिक व्यवस्था तथा ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों का कितना पालन करते हैं।






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